Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 10 प्रकाश(परावर्तन तथा अपवर्तन) Solutions

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1. निम्नलिखित में से कौन समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब का लक्षण नहीं है?

  1. आभासी
  2. सीधा
  3. वस्तु के बराबर
  4. वास्तविक

उत्तर: (D) वास्तविक
व्याख्या: समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब हमेशा आभासी, सीधा तथा वस्तु के आकार के बराबर होता है। यह प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनता है और उसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता, इसलिए यह वास्तविक नहीं होता। वास्तविक प्रतिबिम्ब उल्टा होता है और उसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है।

2. किसी बिंब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा बिंब से बड़ा है। बिंब की स्थिति क्या है?

  1. दर्पण के ध्रुव तथा फोकस के बीच
  2. फोकस पर
  3. फोकस तथा वक्रता केंद्र के बीच
  4. वक्रता केंद्र पर

उत्तर: (A) दर्पण के ध्रुव तथा फोकस के बीच
व्याख्या: जब किसी बिंब को अवतल दर्पण के ध्रुव (P) और फोकस (F) के बीच रखा जाता है, तो बना प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनता है। यह प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा बिंब से आकार में बड़ा होता है। इस स्थिति का उपयोग शेविंग मिरर या मेकअप मिरर में किया जाता है।

3. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ -15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः हैं-

  1. दोनों अवतल
  2. दोनों उत्तल
  3. दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
  4. दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल

उत्तर: (A) दोनों अवतल
व्याख्या: गोलीय दर्पणों के लिए, अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक (-) मानी जाती है, जबकि उत्तल दर्पण की धनात्मक (+) होती है। पतले गोलीय लेंसों के लिए, अवतल (अपसारी) लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक (-) होती है, जबकि उत्तल (अभिसारी) लेंस की धनात्मक (+) होती है। चूंकि दोनों की फोकस दूरी -15 cm (ऋणात्मक) दी गई है, इसलिए दर्पण अवतल है और लेंस भी अवतल (अपसारी) है।

4. किसी बिंब का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए बिंब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखेंगे?

  1. लेंस के मुख्य फोकस पर
  2. फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
  3. अनंत पर
  4. लेंस के प्रकाशिक केंद्र तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर: (B) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
व्याख्या: जब किसी बिंब को उत्तल लेंस से फोकस दूरी (f) की दोगुनी दूरी (2f) पर रखा जाता है, तो प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर 2f दूरी पर बनता है। यह प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा तथा बिंब के आकार के बराबर होता है। इस स्थिति को '2F' स्थिति कहते हैं।

5. किसी गोलीय दर्पण द्वारा आवर्धन +1 का अर्थ है कि-

  1. प्रतिबिम्ब वस्तु के बराबर है
  2. प्रतिबिम्ब अति आवर्धित है
  3. प्रतिबिम्ब सीधा तथा आभासी है
  4. प्रतिबिम्ब सीधा तथा वस्तु के बराबर है

उत्तर: (D) प्रतिबिम्ब सीधा तथा वस्तु के बराबर है
व्याख्या: आवर्धन (m) प्रतिबिम्ब की ऊँचाई (h') और बिंब की ऊँचाई (h) का अनुपात होता है, अर्थात m = h'/h। यदि m = +1 है, तो इसका मतलब है कि प्रतिबिम्ब का आकार बिंब के आकार के बराबर है। आवर्धन का चिह्न धनात्मक (+) होने का अर्थ है कि प्रतिबिम्ब सीधा बना है। इस प्रकार, +1 आवर्धन प्रतिबिम्ब के सीधा और बिंब के बराबर आकार का होने को दर्शाता है।

6. प्रकाश के अपवर्तन के नियम लिखिए।

उत्तर: प्रकाश के अपवर्तन के दो मुख्य नियम हैं:
प्रथम नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा दोनों माध्यमों को पृथक करने वाले अंतरापृष्ठ के आपतन बिंदु पर अभिलंब, सभी एक ही तल में होते हैं।
द्वितीय नियम (स्नेल का नियम): किन्हीं दो माध्यमों के लिए तथा प्रकाश के एक विशेष रंग के लिए, आपतन कोण (i) की ज्या (sine) और अपवर्तन कोण (r) की ज्या (sine) का अनुपात एक स्थिरांक होता है। इसे अपवर्तनांक कहते हैं। गणितीय रूप में: sin i / sin r = स्थिरांक (n21)। यह स्थिरांक दूसरे माध्यम का पहले माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक होता है।

