Bihar Board Class 12th Hindi (हिन्दी) Chapter 8 सिपाही की माँ) Solutions
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प्रश्न 1.
मोहन राकेश का जब्म कब हुआ था? (क) 8 जनवरी, 1925 ई,
(ख) 7 फरवरी, 1920 ई.
(ग) 7 मार्च, 1921 ई.
(घ) 2 जनवरी, 1922 ई.
उत्तर: (क) 8 जनवरी, 1925 ई.
प्रश्न 2.
आखिरी चट्टान तक' किसके द्वारा लिखित यात्रा वृत्तांत है? (क) मोहन राकेश
(ख) अनूपलाल मंडल
(ग) देवराज
(घ) दिनकर
उत्तर: (क) मोहन राकेश
प्रश्न 3.
मानक FA करता है? (क) सेना के सिपाही है (ख) खिलाड़ी है
(ग) शिक्षक है
(घ) पहलवान है
उत्तर: (क) सेना के सिपाही है
प्रश्न 4.
“विशनी किस एकांकी की पात्रा है? (क) लहरों के राजहंस
(ख) आधे-अधूरे
(ग) सिपाही की माँ
(घ) पैर तले की जमीन
उत्तर: (ग) सिपाही की माँ
प्रश्न 5.
मैं इसे अभी मार दूंगा। अभी इसकी बोटी-बोटी अलग कर दूँगा, किसने कहा? (क) मानक ने
(ख) सिपाही ने
(ग) विशनी ने
(घ) कुन्ती ने
उत्तर: (क) मानक ने
प्रश्न 6.
नहीं मानक, तू इसे नहीं मारेगा? यह भी हमारी तरह गरीब आदमी है। किसने कहा? (क) विशनी ने
(ख) मानक ने
(ग) कुन्ती ने
(घ) दीबू ने
उत्तर: (क) विशनी ने
प्रश्न 7.
ब्रम्मा की दूरी चौधरी ने कितना बताया था? (क) कई सी कोस दूर
(ख) सौ कोस
(ग) दो सौ कोस
(घ) पचास कोस
उत्तर: (क) कई सी कोस दूर
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
प्रश्न 1. मोहन राकेश का जन्म स्थान जंडीवाली गली, अमृतसर ....... में है।
उत्तर: पंजाब
प्रश्न 2. मोहन राकेश का बचपन का नाम ............... गुगलानी था।
उत्तर: मदन मोहन
प्रश्न 3. मोहन राकेश की माता का नाम ........... था।
उत्तर: बच्चन कौर
प्रश्न 4. करमचंद गुगलानी जी का साहित्यिक सांस्कृतिक ............... से जुड़ाव था।
उत्तर: संस्थाओं
प्रश्न 5. मोहन राकेश ने एम. ए. (संस्कृत) .............. से किया था।
उत्तर: लाहौर
प्रश्न 6. मोहन राकेश का जन्म ............... को हुआ था।
उत्तर: 8 जनवरी, 1925 ई.
प्रश्न 7. मोहन राकेश के अंधेरे बंद कमरे (1961 ई.), न आने वाला कल (1970 ई.), अंतराल (1972 ई.) आदि सभी ........ हैं।
उत्तर: उपन्यास
सिपाही की माँ अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. मानक की माँ का क्या नाम है?
उत्तर: विशनी।
प्रश्न 2. ‘सिपाही की माँ’ एकांकी के एकांकीकार हैं :
उत्तर: मोहन राकेश।
प्रश्न 3. मोहन राकेश की एकांकी का शीर्षक है :
उत्तर: सिपाही की माँ।
प्रश्न 4. ‘अषाढ़ का एक दिन' किसकी रचना है?
उत्तर: मोहन राकेश की।
प्रश्न 5. विशनी मानक को लड़ाई में क्यों भेजती है?
उत्तर: विशनी एक गरीब माँ है। उसे अपनी बेटी मुन्नी की शादी करनी है और घर की आर्थिक स्थिति खराब है। सेना में भर्ती होकर मानक कुछ पैसा कमा सके, इसी उम्मीद में विशनी उसे लड़ाई में भेजती है।
प्रश्न 6. मानक किस युद्ध में सिपाही बनकर लड़ने गया था?
