Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 12 (उष्मागतिकी) Solutions
Here we have provided Solution for Chapter 12 (उष्मागतिकी) of Physics (भौतिक विज्ञान) subject for Class 11th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Physics (भौतिक विज्ञान) such as Chapter 1 (भौतिक जगत), Chapter 2 (मात्रक तथा मापन), Chapter 3 (सरल रेखा में गति), Chapter 4 (समतल में गति), Chapter 5 (गणित के नियम), Chapter 6 (कार्य, उर्जा तथा शक्ति), Chapter 7 (कणों के नियम तथा घूर्णी गति), Chapter 8 (गुरुत्वाकर्षण), Chapter 9 (ठोसों के यांत्रिक गुण), Chapter 10 (तरलों के यांत्रिक गुण), Chapter 11 (द्रव्य के तापीय गुण), Chapter 12 (उष्मागतिकी), Chapter 13 (अणुगति सिद्धांत), Chapter 14 (दोलन) and Chapter 15 (तरंगें). Summary of the same is given below:
| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 11th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 11th students |
| Subject | Physics (भौतिक विज्ञान) |
| Chapter Name | Chapter 12 (उष्मागतिकी) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 15 |
Studying Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 12 (उष्मागतिकी) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.
Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 12 (उष्मागतिकी) Solutions
View the following solutions for Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 12 (उष्मागतिकी). These solutions are available for viewing online.
प्रइन 1. कोई गीजर 3.0 लीटर प्रति मिनट की दर से बहते हुए जल को 27९८ से 77९८ तक गर्म करता है। यदि गीजर का परिचालन गैस बर्नर द्वारा किया जाए तो ईंधन के व्यय की क्या दर होगी? बर्नर के ईंघन की दहन-ऊष्मा 4.0: 104 7६87 है।
हल:
दिया गया है:
जल के प्रवाह की दर = 3.0 L/min = 3.0 × 10⁻³ m³/min (चूँकि 1 L = 10⁻³ m³)
जल का घनत्व (ρ) = 1000 kg/m³
जल के द्रव्यमान की प्रवाह दर (m) = आयतन × घनत्व = (3.0 × 10⁻³ m³/min) × (1000 kg/m³) = 3.0 kg/min
ताप में वृद्धि (ΔT) = 77°C – 27°C = 50°C
जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता (s) = 4.2 × 10³ J/kg-°C
जल द्वारा प्रति मिनट अवशोषित ऊष्मा (Q) = m × s × ΔT = 3.0 kg/min × (4.2 × 10³ J/kg-°C) × 50°C = 6.3 × 10⁵ J/min
ईंधन की दहन ऊष्मा = 4.0 × 10⁴ J/g = 4.0 × 10⁷ J/kg
माना ईंधन की खपत दर = m' kg/min
ईंधन द्वारा उत्पन्न ऊष्मा = जल द्वारा अवशोषित ऊष्मा
अतः, m' × (4.0 × 10⁷ J/kg) = 6.3 × 10⁵ J/min
m' = (6.3 × 10⁵) / (4.0 × 10⁷) kg/min = 0.01575 kg/min = 15.75 g/min
अतः ईंधन की खपत दर 15.75 ग्राम प्रति मिनट है।
प्रश्न 2. स्थिर दाब पर 2.0::10 5 नाइट्रोजन (कमरे के ताप पर) के ताप में 45" ८ वृद्धि करने के लिए कितनी ऊष्मा की आपूर्ति की जानी चाहिए? (४, का अणुभार- 28; R = 8.3 Jmol 1K")
हल:
दिया गया है:
नाइट्रोजन का द्रव्यमान (m) = 2.0 × 10⁻² kg
ताप वृद्धि (ΔT) = 45°C = 45 K (तापांतर सेल्सियस और केल्विन में समान होता है)
नाइट्रोजन का अणुभार (M) = 28 g/mol = 28 × 10⁻³ kg/mol
मोलों की संख्या (n) = द्रव्यमान / अणुभार = (2.0 × 10⁻² kg) / (28 × 10⁻³ kg/mol) = (20/28) mol ≈ 0.714 mol
नाइट्रोजन एक द्विपरमाणुक गैस है। स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता, Cp = (7/2)R
Cp = (7/2) × 8.3 J mol⁻¹ K⁻¹ = 29.05 J mol⁻¹ K⁻¹
आपूर्ति की जाने वाली ऊष्मा (Q) = n × Cp × ΔT = 0.714 mol × 29.05 J mol⁻¹ K⁻¹ × 45 K
Q ≈ 0.714 × 29.05 × 45 J ≈ 933.7 J
अतः लगभग 934 जूल ऊष्मा की आपूर्ति करनी होगी।
प्रश्न 3. व्याख्या कीजिए कि ऐसा क्यों होता है?