7. प्रकाश के परावर्तन के नियम लिखिए।

उत्तर: प्रकाश के परावर्तन के दो मुख्य नियम हैं:
प्रथम नियम: आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलंब, तीनों एक ही तल में होते हैं।
द्वितीय नियम: परावर्तन का कोण सदैव आपतन कोण के बराबर होता है। अर्थात्, ∠i = ∠r, जहाँ ∠i आपतन कोण है और ∠r परावर्तन कोण है।

8. गोलीय दर्पण के ध्रुव, मुख्य फोकस एवं वक्रता त्रिज्या को परिभाषित कीजिए।

उत्तर:
ध्रुव (Pole - P): गोलीय दर्पण के परावर्तक पृष्ठ के मध्य बिंदु को उस दर्पण का ध्रुव कहते हैं। यह दर्पण की मुख्य अक्ष पर स्थित होता है।
मुख्य फोकस (Principal Focus - F): मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद अवतल दर्पण में मुख्य अक्ष के एक बिंदु पर अभिसरित होती हैं या उत्तल दर्पण में मुख्य अक्ष के एक बिंदु से अपसरित होती हुई प्रतीत होती हैं। इस बिंदु को दर्पण का मुख्य फोकस कहते हैं।
वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature - R): उस गोले की त्रिज्या, जिसका गोलीय दर्पण एक भाग है, उस दर्पण की वक्रता त्रिज्या कहलाती है। यह दर्पण के ध्रुव (P) से वक्रता केंद्र (C) तक की दूरी होती है।

9. उस दर्पण का नाम बताइए जो बिंब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सके।

उत्तर: अवतल दर्पण बिंब का सीधा तथा आवर्धित (बड़ा) प्रतिबिम्ब बना सकता है।
शर्त: जब बिंब को अवतल दर्पण के ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच रखा जाता है, तो प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनता है। यह प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा बिंब से बड़ा (आवर्धित) होता है। शेविंग मिरर, मेकअप मिरर और दंत चिकित्सक के दर्पण इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं।

10. प्रकाश के अपवर्तनांक से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: प्रकाश के अपवर्तनांक (Refractive Index) को दो प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है:
1. सापेक्ष अपवर्तनांक: जब प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तो आपतन कोण (i) की ज्या (sine) और अपवर्तन कोण (r) की ज्या (sine) के अनुपात को दूसरे माध्यम का पहले माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक कहते हैं। इसे n21 से दर्शाते हैं।
2. निरपेक्ष अपवर्तनांक: जब प्रकाश निर्वात (या वायु) से किसी अन्य माध्यम में प्रवेश करता है, तो उस माध्यम के निर्वात (या वायु) के सापेक्ष अपवर्तनांक को उस माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक कहते हैं। किसी माध्यम का अपवर्तनांक जितना अधिक होगा, उस माध्यम में प्रकाश की चाल उतनी ही कम होगी। उदाहरण के लिए, जल का अपवर्तनांक लगभग 1.33 और कांच का लगभग 1.5 होता है।

11. एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 10 cm है। इसकी वक्रता त्रिज्या क्या होगी?

उत्तर: गोलीय दर्पण के लिए, वक्रता त्रिज्या (R) और फोकस दूरी (f) में संबंध है: R = 2f
यहाँ, फोकस दूरी (f) = 10 cm (अवतल दर्पण के लिए ऋणात्मक माना जाता है, लेकिन परिमाण के लिए धनात्मक लेते हैं)।
अतः, वक्रता त्रिज्या (R) = 2 × 10 cm = 20 cm
इस प्रकार, दिए गए अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 सेंटीमीटर होगी।

12. उत्तल लेंस द्वारा किस प्रकार का प्रतिबिम्ब बनता है जब बिंब अनंत पर हो?

उत्तर: जब बिंब उत्तल लेंस के सामने अनंत दूरी पर होता है, तो लेंस द्वारा बना प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर मुख्य फोकस (F') पर बनता है। इस स्थिति में प्रतिबिम्ब के लक्षण निम्नलिखित होते हैं:
- प्रतिबिम्ब वास्तविक होता है (पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है)।
- प्रतिबिम्ब उल्टा बनता है।
- प्रतिबिम्ब का आकार अत्यधिक छोटा (बिंदु के समान) होता है।
इस सिद्धांत का उपयोग कैमरा लेंस में दूर की वस्तुओं का प्रतिबिम्ब बनाने के लिए किया जाता है।

13. प्रकाश के परावर्तन एवं अपवर्तन में क्या अंतर है?