उत्तर: द्वितीय विश्वयुद्ध में।
प्रश्न 7. मोहन राकेश ने हिन्दी में एम. ए. कहाँ से किया?
उत्तर: ओरियंटल कॉलेज, जालंधर से।
प्रश्न 8. मोहन राकेश किस पत्रिका के सम्पादक रहे?
उत्तर: सारिका।
सिपाही की माँ पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1.
बिशनी और मुन्नी को किसकी प्रतीक्षा है, वे डाकिए की राह क्यों देखती है?
उत्तर: बिशनी और मुन्नी को अपने घर के इकलौते बेटे और भाई मानक की प्रतीक्षा है। मानक द्वितीय विश्वयुद्ध में लड़ने गया हुआ है। वे उसकी कुशलता और उसके लौटने की खबर के लिए उसकी चिट्ठी का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हैं। इसीलिए वे रोज़ डाकिए की राह देखती हैं, यह आशा करते हुए कि शायद आज मानक की कोई खबर आए।
प्रश्न 2.
बिशनी मानक को लड़ाई में क्यों भेजती है?
उत्तर: बिशनी का परिवार अत्यंत गरीबी में जी रहा है। उसकी बेटी मुन्नी की शादी की उम्र हो गई है, लेकिन शादी के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसी विपदा में, सेना में भर्ती होना आर्थिक संकट से उबरने का एक रास्ता दिखाई देता है। मानक के लड़ाई में जाने से परिवार को कुछ आर्थिक सहायता मिलने की आशा थी। इसी मजबूरी और आशा के चलते बिशनी ने मानक को लड़ाई में भेजा।
प्रश्न 3.
सप्रसंग व्याख्या करें
(क) यह भी हमारी तरह गरीब आदमी है।
(ख) वर-घर देखकर ही क्या करना है, कुंती? मानक आए तो कुछ हो भी। तुझे पता ही है, आजकल लोगों के हाथ किततने बढ़े हुए हैं।
(ग) नहीं, फौजी वहाँ लड़ने के लिए हैं, वे नहीं भाग सकते। जो फौज छोड़कर भागता है, उसे गोली मार दी जाती है।
उत्तर:
(क) प्रसंग: यह कथन मोहन राकेश के एकांकी 'सिपाही की माँ' से लिया गया है। जब मानक एक भागते हुए सिपाही को पकड़कर मारने को उद्यत होता है, तो उसकी माँ विशनी उसे रोकते हुए यह बात कहती है।
व्याख्या: विशनी के इन शब्दों में एक सैनिक के प्रति गहरी सहानुभूति और मानवता छिपी है। वह समझती है कि यह सिपाही भी उनकी तरह ही गरीबी और मजबूरी का शिकार है, जो जीविका या परिवार के लिए युद्ध में शामिल हुआ है। उसका दुश्मन नहीं, बल्कि हालात हैं। विशनी का यह कथन युद्ध की विभीषिका में फंसे सामान्य लोगों की पीड़ा और उनकी निरुपाय स्थिति को उजागर करता है।
(ख) प्रसंग: यह संवाद भी उपर्युक्त एकांकी से है। पड़ोसन कुंती जब मुन्नी के लिए रिश्ते की बात करती है, तो विशनी अपनी आर्थिक विवशता बताते हुए यह जवाब देती है।
व्याख्या: विशनी का यह कथन उसकी गरीबी और हताशा को दर्शाता है। वह कहती है कि केवल वर देख लेने से कुछ नहीं होगा, क्योंकि शादी करने के लिए पैसा चाहिए। उसकी सारी उम्मीद उसके बेटे मानक के लौटने पर टिकी है, जो कुछ पैसा लेकर आएगा। "लोगों के हाथ बढ़े हुए हैं" कहकर वह दहेज और शादी के बढ़ते खर्चों की ओर इशारा करती है, जो उस जैसे गरीब परिवार की पहुँच से बाहर हैं।
(ग) प्रसंग: यह कथन बर्मा से भागकर आई लड़कियों में से एक का है, जो मुन्नी को फौज के कठोर अनुशासन के बारे में बता रही है।
व्याख्या: यह वाक्य युद्ध के मोर्चे पर एक सैनिक की बंधी हुई नियति को दर्शाता है। एक बार जब कोई सिपाही युद्ध में शामिल हो जाता है, तो उसके पास भागने का विकल्प नहीं रहता। सेना का अनुशासन अत्यंत कठोर है और भागने की कोशिश करने वाले को मृत्युदंड दिया जा सकता है। यह तथ्य युद्ध की भयावहता और एक सिपाही की मजबूरी को और गहरा कर देता है।
प्रश्न 4.
