Bihar Board Class 12th Hindi (हिन्दी) Chapter 3 संपूर्ण क्रांति) Solutions
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बिहार बोर्ड कक्षा 12 हिन्दी - संपूर्ण क्रांति
संपूर्ण क्रांति वस्तुनिष्ठ प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों के बहुवैकल्पिक उत्तरों में से सही उत्तर बताएँ
प्रश्न 1. जयप्रकाश नारायण का जन्म कब हुआ था? (क) 1 अक्टूबर, 1902 |/ (ख) 14 नवम्बर, 1907 (ग) 10 मार्च, 1935 (घ) 10 सितम्बर,.1910
उत्तर: (क) 1 अक्टूबर, 1902। जयप्रकाश नारायण का जन्म 1 अक्टूबर, 1902 को उत्तर प्रदेश के बलिया और बिहार के सारण जिले की सीमा पर स्थित सिताब दियारा गाँव में हुआ था।
प्रश्न 2. जयप्रकाश नारायण की पत्नी कौन थी? (क) दमयन्ती देवी (ख) प्रभावती देवी (ग) लक्ष्मी देवी (घ) शोभा देवी
उत्तर: (ख) प्रभावती देवी। जयप्रकाश नारायण का विवाह प्रभावती देवी से हुआ था, जो ब्रजकिशोर प्रसाद की पुत्री थीं। वे स्वयं एक समर्पित स्वतंत्रता सेनानी थीं।
प्रश्न 3. प्रभावती जी किनकी पुत्री थी? (क) ब्रजकिशोर प्रसाद (ख) राधारमण (ग) देवकुमार (घ) शशिधर
उत्तर: (क) ब्रजकिशोर प्रसाद। प्रभावती देवी के पिता ब्रजकिशोर प्रसाद बिहार के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और सार्वजनिक कार्यकर्ता थे।
प्रश्न 4. जयप्रकाश जी की प्रारंभिक शिक्षा कहाँ हुई थी? (क) घर पर (ख) स्कूल में (ग) कॉलेज में . (घ) ननिहाल में
उत्तर: (क) घर पर। जयप्रकाश नारायण की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई थी। बाद में उन्होंने पटना के कॉलेजिएट स्कूल में प्रवेश लिया।
प्रश्न 5. इन्होंने किस स्कूल में प्रथम दाखिला लिया? (क) पटना कॉलेजिएट (ख) मिलर हाईस्कूल (ग) दयानंद हाईस्कूल (घ) मुस्लिम हाईस्कूल
उत्तर: (क) पटना कॉलेजिएट। अपनी घरेलू शिक्षा के बाद, जयप्रकाश नारायण ने औपचारिक स्कूली शिक्षा की शुरुआत पटना के प्रतिष्ठित पटना कॉलेजिएट स्कूल से की थी।
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
प्रश्न 1. जयप्रकाश जी प्रारंभिक शिक्षा ............... पर हुई थी।
उत्तर: घर। जयप्रकाश नारायण की शुरुआती पढ़ाई घर पर ही हुई थी, जिसके बाद ही उन्होंने स्कूल में प्रवेश लिया।
प्रश्न 2. जयप्रकाश जी को बिहार में हिन्दी की वर्तमान स्थिति विषयक निबंध पर ............ पुरस्कार मिला।
उत्तर: सर्वोच्च। 'बिहार में हिन्दी की वर्तमान स्थिति' विषय पर लिखे निबंध के लिए उन्हें सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त हुआ था, जिससे उनकी भाषा पर पकड़ और चिंतन का पता चलता है।
प्रश्न 3. अमेरिका में कैलिफोर्निया, बर्कले, विष्किसन-मेडिसन आदि संस्थाओं में जे.पी. ने ........ ग्रहण की।
उत्तर: उच्च शिक्षा। अमेरिका में जयप्रकाश नारायण ने कैलिफोर्निया, बर्कले और विस्कॉन्सिन-मैडिसन जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त की।
प्रश्न 4. अमैरिका में जे.पी. ने मार्क्सवाद और ........... की शिक्षा ग्रहण की।
उत्तर: समाजवाद। अमेरिका प्रवास के दौरान उन्होंने मार्क्सवाद और समाजवाद का गहन अध्ययन किया, जिसने उनके राजनीतिक विचारों को आकार दिया।
प्रश्न 5. जे. पी. माँ की ......... के कारण पी. एच. डी. नहीं कर सके।
उत्तर: बीमारी। अपनी माँ की बीमारी और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी के कारण, जयप्रकाश नारायण को अमेरिका में अपनी पीएच.डी. की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर भारत लौटना पड़ा।
प्रश्न 6. जयप्रकाश जी के पुकार का नाम ............ था।
उत्तर: बाउल। बचपन में जयप्रकाश नारायण को उनके घर वाले प्यार से 'बाउल' नाम से पुकारते थे।
संपूर्ण क्रांति अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. जयप्रकाश नारायण अपनी जनपक्षधरता के कारण किस रुप में प्रसिद्ध हुए?