(७) भिन्न-भिन्न तापों 71 व 7, के दो पिण्डों को यदि ऊष्मीय सम्पर्क में लाया जाए तो यह आवश्यक नहीं है कि उनका अन्तिम ताप (४१ + 71४)/2 ही हो।
(0) रासायनिक या नाभिकीय संयत्रों में शीतलक (अर्थात् द्रव जो सयंत्र के भिन्न-भिन्न भागों को अधिक गर्म होने से रोकता है) की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होनी चाहिए।
(० कार को चलाते-चलाते उसके टायरों में वायुदाब बढ़ जाता है।
(१) किसी बन्दरगाह के. समीप के शहर की जलवायु, समान अक्षांश के किसी रेगिस्तानी शहर की जलवायु से अधिक शीतोष्ण होती है।
हल:
(क) जब भिन्न तापों T₁ और T₂ की दो वस्तुओं को ऊष्मीय संपर्क में लाया जाता है, तो ऊष्मा उच्च ताप वाली वस्तु से निम्न ताप वाली वस्तु की ओर प्रवाहित होती है जब तक कि दोनों का ताप समान न हो जाए। यह अंतिम साम्य ताप (T₁ + T₂)/2 तभी होगा जब दोनों वस्तुओं की ऊष्मा धारिताएँ (द्रव्यमान × विशिष्ट ऊष्मा) समान हों। यदि उनकी ऊष्मा धारिताएँ भिन्न हैं, तो अंतिम ताप उनके औसत से भिन्न होगा।
(ख) शीतलक का कार्य संयंत्र के विभिन्न भागों से अतिरिक्त ऊष्मा को अवशोषित करके उन्हें ठंडा रखना है। किसी पदार्थ द्वारा अवशोषित ऊष्मा Q = m × s × ΔT के अनुक्रमानुपाती होती है, जहाँ s विशिष्ट ऊष्मा है। अधिक विशिष्ट ऊष्मा वाले शीतलक के लिए, समान द्रव्यमान पर समान ताप वृद्धि के लिए अधिक ऊष्मा अवशोषित की जा सकती है। इस प्रकार, अधिक विशिष्ट ऊष्मा वाला शीतलक अधिक कुशलता से ऊष्मा हटाता है।
(ग) कार चलाते समय टायरों और सड़क के बीच घर्षण के कारण टायरों का ताप बढ़ जाता है। टायर के अंदर की वायु भी गर्म हो जाती है। चूँकि टायर का आयतन लगभग स्थिर रहता है, इसलिए चार्ल्स के नियम (P ∝ T, स्थिर आयतन पर) के अनुसार, ताप बढ़ने पर दाब भी बढ़ जाता है।
(घ) बंदरगाह के समीप के शहरों में आपेक्षिक आर्द्रता अधिक होती है क्योंकि जल निकायों से निरंतर जल वाष्पन होता रहता है। जल की उच्च विशिष्ट ऊष्मा के कारण, समुद्र दिन के समय गर्मी को अवशोषित कर लेता है और रात को धीरे-धीरे मुक्त करता है, जिससे तटीय क्षेत्रों में तापमान में अधिक चरम परिवर्तन नहीं होते। दूसरी ओर, रेगिस्तान में वायु शुष्क होती है और रेत की विशिष्ट ऊष्मा कम होती है, जिससे दिन में तेज गर्मी और रात में तेज ठंड पड़ती है। इसलिए बंदरगाह वाले शहर की जलवायु अधिक समशीतोष्ण (शीतोष्ण) होती है।
प्रश्न 4. गतिशील पिस्टन लगे किसी सिलिंडर में मानक ताप व दाब पर 3 मोल हाइड्रोजन भरी है। सिलिंडर की दीवारें ऊष्मारोधी पदार्थ की बनी हैं तथा पिस्टन को उस पर बालू की परत लगाकर ऊष्मारोधी बनाया गया है। यदि गैस को उसके आरम्भिक आयतन के आधे आयतन तक संपीडित किया जाए तो गैस का दाब कितना बढ़ेगा?