'भैया मेरे लिए जो कड़े लाएँगे, वे तारों और बंतो के कड़ों से भी अच्छे होंगे न' मुन्नी के इस कथन को ध्यान में रखते हुए उसका परिचय आप अपने शब्दों में दीजिए।
उत्तर: मुन्नी 'सिपाही की माँ' एकांकी की एक महत्वपूर्ण पात्र है। वह सिपाही मानक की छोटी बहन और विशनी की बेटी है। एक किशोरी के रूप में वह सरल, भोली और सपनों से भरी हुई है। गरीबी में पली-बढ़ी मुन्नी के छोटे-छोटे सुख हैं, जैसे सुंदर कड़े पहनना। जब वह अन्य लड़कियों को सजे-धजे देखती है, तो उसे अपने भाई की याद आती है और वह विश्वास के साथ कहती है कि उसके भैया उसके लिए सबसे सुंदर कड़े लाएँगे। यह कथन उसके भाई के प्रति असीम प्रेम, विश्वास और उसकी वापसी की प्रतीक्षा की ललक को दर्शाता है। उसके सारे सपने और भविष्य की योजनाएँ उसके भाई के साथ जुड़ी हुई हैं। वह निरंतर उसकी चिट्ठी और सुरक्षित लौटने की प्रतीक्षा करती रहती है, जो उसके चरित्र की कोमलता और परिवार के प्रति गहरी आसक्ति को दिखाता है।
प्रश्न 5.
बिशनी मानक की माँ है, पर उसमें किसी भी सिपाही की माँ को ढूँढ़ा जा सकता है। कैसे?
उत्तर: बिशनी का चरित्र केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उन अनगिनत माओं का प्रतिनिधित्व करता है जिनके बेटे युद्ध में जाते हैं। उसमें हर सिपाही की माँ के सामान्य गुण देखे जा सकते हैं:
- आर्थिक मजबूरी: अधिकतर माएँ गरीबी के कारण ही अपने बेटों को सेना में भेजती हैं, जैसे बिशनी ने मुन्नी की शादी के लिए मानक को भेजा।
- अनिश्चितता का दर्द: बिशनी की तरह हर माँ रोज़ डाकिए की राह देखती है, अपने बेटे की एक चिट्ठी या खबर के लिए तरसती है।
- भय और आशा का द्वंद्व: एक ओर बेटे की सुरक्षा का भय, दूसरी ओर उसके सकुशल लौटने और घर की स्थिति सुधारने की आशा।
- मानवीय संवेदना: बिशनी दुश्मन सिपाही में भी एक गरीब आदमी देखती है। यह संवेदना किसी भी माँ में हो सकती है जो युद्ध की निरर्थकता को समझती है।
प्रश्न 6.
