Bihar Board Class 12th Hindi (हिन्दी) Chapter 2 उसने कहा था) Solutions
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| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 12th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 12th students |
| Subject | Hindi (हिन्दी) |
| Chapter Name | Chapter 2 उसने कहा था) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 7 |
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Bihar Board Class 12th Hindi (हिन्दी) Chapter 2 उसने कहा था) Solutions
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Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions Chapter 2 - उसने कहा था
उसने कहा था वस्तुनिष्ठ प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएँ
प्रश्न 1. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी' की कहानी कौन-सी है? (क) जूठन (ख) रोज़ (ग) उसने कहा था (घ) तिरिछ उत्तर-
(ग) उसने कहा था
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी जी द्वारा रचित सबसे प्रसिद्ध और हिंदी की पहली श्रेष्ठ कहानी 'उसने कहा था' ही है। यह कहानी प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर लिखी गई एक मार्मिक प्रेम और बलिदान की कहानी है।
प्रश्न 2. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी जी का जन्म कब हुआ था? (क) 7 जुलाई, 1883 ईं. (ख) 10 मार्च, 1980 ई. (ग) 1 जनवरी, 1805 ईं. (घ) 15 फरवरी, 1875 ई. उत्तर-
(क) 7 जुलाई, 1883 ई.
हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' का जन्म 7 जुलाई, सन् 1883 को जयपुर, राजस्थान में हुआ था। उनका मूल निवास स्थान हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का गुलेर गाँव था, जिसके नाम पर उनकी पहचान बनी।
प्रश्न 3. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की वृत्ति क्या थी? (क) व्यापार (ख) खेती-बारी (ग) अध्यापन (घ) सघुक्कड़ी उत्तर-
(ग) अध्यापन
गुलेरी जी मुख्य रूप से एक विद्वान अध्यापक थे। उन्होंने अजमेर के मेयो कॉलेज, जयपुर भवन छात्रावास और अंततः काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और प्राचार्य के रूप में अध्यापन का कार्य किया। वे संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी भाषा के गहन ज्ञाता थे।
प्रश्न 4. गुलेरी जी ने किस पत्रिका का संपादन किया? (क) गंगा (ख) माधुरी (ग) समन्वय (घ) समालोचक उत्तर-
(घ) समालोचक
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी जी ने 'समालोचक' नामक पत्रिका का संपादन किया था। इसके अलावा, उन्होंने 'काशी नागरी प्रचारिणी पत्रिका' के भी संपादक का दायित्व संभाला था, जैसा कि अगले प्रश्न में पूछा गया है।
प्रश्न 5. काशी नगरी प्रचारिणी पत्रिका के गुलेरी जी क्या? (क) लेखक (ख) कवि (ग) संपादक (घ) संचालक उत्तर-
(ग) संपादक
गुलेरी जी 'काशी नागरी प्रचारिणी सभा' की प्रसिद्ध पत्रिका के संपादक भी रहे। इस पद पर रहते हुए उन्होंने साहित्यिक एवं शोधपरक लेखन को बहुत प्रोत्साहन दिया।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
प्रश्न 1. लहना सिंह के भतीजे का नाम ......... था। उत्तर-
कीरत सिंह
कहानी में लहना सिंह अपने भतीजे कीरत सिंह के साथ अपने बाग में आम खाने का सपना देखता है, जो उसकी गहरी पारिवारिक भावनाओं को दर्शाता है।
प्रश्न 2. कहती है तुम .......... हो मेरे मुल्क को बचाने आए हो। उत्तर-
राजा