उत्तर: लोकनायक। जनता के प्रति उनके गहरे लगाव, सादगी और निस्वार्थ नेतृत्व के कारण जनता ने उन्हें 'लोकनायक' की उपाधि दी, जो उनकी पहचान बन गई।
प्रश्न 2. जयप्रकाश नारायण जी किस सन् में अमेरिका गए?
उत्तर: सन् 1922। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से जयप्रकाश नारायण सन् 1922 में अमेरिका गए थे।
प्रश्न 3, इन्हें समाज सेवा के लिए किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया?
उत्तर: मैग्सेसे पुरस्कार। सन् 1965 में समाज सेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित 'रैमन मैग्सेसे पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था।
प्रश्न 4. जयप्रकाश नारायण जी का निधन किस दिन हुआ?
उत्तर: 8 अक्टूबर, 1979। लंबी बीमारी के बाद भारत के इस महान लोकनायक का 8 अक्टूबर, 1979 को निधन हो गया।
प्रश्न 5. लेखक मद्रास में अपने किस मित्र के साथ रूका था?
उत्तर: ईश्वर अय्यर। भाषण में जयप्रकाश नारायण ने बताया कि जब वे मद्रास (अब चेन्नई) गए थे, तो वहाँ उनके मित्र ईश्वर अय्यर के साथ ठहरे थे।
प्रश्न 6. रामधारी सिंह दिनकर जी की मृत्यु किस कारण हुई थी?
उत्तर: दिल का दौरा पड़ने से। प्रख्यात कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की मृत्यु 24 अप्रैल, 1974 को हृदयाघात (दिल का दौरा) के कारण हुई थी।
प्रश्न 7, जयप्रकाश नारायण के अनुसार देश का भविष्य किसके हाथों में है?
उत्तर: नई पीढ़ी के। जयप्रकाश नारायण का दृढ़ विश्वास था कि देश का भविष्य युवा पीढ़ी के हाथों में सुरक्षित है, इसलिए उन्होंने हमेशा युवाओं को जागरूक और सक्रिय बनने का आह्वान किया।
प्रश्न 8. लेखक ने बिहार विद्यापीठ से कौन-सी परीक्षा दी?
उत्तर: आई. ए.। गांधीजी के असहयोग आंदोलन में शामिल होने के बाद, उन्होंने सरकारी कॉलेज छोड़ दिया और बिहार विद्यापीठ से इंटरमीडिएट ऑफ आर्ट्स (आई.ए.) की परीक्षा उत्तीर्ण की।
प्रश्न 9. जयप्रकाश नारायण विदेश से लौठकर कांग्रेस में शामिल हो गए क्योंकि
उत्तर: वे आजादी की लड़ाई में सीधे तौर पर भाग लेना चाहते थे। उस समय कांग्रेस स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख मंच थी, इसलिए देशसेवा के उद्देश्य से उन्होंने उसमें प्रवेश किया।
प्रश्न 10. लेखक किस मित्रता को ठोस मानता है?