एकांकी और नाटक में कया अन्तर है? संक्षेप में बताएँ।
एकांकी और नाटक में निम्नलिखित प्रमुख अंतर पाए जाते हैं:
- अंकों की संख्या: एकांकी में केवल एक ही अंक होता है, जिसमें एक या अधिक दृश्य हो सकते हैं। जबकि नाटक में एक से अधिक अंक (एक्ट) होते हैं और प्रत्येक अंक कई दृश्यों (सीन) में विभाजित होता है।
- कथा का स्वरूप: एकांकी में कथा एकल, संक्षिप्त और सीधी रेखा में चलती है। इसका एक ही लक्ष्य या संघर्ष होता है। नाटक में कथा अधिक विस्तृत होती है, जिसमें मुख्य कथा के साथ-साथ अन्य प्रासंगिक उपकथाएँ भी शामिल हो सकती हैं।
- क्रिया-व्यापार: एकांकी में संघर्ष या क्रिया सीधे और तेज गति से आगे बढ़ती है, भटकने का अवसर नहीं होता। नाटक में क्रिया का विकास अधिक जटिल हो सकता है, जिसमें मोड़ और विस्तार के लिए जगह होती है।
- देश-काल और वातावरण: एकांकी में देश, काल और वातावरण का चित्रण संक्षिप्त और आवश्यकतानुसार ही होता है। नाटक में इन्हें अधिक विस्तार और विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया जा सकता है।
- संरचनात्मक नियम: परंपरागत भारतीय नाटक शास्त्र के अनुसार, नाटक में अर्थ, प्रकृति, कार्यावस्था और नाट्य सन्धि जैसे नियमों का पालन किया जाता है। एकांकी में इन नियमों की आवश्यकता नहीं होती, यह अधिक लचीली और आधुनिक संरचना का अनुसरण करता है।
प्रश्न 7.
आपके विचार में इस एकांकी का सबसे सशक्त पात्र कौन है और क्यों?
मेरे विचार में 'सिपाही की माँ' एकांकी का सबसे सशक्त पात्र बिशनी है। वह पूरे एकांकी की धुरी हैं, जिसके इर्द-गिर्द सभी घटनाएँ और पात्र घूमते हैं। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
- ममतामयी माँ: बिशनी में एक माँ का सारा स्नेह और चिंता है। वह अपने बेटे मानक को फौज में भेजकर देश-सेवा के लिए प्रेरित करती है, लेकिन उसकी सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंतित रहती है।
- विश्वमाता का रूप: उसकी ममता केवल अपने बेटे तक सीमित नहीं है। जब दुश्मन सिपाही उसके बेटे को मारने आता है, तो वह उस सिपाही को भी बचाने के लिए खड़ी हो जाती है, क्योंकि वह उसमें भी किसी माँ का बेटा देखती है। यह भावना उसे एक सामान्य माँ से ऊपर उठाकर 'विश्वमाता' का दर्जा देती है।
- साहसी और निडर: वह हिंसा और बंदूक के सामने भी नहीं झुकती। मानक को दुश्मन को मारने से रोककर वह अहिंसा और मानवता का शक्तिशाली संदेश देती है।
- ग्रामीण नारी के गुण: वह एक सीधी-सादी, निष्कपट ग्रामीण महिला है। पुत्री मुन्नी के विवाह की चिंता, पड़ोसन कुन्ती के साथ संबंध और शरणार्थी लड़कियों के प्रति दया भाव - ये सभी उसके संपूर्ण चरित्र को उभारते हैं।
इस प्रकार, बिशनी न केवल कथानक को आगे बढ़ाती है, बल्कि एकांकी के मूल संदेश - 'मानवता युद्ध से बड़ी है' - की वाहक भी है, इसलिए वह सबसे सशक्त पात्र है।
प्रश्न 8.
दोनों लड़कियाँ कौन हैं?।
एकांकी में आने वाली दोनों लड़कियाँ बर्मा (अब म्यांमार) के रंगून शहर की शरणार्थी हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब जापानी और अंग्रेज-भारतीय सेनाओं के बीच बर्मा में युद्ध हुआ, तो वहाँ भयंकर हिंसा फैल गई। इससे बचने के लिए हज़ारों बर्मी नागरिकों ने अपना घर-बार छोड़कर भारत की सीमा में शरण ली। इन्हीं शरणार्थियों में ये दोनों लड़कियाँ अपने परिवार के ग्यारह अन्य सदस्यों के साथ दुर्गम जंगलों और दलदलों को पार करते हुए भारत पहुँची हैं। भूख और प्यास से बेहाल ये लड़कियाँ बिशनी के घर पर खाने की माँग करती हैं। बिशनी उन पर दया करती है और उन्हें भरपेट चावल देती है। इन लड़कियों का प्रवेश युद्ध के कारण होने वाली मानवीय पीड़ा को दर्शाता है।
प्रश्न 9.