यह वाक्य वजीरा सिंह द्वारा कहा गया है, जिसमें वह एक फ्रांसीसी महिला (मेम) की बात दोहराता है जो भारतीय सैनिकों को अपने देश की रक्षा के लिए आए 'राजाओं' के समान सम्मान देती है।
प्रश्न 3. कुछ दूर जाकर लड़के ने पूछा- तेरी ........ हो गई। उत्तर-
कुड़माई
बचपन में, लहना सिंह बाजार में मिली उस अनजान लड़की (जो बाद में सूबेदारनी बनी) से बार-बार यही प्रश्न पूछता था - "तेरी कुड़माई (सगाई) हो गई?" यह प्रश्न उनके बीच एक विशेष संबंध का प्रतीक बन जाता है।
प्रश्न 4. उसी .......... के बाग में मखमल की सी हरी घास है। उत्तर-
फिरंगी मेम
फ्रांस के युद्धक्षेत्र में, वजीरा सिंह लहना सिंह को एक अंग्रेज/फ्रांसीसी महिला (फिरंगी मेम) के बाग की हरी-भरी घास के बारे में बताता है, जो वहाँ की भीषण परिस्थितियों में सुखद अहसास देती है।
प्रश्न 5. 'जाड़ा क्या है, मौत है और ......... से मरनेवालों को मुरब्बे नहीं मिला करते। ” उत्तर-
निमोनिया
वजीरा सिंह का यह कथन फ्रांस के सर्द मोर्चे की भयानक स्थिति को दर्शाता है। अत्यधिक ठंड और निमोनिया से सैनिकों की मौत हो रही थी, और ऐसे में मरने वालों को सम्मानजनक अंतिम संस्कार (मुरब्बा) भी नसीब नहीं होता था।
उसने कहा था अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. उसने कहा था' कहानी के कहानीकार कौन हैं : उत्तर-
इस कहानी के रचयिता चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' जी हैं, जो हिंदी साहित्य के एक प्रमुख लेखक, विद्वान और अध्यापक थे।
प्रश्न 2. हिन्दी की पहली श्रेष्ठ कहानी कौन-सी है? उत्तर-
हिंदी की पहली श्रेष्ठ एवं आधुनिक कहानी मानी जाने वाली रचना 'उसने कहा था' ही है, जिसे चन्द्रधर शर्मा गुलेरी ने लिखा था।
प्रश्न 3. गद्य का विकास किस काल में हुआ? उत्तर-
हिंदी साहित्य में गद्य विधाओं (जैसे कहानी, निबंध, उपन्यास) का सबसे अधिक विकास आधुनिक काल में हुआ। इसी युग में 'उसने कहा था' जैसी कालजयी कहानियाँ लिखी गईं।
प्रश्न 4. कीरत सिंह कौन था? उत्तर-
कीरत सिंह लहना सिंह का भतीजा था। लहना सिंह अपने गाँव लौटकर कीरत सिंह के साथ अपने बाग के आम खाने का सुखद सपना देखता था।
प्रश्न 5. उसने कहा था' कैसी कहानी है? उत्तर-
'उसने कहा था' एक फ्लैशबैक शैली पर आधारित कहानी है। इसमें वर्तमान की घटनाओं के बीच अतीत की स्मृतियाँ चलचित्र की तरह चलती हैं, जो कथानक को गहराई और मार्मिकता प्रदान करती हैं।
प्रश्न 6. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी कौन-सी है? उत्तर-
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी जी की सर्वाधिक चर्चित और प्रसिद्ध कहानी 'उसने कहा था' है। हालाँकि उन्होंने 'बुद्ध का काँटा' जैसी अन्य कहानियाँ भी लिखी हैं।
प्रश्न 7, किसी कहानी को महान कौन बनाता है? उत्तर-
किसी कहानी को महान बनाने में उसका शक्तिशाली उद्देश्य, गहन मानवीय संवेदना, कालजयी विषयवस्तु और कलात्मक अभिव्यक्ति मुख्य भूमिका निभाते हैं। 'उसने कहा था' में ये सभी गुण विद्यमान हैं।
प्रश्न 8. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी किस युग के कहानीकार हैं? उत्तर-
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी प्रेमचन्द युग के कहानीकार हैं। हालाँकि उनकी रचनाशैली अद्वितीय है, लेकिन काल के हिसाब से वे उसी दौर के लेखक हैं जब प्रेमचन्द हिंदी कथा साहित्य पर छाए हुए थे।
प्रश्न 9. “उसने कहा था' कहानी कितने भागों में बँटी हुई है? उत्तर-
यह कहानी संरचनात्मक रूप से पाँच भागों में विभाजित है। प्रत्येक भाग कहानी के विकास और समय के एक अलग चरण को प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 10. निम्नलिखित में से कौन-सी कहानी गुलेरी जी की नहीं है? उत्तर-