उत्तर: अंडरग्राउंड जमाने की। जयप्रकाश नारायण का मानना था कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भूमिगत (अंडरग्राउंड) रहकर काम करने वाले साथियों के बीच जो मित्रता बनी, वह सबसे ठोस और विश्वसनीय होती है, क्योंकि वह सुख-दुख और संकट में खरी उतरती है।
प्रश्न 11. जयप्रकाश नारायण जी का जवाहरलाल नेहरू जी से किन मामलों में मतभेद था?
उत्तर: परराष्ट्र नीतियों के मामलों में। जयप्रकाश नारायण का जवाहरलाल नेहरू के साथ मुख्य मतभेद विदेश नीति को लेकर था, हालाँकि वे नेहरू जी का बहुत आदर करते थे और घरेलू मामलों में उनसे सहमत भी थे।
संपूर्ण क्रांति पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1. आन्दोलन के नेतृत्व के संबंध में जयप्रकाश नारायण के क्या विचार थे, आन्दोलन का नेतृत्व किस शर्त पर करते हैं?
उत्तर: जयप्रकाश नारायण आंदोलन के नेतृत्व के बारे में स्पष्ट और दृढ़ थे। उनका कहना था कि वे सभी की राय जरूर सुनेंगे और छात्रों व अन्य सहयोगियों से खुलकर विचार-विमर्श करेंगे। हर किसी की बात को गंभीरता से समझने का प्रयास करेंगे। लेकिन अंतिम निर्णय लेने का अधिकार उनके पास ही रहेगा। उनकी शर्त थी कि एक बार निर्णय ले लिए जाने के बाद, सभी को एकजुट होकर उसका पालन करना होगा। उनका मानना था कि केवल इसी तरह के स्पष्ट और निर्णायक नेतृत्व से आंदोलन सफल हो सकता है, वरना आपसी बहसों में ही समय और ऊर्जा बर्बाद हो जाएगी और कोई ठोस परिणाम नहीं निकलेगा।
प्रश्न 2, जयप्रकाश नारायण के छात्र जीवन और अमेरिका प्रवास का परिचय दें। इस अवधि की कौन-कौन सी बातें आपको प्रभावित करती हैं?
उत्तर: जयप्रकाश नारायण का प्रारंभिक छात्र जीवन संघर्ष और दृढ़ निश्चय से भरा था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। 1921 में वे पटना कॉलेज में आई.एससी. के छात्र थे, लेकिन गांधीजी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया। उन्होंने बिहार विद्यापीठ से आई.ए. की परीक्षा पास की। शिक्षा की ललक ने उन्हें 1922 में अमेरिका जाने के लिए प्रेरित किया।
अमेरिका में उन्होंने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई की। पढ़ाई का खर्च चलाने के लिए उन्होंने बागानों, लोहा गलाने के कारखानों और कसाईखानों तक में मजदूरी की। वे कई छात्रों के साथ एक छोटे से कमरे में रहते, एक ही रजाई साझा करते और होटलों में बर्तन धोकर या वेटर का काम करके अपना गुजारा चलाते थे। इन कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कैलिफोर्निया, बर्कले और विस्कॉन्सिन-मैडिसन जैसे विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त की। बाद में स्कॉलरशिप और असिस्टेंट की नौकरी मिलने पर उनकी स्थिति में सुधार हुआ।
इस अवधि की उनकी अदम्य इच्छाशक्ति, कठिन परिश्रम करने की क्षमता और शिक्षा के प्रति अगाध लगन सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। यह दर्शाता है कि संसाधनों की कमी सच्ची लगन के आगे बाधा नहीं बन सकती।
प्रश्न 3. जयप्रकाश नारायण कम्युनिस्ट पार्टी में क्यों नहीं शामिल हुए?