कुन्ती का परिचय आप किस तरह देंगे?
कुन्ती इस एकांकी में बिशनी की पड़ोसन और हितैषी के रूप में प्रस्तुत की गई है। उसका चरित्र भले ही छोटा है, लेकिन महत्वपूर्ण है:
- सहानुभूतिशील पड़ोसन: कुन्ती बिशनी की चिंताओं को समझती है। वह बिशनी को सांत्वना देती है और उसकी पुत्री मुन्नी के विवाह के लिए वर ढूँढ़ने में मदद करने को तैयार रहती है।
- व्यावहारिक सोच: वह बिशनी को धैर्य रखने और अत्यधिक दुखी न होने की सलाह देती है। वह यह भी कहती है कि उसका बेटा मानक बर्मा से सकुशल लौट आएगा।
- रूढ़िवादी दृष्टिकोण: कुन्ती का चरित्र एक पारंपरिक ग्रामीण महिला का प्रतिनिधित्व करता है। जब वह बर्मा की उन दो लड़कियों को अजनबी पहनावे में भीख माँगते देखती है, तो उसे आश्चर्य और थोड़ी नाराज़गी होती है। उसका यह कहना - "हाय रे राम ! ये लड़कियाँ कि....!" - उसकी रूढ़िवादिता और नए परिवेश के प्रति अचरज को दर्शाता है।
संक्षेप में, कुन्ती एक सहायक, चिंताशील और सामान्य ग्रामीण पड़ोसन का सजीव चित्र है।
प्रश्न 10.
मानक और सिपाही एक दूसरे को क्यों मारना चाहते हैं?
मानक और सिपाही एक-दूसरे को मारना इसलिए चाहते हैं क्योंकि वे द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान दो विरोधी सेनाओं के सैनिक हैं। मानक भारतीय सेना (अंग्रेजों के साथ) की ओर से लड़ रहा है, जबकि वह सिपाही जापानी सेना का सदस्य है। युद्ध के मैदान में वे एक-दूसरे के दुश्मन बन गए हैं। उनका कर्तव्य अपने-अपने देश और सेना के प्रति निष्ठा रखते हुए विरोधी पक्ष के सैनिक को पराजित करना है। इसलिए, जब वे आमने-सामने होते हैं, तो उनकी प्रवृत्ति एक-दूसरे को मारने की होती है। यह युद्ध की वह क्रूर वास्तविकता है, जहाँ व्यक्तिगत शत्रुता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और सैन्य कर्तव्य हिंसा को जन्म देते हैं।
प्रश्न 11.
मानक स्वयं को वहशी और जानवर से भी बढ़कर क्यों कहता है?
मानक स्वयं को वहशी और जानवर से भी बढ़कर इसलिए कहता है क्योंकि युद्ध ने उसकी मानवीय संवेदनाओं को कुंद कर दिया है। युद्ध के मैदान में लगातार हिंसा, मौत और विनाश देखने के कारण उसके अंदर का सैनिक उसके अंदर के इंसान पर हावी हो गया है। उसका एकमात्र लक्ष्य दुश्मन को मारना रह गया है। जब उसकी माँ बिशनी उस दुश्मन सिपाही को बचाने के लिए खड़ी होती है, तो मानक को अपनी इस हिंसक मानसिकता का एहसास होता है। वह समझता है कि एक सच्चा इंसान किसी निर्दोष या निहत्थे को मारने की सोच भी नहीं सकता, लेकिन युद्ध ने उसे ऐसा बना दिया है। अपनी इसी पशुवत हिंसक प्रवृत्ति पर पश्चाताप और ग्लानि के कारण वह स्वयं को जानवर से भी बदतर कहकर अपनी निंदा करता है। यह उसके अंदर बची हुई मानवीयता का ही प्रमाण है।
प्रश्न 1. 'सिपाही की माँ' कहानी के लेखक कौन हैं?
इस कहानी के लेखक महावीर प्रसाद द्विवेदी जी हैं।
प्रश्न 2. 'सिपाही की माँ' कहानी का प्रमुख पात्र कौन है?