हल:
यहाँ व्यवस्था ऊष्मारोधी है, अतः गैस का संपीडन एक रुद्धोष्म प्रक्रम है। रुद्धोष्म प्रक्रम के लिए: P Vγ = नियतांक, जहाँ γ (गामा) गैस की दो विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात (Cp/Cv) है।
हाइड्रोजन (H₂) एक द्विपरमाणुक गैस है। इसके लिए γ = 7/5 = 1.4
माना प्रारंभिक आयतन = V₁ = V, प्रारंभिक दाब = P₁ = P (मानक दाब)
अंतिम आयतन V₂ = V/2 (आधा कर दिया गया है)।
रुद्धोष्म समीकरण से: P₁ V₁γ = P₂ V₂γ
P × V1.4 = P₂ × (V/2)1.4
P₂ = P × [V / (V/2)]1.4 = P × (2)1.4
(2)1.4 का मान लगभग 2.639 है।
अतः P₂ ≈ 2.64 P
इस प्रकार, गैस का दाब लगभग 2.64 गुना बढ़ जाएगा।
प्रश्न 5. रुद्धोष्म विधि द्वारा किसी गैस की अवस्था परिवर्तन करते समय उसकी एक साम्यावस्था 4 से दूसरी साम्यावस्था 8 तक ले जाने में निकाय पर 22.3 ० कार्य किया जाता है। यदि गैस को दूसरी प्रक्रिया अवस्था 44 से अवस्था # में लाने में निकाय द्वारा अवशोषित' नेट ऊष्मा 9.35 ८७1 है तो बाद के प्रकरण में निकाय द्वारा किया गया नेट कार्य कितना है? (1९81 < 4.19 ०)
हल:
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार: ΔQ = ΔU + ΔW, जहाँ ΔQ निकाय को दी गई ऊष्मा, ΔU आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन और ΔW निकाय द्वारा किया गया कार्य है।
पहला प्रक्रम (रुद्धोष्म): A से B
रुद्धोष्म प्रक्रम में ΔQ = 0
निकाय पर कार्य किया गया है, इसलिए निकाय द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा: ΔW = –22.3 J
प्रथम नियम से: 0 = ΔUAB + (–22.3) ⇒ ΔUAB = +22.3 J
इसका अर्थ है कि A से B तक जाने पर निकाय की आंतरिक ऊर्जा 22.3 J बढ़ जाती है।
दूसरा प्रक्रम (कोई अन्य): फिर से A से B तक (लेकिन भिन्न पथ से)
इस प्रक्रम में निकाय द्वारा अवशोषित ऊष्मा ΔQ = 9.35 cal
1 cal = 4.19 J, अतः ΔQ = 9.35 × 4.19 J ≈ 39.18 J
चूँकि प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाएँ (A और B) पहले जैसी ही हैं, इसलिए आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन भी वही रहेगा: ΔUAB = +22.3 J
प्रथम नियम से: ΔQ = ΔU + ΔW
39.18 J = 22.3 J + ΔW
ΔW = 39.18 J – 22.3 J = 16.88 J ≈ 16.9 J
अतः दूसरे प्रक्रम में निकाय द्वारा किया गया नेट कार्य लगभग 16.9 जूल है।
प्रश्न 6. समान धारिता वाले दो सिलिंडर .4 तथा 5 एक-दूसरे से स्टॉपकॉक के द्वारा जुड़े हैं। 4 में मानक ताप व दाब पर गैस भरी है जबकि # पूर्णतः निर्वातित् है। स्टॉपकॉक यकायक खोल दी जाती है। निम्नलिखित का उत्तर दीजिए
(a) सिलिंडर 4 तथा 9 में अन्तिम दाब क्या होगा?
(०) गैस की आन्तरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा?
(० गैस के ताप में क्या परिवर्तन होगा? (१) क्या निकाय की माध्यमिक अवस्थाएँ (अन्तिम साम्यावस्था प्राप्त करने के पूर्व) इसके 7-7-7! पृष्ठ पर होंगी?
हल:
(a) अंतिम दाब: माना प्रत्येक सिलिंडर का आयतन V है। सिलिंडर A में गैस का प्रारंभिक आयतन V, प्रारंभिक दाब P (मानक दाब = 1 atm) और ताप T (मानक ताप) है। स्टॉपकॉक खोलने के बाद गैस पूरे उपलब्ध आयतन (V + V = 2V) में फैल जाती है। चूँकि पूरी व्यवस्था ऊष्मारोधी है और गैस निर्वात में मुक्त रूप से फैलती है, इसलिए यह एक मुक्त प्रसार है। मुक्त प्रसार में आदर्श गैस का ताप नहीं बदलता (ΔT = 0)। ताप स्थिर रहने पर, बॉयल के नियम (P₁V₁ = P₂V₂) से:
P × V = P₂ × (2V)
P₂ = P / 2 = 1 atm / 2 = 0.5 atm
अतः अंतिम दाब 0.5 atm होगा।
(ख) आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन: आदर्श गैस की आंतरिक ऊर्जा केवल ताप पर निर्भर करती है। चूँकि मुक्त प्रसार में ताप स्थिर रहता है (ΔT = 0), इसलिए आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन ΔU = 0 होगा।
(ग) ताप में परिवर्तन: मुक्त प्रसार एक समतापी प्रक्रिया है, अतः गैस के ताप में कोई परिवर्तन नहीं होता। ΔT = 0.