उत्तर: जयप्रकाश नारायण अमेरिका में मार्क्सवाद और समाजवाद के प्रभाव में आए थे, फिर भी उन्होंने भारत आकर कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया। इसका मुख्य कारण था लेनिन की उस शिक्षा में उनकी आस्था, जिसमें कहा गया था कि गुलाम देशों के कम्युनिस्टों को स्वतंत्रता की लड़ाई से खुद को अलग नहीं रखना चाहिए। उस समय भारत की आजादी की लड़ाई का नेतृत्व कांग्रेस (जिसमें पूंजीपति वर्ग के लोग भी थे) कर रही थी। जयप्रकाश का मानना था कि इस राष्ट्रीय संघर्ष में अलगाववादी रुख अपनाना गलत होगा। इसलिए, देश की आजादी के लिए संघर्ष में सीधे भाग लेने के उद्देश्य से उन्होंने कांग्रेस में प्रवेश किया, न कि कम्युनिस्ट पार्टी में।
प्रश्न 4. पाठ के आधार पर प्रसंग स्पष्ट करें (क) अगर कोई डिमोॉक्रेसी का दुश्मन है, तो वे लोग दुश्मन हैं जो जनता के शान्तिमय कार्यक्रमों में बाधा डालते हैं उनकी गिरफ्तारियाँ करते हैं, उन पर लाठी चलाते हैं, गोलियाँ चलाते हैं। (ख) व्यक्ति से नहीं हमें तो नीतियों से झगड़ा है, सिद्धान्तों से झगड़ा है, कार्यों से झगड़ा है।
उत्तर:
(क) प्रसंग: यह कथन जयप्रकाश नारायण ने तत्कालीन सरकार की आलोचना करते हुए कहा था। जब उनके नेतृत्व में आंदोलन चल रहा था, तो सरकार ने शांतिपूर्ण सभाओं और प्रदर्शनों को रोकने के लिए लोगों की गिरफ्तारी, लाठीचार्ज और दमन का सहारा लिया। एक पुलिस अधिकारी ने यहाँ तक कहा कि अगर जयप्रकाश नहीं होते तो बिहार जल गया होता। इस पर जेपी ने यह सवाल उठाया कि अगर जनता शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रही है, तो सरकार उसे रोक क्यों रही है? उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र का सच्चा दुश्मन वह सरकार है जो जनता के संवैधानिक अधिकारों का हनन करती है और शांतिपूर्ण विरोध को दबाने की कोशिश करती है। ऐसा करके सरकार लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध काम करती है।
(ख) प्रसंग: आंदोलन के दौरान कुछ लोग चाहते थे कि जयप्रकाश नारायण और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बीच समझौता हो जाए। इस सुझाव के जवाब में जेपी ने यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष (चाहे वह इंदिरा गांधी ही क्यों न हों) से नहीं है। उनकी लड़ाई व्यक्तियों के बजाय गलत नीतियों, गलत सिद्धांतों और गलत कार्यों से है। उनका मत था कि कोई भी व्यक्ति अगर गलत काम करेगा या गलत नीति बनाएगा, तो उसका विरोध होना ही चाहिए। यह कथन उनकी निष्पक्ष और सिद्धांतवादी सोच को दर्शाता है।
प्रश्न 5. बापू और नेहरू की किस विशेषता का उल्लेख जेपी ने अपने भाषण में किया है?
उत्तर: जयप्रकाश नारायण ने अपने भाषण में महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू की एक समान विशेषता का उल्लेख किया है - उनकी विराट व्यक्तित्व और आलोचना सहन करने की क्षमता। जेपी ने बताया कि जब वे युवा थे, तो वे बापू के सामने भी अपनी असहमति बेझिझक रखते थे। गांधीजी उनकी बात बुरा नहीं मानते थे, बल्कि प्यार से समझाने का प्रयास करते थे। इसी तरह, नेहरू जी से उनके विदेश नीति को लेकर मतभेद थे और वे उनकी खुलकर आलोचना भी करते थे, लेकिन नेहरू जी में भी यह बड़प्पन था कि वे इस आलोचना को व्यक्तिगत रूप से नहीं लेते थे और जेपी के प्रति उनका आदर बना रहता था। जेपी ने इस विशेषता को एक महान नेता की पहचान बताया।
प्रश्न 6. भ्रष्टाचार की जड़ क्या है? क्या आप जेपी से सहमत हैं? इसे दूर करने के लिए FA सुझाव देंगे?