इस कहानी का प्रमुख पात्र मंगला है, जो एक सिपाही की माँ है और अपने बेटे की वापसी की प्रतीक्षा करती है।
प्रश्न 3. मंगला का पति क्या काम करता था?
मंगला का पति एक सिपाही था, जिसकी मृत्यु हो चुकी थी।
प्रश्न 4. मंगला का बेटा क्या काम करता था?
मंगला का बेटा भी अपने पिता की तरह एक सिपाही था और सेना में भर्ती होकर दूर चला गया था।
प्रश्न 5. मंगला अपने बेटे के लिए क्या करती थी?
मंगला अपने बेटे के लिए रोजाना प्रार्थना करती थी और उसकी सुरक्षा व वापसी की कामना करती रहती थी। वह उसके लिए खाना भी बनाकर रखती थी, मानो वह किसी भी पल आ सकता है।
प्रश्न 6. मंगला को अपने बेटे की वापसी की उम्मीद क्यों थी?
मंगला को अपने बेटे की वापसी की उम्मीद इसलिए थी क्योंकि उसने एक सपना देखा था, जिसमें उसका बेटा सकुशल लौट आया था। यह सपना उसके लिए आशा की किरण बन गया था।
प्रश्न 7. मंगला के बेटे का क्या नाम था?
कहानी में मंगला के बेटे का स्पष्ट नाम नहीं दिया गया है, लेकिन वह उसे 'लाला' या प्यार से पुकारती है।
प्रश्न 8. मंगला की दशा देखकर गाँव वालों की क्या प्रतिक्रिया थी?
गाँव वाले मंगला की दशा देखकर दुखी होते थे और उसे समझाने की कोशिश करते थे कि उसका बेटा शायद वापस नहीं आएगा, लेकिन मंगला अपनी आशा नहीं छोड़ती थी।
प्रश्न 9. 'सिपाही की माँ' कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
इस कहानी का मुख्य संदेश एक माँ के अटूट प्रेम, आशा और धैर्य को दर्शाना है। यह दिखाती है कि कैसे एक माँ अपनी संतान के लिए अनंत प्रतीक्षा और विश्वास रखती है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।
प्रश्न 10. मंगला अंततः किसकी प्रतीक्षा करती रही?
मंगला अंत तक अपने बेटे की वापसी की प्रतीक्षा करती रही, भले ही उसे यह जानकारी मिल चुकी थी कि उसका बेटा युद्ध में शहीद हो गया है। उसकी मातृ प्रेम से भरी आशा कभी खत्म नहीं हुई।
ँखों का रंग नहीं पहचानती।
उत्तर-
(क) यह एक विशेष्य पदबंध है। यहाँ 'रंग' शब्द विशेष्य है और 'आँखों का' उसकी विशेषता बता रहा है, जो मिलकर एक पदबंध बना रहे हैं।
(ख) यह एक संज्ञा पदबंध है। 'आँखों का रंग' पूरा समूह एक संज्ञा का काम कर रहा है, जो क्रिया 'पहचानती' का कर्ता है।
(ग) संज्ञा पदबंध
(घ) सर्वनाम पदबंध
(ड) संज्ञा पदबंध।
सिपाही की माँ लेखक परिचय मोहन राकेश (1925-1972)
जीवन-परिचय-
बीसवीं सदी के उत्तरवर्ती युग के प्रमुख कथाकार एवं नाटककार मोहन राकेश का जन्म 8 जनवरी, सन् 1925 को जड़वाली गली, अमृतसर, पंजाब में हुआ। इनका बचपन का नाम मदन मोहन गुगलानी था। इनकी माता का नाम बच्चन कौर एवं पिता का नाम करमचन्द गुगलानी था। इनके पिता पेशे से वकील थे लेकिन साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े हुए थे। राकेश जी ने लाहौर से संस्कृत में एम.ए. किया और फिर ओरिएंटल कॉलेज, जालंधर से हिन्दी में एम.