'पूस की रात' कहानी गुलेरी जी की नहीं, बल्कि महान कथाकार प्रेमचन्द जी की है। गुलेरी जी की प्रमुख कहानी 'उसने कहा था' है।
प्रश्न 11. पाठ में किस महीने का नाम आया है? उत्तर-
पाठ में कार्तिक महीने का नाम आया है। यह वह समय है जब लहना सिंह अपने गाँव में होता है और उसे फौज में वापस बुलाने की चिट्ठी मिलती है।
उसने कहा था पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. उसने कहा था' कहानी कितने भागों में बँटी हुई है? कहानी के कितने भागों में युद्ध का वर्णन है? उत्तर-
'उसने कहा था' कहानी संरचनात्मक दृष्टि से पाँच भागों में विभाजित है। इन पाँच भागों में से तीन भागों (दूसरे, तीसरे और चौथे) में प्रथम विश्वयुद्ध के मोर्चे की पृष्ठभूमि और युद्ध के दृश्यों का सजीव वर्णन मिलता है। ये भाग फ्रांस के युद्धक्षेत्र की कठिनाइयों, सैनिक जीवन और लहना सिंह के बलिदान को दर्शाते हैं।
प्रश्न 2. कहानी के पात्रों की एक सूची तैयार करें। उत्तर-
कहानी 'उसने कहा था' के प्रमुख एवं गौण पात्रों की सूची इस प्रकार है:
प्रमुख पात्र:
1. लहना सिंह - कहानी का नायक, एक वीर और कर्तव्यनिष्ठ सिख सैनिक।
2. सूबेदारनी - लहना सिंह की बचपन की परिचित, बाद में सूबेदार हजारा सिंह की पत्नी।
महत्वपूर्ण पात्र:
3. सूबेदार हजारा सिंह - लहना सिंह के रेजीमेंट के अधिकारी, सूबेदारनी के पति।
4. बोधा सिंह - सूबेदार हजारा सिंह और सूबेदारनी का इकलौता बेटा, युवा सैनिक।
5. वजीरा सिंह - लहना सिंह का साथी सैनिक और मित्र।
6. कीरत सिंह - लहना सिंह का भतीजा।
अन्य पात्र:
7. अतर सिंह - सूबेदारनी के मामा (बचपन में)।
8. महा सिंह - एक सिपाही।
9. लपटन साहब - एक अंग्रेज अधिकारी (जिसकी असलियत लहना सिंह पहचान लेता है)।
प्रश्न 3. लहनासिंह का परिचय अपने शब्दों में दें। उत्तर-
लहना सिंह कहानी 'उसने कहा था' का नायक है, जिसका चरित्र अनेक गुणों से भरपूर है:
1. सच्चा प्रेमी: बचपन में एक अनजान लड़की (सूबेदारनी) के प्रति उसके मन में शुद्ध प्रेम उत्पन्न होता है, जिसे वह जीवन भर संजोए रखता है।
2. वीर और निडर सैनिक: वह नम्बर 77 राइफल्स का एक बहादुर जमादार है, जो युद्ध के मैदान में दुश्मन का सामना बिना डरे करता है।
3. चतुर और सजग: वह धोखेबाज 'लपटन साहब' की पोल पकड़ लेता है, जो उसकी बुद्धिमत्ता को दर्शाता है।
4. दयालु और सहृदय: भीषण सर्दी में अपना कंबल और स्वेटर बीमार बोधा सिंह को दे देता है।
5. वचन का पक्का: सूबेदारनी द्वारा अपने पति और बेटे की रक्षा के लिए कहे गए शब्दों को वह अपना वचन मान लेता है और उसे निभाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे देता है।
6. सपनों से भरा इंसान: उसका गाँव में अपना बाग लगाकर भतीजे के साथ आम खाने का सपना उसे एक सामान्य, संवेदनशील इंसान के रूप में दर्शाता है।
प्रश्न 4. पाठ से लहना और सूबेदारनी के संवादों को एकत्र करें। उत्तर-
बचपन के संवाद (अमृतसर के बाजार में):
लहना सिंह: "तेरे घर कहाँ है?"
लड़की (सूबेदारनी): "मगरे में-और तेरे!"
लहना सिंह: "माँझे में; यहाँ कहाँ रहती है?"
लड़की: "अतरसिंह की बैठक में, वे मेरे मामा होते हैं।"
लहना सिंह: "मैं भी मामा के यहाँ हूँ, उनका घर गुरु बाजार में है।"
बाद में मिलने पर लहना सिंह बार-बार पूछता:
लहना सिंह: "तेरी कुड़माई हो गई?"
लड़की: "धत्!" (कहकर भाग जाती)
एक दिन लड़की का अप्रत्याशित उत्तर:
लहना सिंह: "तेरी कुड़माई हो गई?"
लड़की: "हाँ, हो गई।"
लहना सिंह: "कब?"
लड़की: "कल-देखते नहीं यह रेशम से कढ़ा हुआ सालू!"