उत्तर: जयप्रकाश नारायण के अनुसार, भ्रष्टाचार की जड़ सरकार की गलत नीतियाँ हैं। उनका मानना था कि इन नीतियों के कारण गरीबी, बेरोजगारी और महँगाई बढ़ती है, जिससे लोगों का जीवन कठिन हो जाता है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। सरकारी दफ्तरों से लेकर बैंकों तक, हर जगह रिश्वत के बिना काम नहीं होता था।
सहमति एवं सुझाव: जेपी का यह विश्लेषण आज भी प्रासंगिक है। भ्रष्टाचार दूर करने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं:
- पारदर्शिता और जवाबदेही: सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लानी चाहिए और अधिकारियों को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह बनाना चाहिए।
- शिक्षा और जागरूकता: नैतिक शिक्षा के माध्यम से युवाओं में ईमानदारी के संस्कार डालने चाहिए और आम जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना चाहिए।
- कानून का सख्ती से पालन: भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि दूसरों के लिए यह एक सबक बने।
- जनभागीदारी: जेपी के सुझाव के अनुसार, स्थानीय स्तर पर जनसंघर्ष समितियाँ बनाकर लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
प्रश्न 7. दलविहीन लोकतंत्र और साम्यवाद में कैसा संबंध है?
उत्तर: जयप्रकाश नारायण के अनुसार, दलविहीन लोकतंत्र और साम्यवाद (कम्युनिज्म) के बीच गहरा संबंध है। वे बताते हैं कि दलविहीन लोकतंत्र सर्वोदय विचारधारा का एक मुख्य राजनीतिक लक्ष्य है। दिलचस्प बात यह है कि यह लक्ष्य मार्क्सवाद-लेनिनवाद के मूल उद्देश्यों में भी शामिल है। मार्क्सवाद के अनुसार, जैसे-जैसे समाज साम्यवाद की ओर बढ़ेगा, वैसे-वैसे राज्य (State) का अस्तित्व कम होता जाएगा और अंत में एक ऐसा समाज स्थापित होगा जहाँ राज्य का कोई अस्तित्व नहीं होगा (Stateless Society)। ऐसा समाज स्वाभाविक रूप से लोकतांत्रिक होगा और उसी में लोकतंत्र का वास्तविक स्वरूप सामने आएगा। जेपी का मानना था कि वह लोकतंत्र निश्चित रूप से दलविहीन होगा, क्योंकि वर्गविहीन समाज में राजनीतिक दलों की आवश्यकता ही नहीं रह जाएगी।
प्रश्न 8. संघर्ष समितियों से जयप्रकाश नारायण की क्या अपेक्षाएँ हैं?
उत्तर: जयप्रकाश नारायण ने 'संपूर्ण क्रांति' को सफल बनाने के लिए जनसंघर्ष समितियों की कल्पना की थी और उनसे निम्नलिखित महत्वपूर्ण अपेक्षाएँ रखीं:
- सभी संघर्ष समितियाँ मिलकर चुनावों में ऐसे उम्मीदवार खड़ा करें, जो जनता के हितैषी हों या फिर अन्य दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों में से अच्छे उम्मीदवार को चुनने में मदद करें।
- चुनाव जीतने वाले प्रतिनिधि पर इन समितियों की नजर रहेगी, ताकि वह अपने वादों के अनुरूप काम करे।
- अगर कोई निर्व
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