ए. किया। इसके बाद इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया और 'सारिका' के कार्यालय में भी नौकरी की। सन् 1947 के आसपास इन्हें एलफिस्टन कॉलेज, मुम्बई में हिन्दी के अतिरिक्त भाषा प्राध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया। ये कुछ समय तक डी. ए.वी कॉलेज, जालंधर में प्रवक्ता भी रहे। सन् 1960 में इन्हें पुन: दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया। वहीं सन् 1962 में ये 'सारिका' के संपादक बन गए। इसके बाद इन्होंने स्वतन्त्र लेखन करना शुरू किया और इसी दौरान 3 दिसम्बर, सन् 1972 के दिन इनका निधन हो गया।
रचनाएँ-
मोहन राकेश की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं:
कहानी संग्रह- इंसान के खंडहर (1950), नए बादल (1957), जानवर और जानवर (1958), एक और जिन्दगी (1961), फौलाद का आकाश (1972) वारिस (1972)।
उपन्यास- अँधेरे बंद कमरे (1961), न आनेवाला कल (1970), अंतराल (1972)।
नाटक- आषाढ़ का एक दिन (1958), लहरों के राजहंस (1963), आधे-अधूरे (1969)।
साहित्यिक विशेषताएँ-
मोहन राकेश “नई कहानी” आन्दोलन के प्रमुख हस्ताक्षर थे। ये बीसवीं सदी के उत्तरवर्ती युग के प्रमुख कथाकार एवं नाटककार थे। इन्होंने कई श्रेष्ठ कहानियाँ तथा उपन्यास लिखे। नाटक के क्षेत्र में तो ये विशिष्ट प्रतिभा माने जाते हैं। हिन्दी के आधुनिक रंगमंच को नई दिशा देने में इनका प्रमुख योगदान था। इसलिए ये आधुनिक हिन्दी नाटक और रंगमंच की युगांतकारी प्रतिभा के रूप में सम्पूर्ण भारत में प्रसिद्ध हो चुके हैं। इनके नाटकों की परिकल्पना अत्यन्त ठोस, जटिल तथा नवीन है। इनसे प्रेरणा प्राप्त करके अनेक साहित्यकारों ने साहित्य सृजन किया।
भाषा-शिल्प की विशेषताएँ-
मोहन राकेश का अद्भुत भाषा शिल्प उनके साहित्य की प्रमुख विशेषता है। इनकी भाषा में सरलता तथा सहजता के साथ-साथ भावानुकूलता, प्रसंगानुकूलता, प्रवाहमयता तथा चित्रात्मकता जैसे गुण भी विद्यमान हैं।
सिपाही की माँ पाठ के सारांश।
‘सिपाही की माँ’ शीर्षक एकांकी मोहन राकेश द्वारा लिखित “अंडे के छिलके तथा अन्य एकांकी” से ली गई है।
चिट्ठी का इंतजार- गाँव का एक साधारण घर है जिसमें बिशनी नाम की महिला अपनी चौदह वर्ष की लड़की मुन्नी के साथ रहती है। उनके घर का इकलौता बेटा लड़ाई के लिए बर्मा गया हुआ है और वह दिन-रात उसकी चिट्ठी का इंतजार करती रहती है। गाँव में डाक की गाड़ी आती है तो मुन्नी अपनी चिट्ठी लेने जाती है पर चिट्ठी नहीं आती है जिससे वो कुछ उदास हो जाती है। उसकी माँ भी चिट्ठी न आने से बहुत दुखी है। लेकिन वह माँ को बार-बार यही समझाती है कि जल्दी ही चिट्ठी आएगी। फिर वे दोनों बर्मा की दूरी को लेकर बातचीत करती है। इसी बीच मुन्नी यह कह देती है कि कहीं चिट्ठी लाने वाला जहाज डूब गया हो जिस कारण उसकी माँ उसे डाँटती है।
मुन्नी की शादी की चर्चा- तभी वहाँ पड़ोस में रहने वाली कुंती आ जाती है। पहले वह वर्मा की लड़ाई के विषय में बातचीत करती है और फिर मुन्नी की शादी के बारे में पूछती है। साथ ही वह मुन्नी की शादी जल्द-से-जल्द करने को कहती है। फिर वह कहती है कि तुम्हारा लड़का जो युद्ध में गया है वह पता नहीं कब तक आएगा, क्योंकि लड़ाई का कोई पता नहीं है कि वह कब तक चलती रहे।