(घ) माध्यमिक अवस्थाएँ: नहीं, मुक्त प्रसार एक तीव्र और अनियंत्रित प्रक्रिया है। अंतिम साम्यावस्था प्राप्त करने से पहले की मध्यवर्ती अवस्थाएँ गैस की साम्य अवस्थाएँ नहीं होतीं। गैस असाम्यावस्था में होती है और उसका दाब, आयतन व ताप सुस्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं होते। इसलिए ये अवस्थाएँ गैस के P-V-T पृष्ठ (समीकरण को संतुष्ट करने वाली अवस्थाओं का समुच्चय) पर नहीं होंगी।
प्रश्न 7. एक वाष्प इंजन अपने बॉयलर से प्रति मिनट 3.6८ 10? ० ऊर्जा प्रदान करता है जो प्रति मिनट 5.4: 10 ० कार्य देता है। इंजन की दक्षता कितनी है? प्रति मिनट कितनी ऊष्मा अपशिष्ट होगी?
हल:
दिया गया है:
बॉयलर से प्रति मिनट प्राप्त ऊष्मा (Q1) = 3.6 × 10⁹ J/min
इंजन द्वारा प्रति मिनट किया गया उपयोगी कार्य (W) = 5.4 × 10⁸ J/min
इंजन की दक्षता (η) = (उपयोगी कार्य आउटपुट / कुल ऊष्मा इनपुट) × 100%
η = (W / Q1) × 100% = [(5.4 × 10⁸) / (3.6 × 10⁹)] × 100%
η = (5.4 / 36) × 100% = 0.15 × 100% = 15%
प्रति मिनट अपशिष्ट ऊष्मा = प्राप्त ऊष्मा – उपयोगी कार्य
= Q1 – W = (3.6 × 10⁹ – 5.4 × 10⁸) J/min
= (36 × 10⁸ – 5.4 × 10⁸) J/min = 30.6 × 10⁸ J/min = 3.06 × 10⁹ J/min
(लगभग 3.1 × 10⁹ J/min)
प्रश्न 8. एक हीटर किसी निकाय को 100 ५/ की दर से ऊष्मा प्रदान करता है। यदि निकाय 75 7४7 की दर से कार्य करता है, तो आन्तरिक ऊर्जा की वृद्धि किस दर से होगी?
हल:
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार: ΔQ = ΔU + ΔW
यहाँ दरों (प्रति सेकंड) के संदर्भ में समीकरण लिखा जा सकता है।
हीटर द्वारा ऊष्मा प्रदान करने की दर (dQ/dt) = 100 W = 100 J/s
निकाय द्वारा कार्य करने की दर (dW/dt) = 75 W = 75 J/s
आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि की दर (dU/dt) = ?