युवावस्था के संवाद (सूबेदार के घर पर):
सूबेदारनी: "मुझे पहचाना?... 'तेरी कुड़माई हो गई?' 'धत्!' 'कल हो गई-देखते नहीं रेशमी बूटोंवाला सालू?'... सूबेदारनी कह रही है- मैंने तेरे को आते ही पहचान लिया।... तुम्हारे आगे मैं आँचल पसारती हूँ। मेरे हजारा सिंह और बोधा सिंह की रक्षा करना।"
इस संवाद के जवाब में लहना सिंह कुछ नहीं बोलता, लेकिन सूबेदारनी के इन शब्दों को अपने दिल में उतार लेता है और अंत तक उनका पालन करता है।
प्रश्न 5. “कल, देखते नहीं यह रेशम से कढ़ा हुआ सालू। वह सुनते ही लहना की क्या प्रतिक्रिया हुई? उत्तर-
बचपन में जब उस लड़की (सूबेदारनी) ने अपनी सगाई की बात कहकर रेशमी सालू दिखाया, तो लहना सिंह पर इसका बहुत गहरा आघात पड़ा। वह सदमे में आ गया और अपनी सुध-बुध खो बैठा। इस मानसिक उथल-पुथल में उसने घर लौटते समय कई उग्र और असंगत हरकतें कीं:
1. एक लड़के को नाली में धकेल दिया।
2. एक खोमचे वाले के खोमचे उलट दिए।
3. एक कुत्ते को पत्थर मारा।
4. एक सब्जी वाले की रेहड़ी पर से दूध का बर्तन गिरा दिया।
5. एक वैष्णवी स्त्री से टकरा गया, जिसने उसे 'अंधा' कहकर डाँटा।
ये सभी क्रियाएँ उसकी मनोदशा की अशांति, क्रोध और निराशा को दर्शाती हैं। वह अपनी भावनाओं को सम्भाल नहीं पा रहा था और बाहरी दुनिया पर उनका गुस्सा निकाल रहा था।
प्रश्न 6. “जाड़ा क्या है, मौत है और निमोनिया से मरनेवालों को मुरब्बे नहीं मिला करते”, वजीरासिंह के इस कथन का क्या आशय है? उत्तर-
वजीरा सिंह के इस कथन का आशय फ्रांस के युद्धक्षेत्र की भीषण और दयनीय स्थिति को बताना है:
1. 'जाड़ा क्या है, मौत है': यहाँ की कड़ाके की ठंड इतनी खतरनाक है कि वह सीधे मौत का कारण बन रही है। ठंड स्वयं मौत के समान है।
2. 'निमोनिया से मरनेवालों को मुरब्बे नहीं मिला करते': 'मुरब्बा' यहाँ सम्मानजनक अंतिम संस्कार या यादगार का प्रतीक है। वह कहना चाहता है कि इतनी भीड़ में निमोनिया से मर रहे सैनिकों की इतनी अधिक संख्या है कि उनका ठीक से अंतिम संस्कार भी नहीं हो पाता, न ही उन्हें कोई विशेष सम्मान मिल पाता है। उनकी मौत एक सामान्य और उपेक्षित घटना बनकर रह जाती है।
यह कथन युद्ध की विडंबना और क्रूरता को उजागर करता है, जहाँ सैनिक न केवल दुश्मन की गोलियों से, बल्कि प्रकृति की मार से भी लड़ रहे हैं और उनकी मौत गुमनामी में हो रही है।
प्रश्न 7. “कहती है, तुम राजा हो, मेरे मुल्क को बचाने आए हो।' वजीरा के इस कथन में किसकी और संकेत है। उत्तर-
वजीरा सिंह के इस कथन में एक फ्रांसीसी महिला (फिरंगी मेम) की ओर संकेत है। युद्ध के दौरान फ्रांस के स्थानीय निवासी, विशेषकर महिलाएँ, भारतीय सैनिकों को अपने देश की रक्षा के लिए दूर से आए हुए मुक्तिदाता या 'राजा' के समान मानती थीं। यह बात उन सैनिकों के मनोबल को बढ़ाती थी और उन्हें सम्मान का अहसास कराती थी, भले ही वे स्वयं एक गुमनाम युद्ध लड़ रहे थे।
प्रश्न 8. लहना सिंह के गाँव में आया तुर्की मौलवी क्या कहता था? उत्तर-
लहना सिंह के गाँव में आया तुर्की मौलवी जर्मनों के पक्ष में प्रोपेगैंडा (झूठा प्रचार) फैलाता था। उसकी बातें इस प्रकार थीं:
1. वह कहता था कि जर्मन लोग बहुत बड़े पंडित (विद्वान) हैं, जिन्होंने वेद पढ़-पढ़कर उनमें से विमान चलाने की विद्या निकाल ली है।
2. वह दावा करता था कि जर्मन गाय को नहीं मारते और अगर वे हिंदुस्तान आएंगे तो गौ-हत्या बंद कर देंगे। (यह हिंदू भावनाओं को भड़काने के लिए था)।
3. वह गाँव के लोगों, खासकर बनियों को बहकाता था कि डाकखाने से अपने पैसे निकाल लो, क्योंकि अंग्रेज सरकार का राज्य खत्म होने वाला है।
इस मौलवी की बातें युद्धकालीन गुप्तचर गतिविधियों और मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा थीं, जिसका उद्देश्य भारतीयों को अंग्रेजों के खिलाफ भड़काना और उनकी लड़ाई को कमजोर करना था।
प्रश्न 9. “लहनासिंह का दायित्व बोध और उसकी बुद्धि दोनों ही स्पृहणीय है।' इस कथन की पुष्टि करें। उत्तर-
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