बर्मा से दो लड़कियों का आगमन- उसी समय वहाँ दीबू कुम्हार आता है और बताता है कि दो जवान लड़कियाँ अजीब से कपड़े पहने घर- घर जाकर आठा-दाल माँग रही है। यह बताकर दीवू वहाँ से चला जाता है। इतने में वे लड़कियाँ वहाँ आ जाती है और दाल-चावल माँगती है। जब विशनी और कुंती उनके बारे में पूछती है तो वे बताती है कि मैं बर्मा से आई हुँ। वहाँ भीषण लड़ाई चल रही है जिस कारण हमारा घर-बार छिन गया है, मैं बड़ी ही मुश्किल से जंगल के रास्ते अपनी जान बचाकर आई हुँ।
जब मुन्नी उनसे .फौजियों के बारे में पूछती है तो वे बताती है कि जो फौज छोड़कर भागता हैं, उसे गोली मार दी जाती है। फिर वे बर्मा की नाटकीय स्थिति का वर्णन करती है जिसे सुनकर बिशनी काँप उठती है। उसे अपने बेटे की चिन्ता सताने लगती है तथा कुंती और मुन्नी उसे ढाँढ़स बंधाती है। मुन्नी कहती है कि मेरा दिल कहता है कि भैया आप ही आएँगे। जिसे सुनकर बिशनी कुछ हिम्मत जुटाकर बोलती है तेरा दिल ठीक कहता है बेटी ! चिट्ठी न आई तो वह आप ही आएगा।
माँ-बेटी की बातचीत- रात के समय माँ-बेटी आपस में बातचीत करती है। मुन्नी अपनी माँ से कहती है कि मेरी कुछ सहेलियों के कड़े बहुत ही सुन्दर हैं जिन्हें वह सारे गाँव में दिखाती हैं। तब बिशनी उसे प्यार भरे स्वर में कहती है कि तेरा भाई तेरे लिए उनसे भी अच्छे कड़े लाएगा।
स्वप्न की स्थिति : इसके बाद दोनों सो जाती हैं। स्वप्न में बिशनी को मानक (उसका बेटा) दिखाई देता है। वह उससे बातचीत करती है। वह बुरी तरह घायल है और बताता है कि दुश्मन उसके पीछे लगा है। बिशनी उसे लेटने को कहती है पर वह पानी माँगता है। तभी वहाँ एक सिपाही आता है और वह उसे मरा हुआ बताता है। यह सुनकर बिशनी सहम जाती है लेकिन तभी मानक कहता है कि मैं मरा नहीं हूँ। वह सिपाही मानक को मारने की बात कहता है। लेकिन बिशनी कहती है कि मैं इसकी माँ हूँ और इसे मारने नहीं दूंगी। सिपाही मानक को वहशी तथा खूनी बताता है।
लेकिन बिशनी उसकी बात को नकार देती है। वह कहती है कि यह बुरी तरह घायल है और इसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। इसलिए तू इसे मारने का विचार त्याग दे। जवाब में सिपाही कहता है कि अगर मैं इसे नहीं मारूँगा तो यह मुझे मार देगा। बिशनी उसे विश्वास दिलाती है कि यह तुझे नहीं मारेगा। तभी मानक उठ खड़ा होता है और उस सिपाही को मारने की बात कहता है। बिशनी उसे समझाती है लेकिन वह नहीं मानता है और उसकी बोटी-बोटी करने की बात कहता है।
स्वप्न भंग- यह सुनकर बिशनी चिल्लाकर उठ बैठती है। वह जोर-जोर से मानक ! मानक ! कहती है। उसकी आवाज सुनकर मुन्नी वहाँ आती है। माँ की स्थिति देखकर वह कहती है कि तुम रोज भैया के सपने देखती हो, जबकि मैंने तुमसे कहा था कि भैया जल्दी आ जाएँगे। फिर वह अपनी माँ के गले लग जाती है। बिशनी उसका माथा चूमकर उसे सोने को कहती है और मन-ही-मन कुछ गुनगुनाने लगती है।
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