प्रथम नियम से: dQ/dt = dU/dt + dW/dt
100 J/s = dU/dt + 75 J/s
dU/dt = 100 J/s – 75 J/s = 25 J/s या 25 W
अतः आंतरिक ऊर्जा 25 जूल प्रति सेकंड की दर से बढ़ेगी।
प्रश्न 9. किसी ऊष्मागतिकीय निकाय को मूल अवस्था से मध्यवर्ती अवस्था तक चित्र में दर्शाये अनुसार एक रेखीय प्रक्रम द्वारा ले जाया गया है। एक समदाबीय प्रक्रम द्वारा इसके आयतन को 2 से #' तक ले जाकर मूल मान तक कम कर देते हैं। गैस द्वारा 00 से # तथा वहाँ से 77 तक कुल किए गए कार्य का आकलन कीजिए।
हल:
P-V आरेख पर किसी प्रक्रिया में गैस द्वारा किया गया कार्य, वक्र और आयतन-अक्ष के बीच घिरे क्षेत्रफल के बराबर होता है। आयतन बढ़ने पर कार्य धनात्मक और आयतन घटने पर कार्य ऋणात्मक लिया जाता है।
मान लीजिए दिए गए आरेख के अनुसार:
प्रक्रिया O → A (रेखीय): यह एक सीधी रेखा है जो निम्न दाब और आयतन से उच्च दाब और आयतन तक जाती है। इस प्रक्रिया में किया गया कार्य समलंब चतुर्भुज OAA'VAO के क्षेत्रफल के बराबर है। यदि संख्यात्मक मान दिए हों तो उनसे गणना की जा सकती है। सामान्यतः, यह कार्य धनात्मक होगा।
प्रक्रिया A → B (समदाबीय): यहाँ दाब स्थिर है लेकिन आयतन घटकर प्रारंभिक मान (बिंदु O के आयतन) के बराबर हो जाता है। चूँकि आयतन घट रहा है, इस प्रक्रिया में गैस पर कार्य किया जाता है, अर्थात गैस द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा। यह कार्य आयत ABB'A' के क्षेत्रफल के बराबर होगा।
कुल कार्य (Wकुल): O → A → B पथ पर कुल कार्य, इन दोनों प्रक्रियाओं के कार्यों का योग होगा।
Wकुल = क्षेत्रफल (OAA'VAO) + [ – क्षेत्रफल (ABB'A') ]
यदि संख्याएँ हों, तो गणना कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि O→A प्रक्रिया का कार्य +1350 J और A→B प्रक्रिया का कार्य –900 J है, तो कुल कार्य = 1350 J – 900 J = 450 J होगा।
अतः गैस द्वारा किया गया कुल कार्य 450 जूल है।
प्रश्न 10. खाद्य पदार्थ को एक प्रशीतक के अन्दर रखने पर वह Ba 9°C W FANG Ta 21 यदि कमरे का ताप 360 है तो प्रशीतक के निष्पादन गुणांक का आकलन कीजिए। रेफ्रीजरेटर की कार्यकारी दक्षता 8 > _2_- 71 - 72 जहाँ 7; तथा 72 क्रमशः स्रोत तथा सिंक के तापमान है।
हल:
प्रशीतक (रेफ्रिजरेटर) का निष्पादन गुणांक (β) उसकी कार्यकारी दक्षता है। यह उस ऊष्मा के अनुपात को दर्शाता है जो ठंडे पिण्ड (सिंक) से निकाली जाती है और उस कार्य इनपुट के जिस पर यह कार्य करता है।
सूत्र: β = Q₂ / W = Q₂ / (Q₁ – Q₂) = T₂ / (T₁ – T₂)
जहाँ,
T₁ = गर्म जलाशय (कमरा) का ताप (केल्विन में)
T₂ = ठंडा जलाशय (प्रशीतक के अंदर) का ताप (केल्विन में)
दिया गया है:
कमरे का ताप = 36°C = (36 + 273) K = 309 K
प्रशीतक के अंदर का ताप = 9°C = (9 + 273) K = 282 K
निष्पादन गुणांक (β) = T₂ / (T₁ – T₂) = 282 K / (309 K – 282 K)
β = 282 / 27 ≈ 10.44
अतः प्रशीतक का निष्पादन गुणांक लगभग 10.44 है।
All Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 12 (उष्मागतिकी) Solutions on this page can be viewed free of cost. Follow the best practices given after the solutions to achieve higher marks.
How to achieve higher marks in Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान):
- Understand the syllabus – know what to study.
- Download Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) solutions – use the solutions on this page after trying the exercises yourself.
- Practice Previous Year Question Papers – get used to exam pattern and important topics.
- Practice Sample Papers – improve time management and accuracy.
- Use Revision Notes – quick help before exams to recall key points.
How to download Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 12 (उष्मागतिकी) Solutions
- Visit https://biharboardbook.com
- Home page of Bihar Board Book will be loaded. Here select Solutions from the navigation bar at top.
- List of classes for which solution is available for Bihar Board students will be loaded. Now select the class which is relevant for you – in this case we will select Class 11th from this list.
- List of subjects for which solution is available for Bihar Board Class 11th students will display here. Now select the subject for which you want to download the solution – here we will select Physics (भौतिक विज्ञान) (you can choose any subject which is relevant for you).
- List of chapters will start displaying here for Physics (भौतिक विज्ञान) for Class 11th students of Bihar Board. Now select the chapter for which you want the solution. We will select Chapter 12 (उष्मागतिकी) in this case; you can opt based on your requirements.
- Solution for Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) of Bihar Board for Chapter 12 (उष्मागतिकी) will load here. If you are on desktop, right-click and save the image (all solutions here are given as images). If you are on mobile, long-press the image to save it. This will download the solution.
Other Chapters of Physics (भौतिक विज्ञान)
Browse other chapters of Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Solutions. Click on any chapter below to view its content.