उत्तर: प्रकाश के परावर्तन और अपवर्तन में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

आधार परावर्तन अपवर्तन
परिभाषा जब प्रकाश किरण किसी चिकने पृष्ठ पर गिरकर वापस उसी माध्यम में लौट आती है, तो इस घटना को परावर्तन कहते हैं। जब प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करते समय अपनी दिशा बदल लेती है, तो इस घटना को अपवर्तन कहते हैं।
माध्यम प्रकाश एक ही माध्यम में रहता है। प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है।
चाल में परिवर्तन प्रकाश की चाल में कोई परिवर्तन नहीं होता। प्रकाश की चाल बदल जाती है (दूसरे माध्यम में अलग)।
तरंगदैर्ध्य तरंगदैर्ध्य में कोई परिवर्तन नहीं होता। तरंगदैर्ध्य बदल जाती है।
उदाहरण दर्पण में प्रतिबिम्ब दिखाई देना। पानी में डूबी हुई पेंसिल का टेढ़ा दिखाई देना।

14. गोलीय दर्पण के सूत्र लिखिए।

उत्तर: गोलीय दर्पण का सूत्र निम्नलिखित है:

1/f = 1/v + 1/u

जहाँ,
f = दर्पण की फोकस दूरी
v = दर्पण से प्रतिबिम्ब की दूरी
u = दर्पण से बिंब की दूरी
चिह्न परिपाटी: इस सूत्र में चिह्न परिपाटी का ध्यान रखना आवश्यक है। आमतौर पर, दर्पण के सामने की दूरी को ऋणात्मक (-) और दर्पण के पीछे की दूरी को धनात्मक (+) लिया जाता है। अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक और उत्तल दर्पण की धनात्मक होती है।

15. लेंस सूत्र लिखिए।

उत्तर: पतले लेंस के लिए लेंस सूत्र निम्नलिखित है:

1/f = 1/v - 1/u

जहाँ,
f = लेंस की फोकस दूरी
v = लेंस से प्रतिबिम्ब की दूरी
u = लेंस से बिंब की दूरी
चिह्न परिपाटी: लेंस सूत्र में चिह्न परिपाटी का विशेष ध्यान रखा जाता है। उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक (+) और अवतल लेंस की ऋणात्मक (-) ली जाती है। बिंब की दूरी (u) सदैव ऋणात्मक ली जाती है। यदि प्रतिबिम्ब की दूरी (v) धनात्मक आती है तो प्रतिबिम्ब वास्तविक और उल्टा होता है, यदि ऋणात्मक आती है तो प्रतिबिम्ब आभासी और सीधा होता है।

निम्नलिखित दर्पण का प्रकार बताइए

(a) किसी कार का अग्र-दीप (हैडलाइट)

(b) किसी वाहन का पार्श्व/पश्च-दृश्य दर्पण

(c) सौर भट्टी अपने उत्तर की कारण सहित पुष्टि कीजिए।

उत्तर:

(a) कार की हैडलाइट में अवतल दर्पण का प्रयोग होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अवतल दर्पण प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर परावर्तित करके एक शक्तिशाली, संकेंद्रित एवं समानांतर प्रकाश पुंज प्रदान करता है, जो सड़क को दूर तक रोशन करने के लिए आवश्यक है।

(b) वाहन के पार्श्व या पश्च-दृश्य दर्पण में उत्तल दर्पण का प्रयोग होता है। उत्तल दर्पण का दृष्टि क्षेत्र बहुत चौड़ा होता है, जिससे ड्राइवर को पीछे आने वाले वाहनों का एक विस्तृत दृश्य मिलता है। यह प्रतिबिंब सीधा, छोटा तथा आभासी बनाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा कम हो जाता है।

(c) सौर भट्टी में अवतल दर्पण का प्रयोग होता है। अवतल दर्पण सूर्य से आने वाली समानांतर प्रकाश किरणों को अपने फोकस बिंदु पर एकत्रित (संकेंद्रित) कर देता है। इस संकेंद्रण से फोकस बिंदु पर अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिसका उपयोग खाना पकाने या पानी गर्म करने जैसे कार्यों में किया जा सकता है।

प्रश्न 9.

किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज़ से ढक दिया गया है। कया यह लेंस किसी बिंब का पूरा प्रतिबिंब बना पाएगा? अपने उत्तर की प्रयोग द्वारा जाँच कीजिए। अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

हाँ, यह लेंस वस्तु (बिंब) का पूरा प्रतिबिंब बना सकेगा, लेकिन प्रतिबिंब की चमक (तीव्रता) कम हो जाएगी।

प्रयोग विधि:

  1. एक प्रकाशिक बेंच पर एक स्टैंड में उत्तल लेंस लगाइए।
  2. लेंस की फोकस दूरी से अधिक दूरी पर, एक जलती हुई मोमबत्ती रखिए।
  3. लेंस के दूसरी ओर एक सफेद पर्दा रखकर मोमबत्ती का स्पष्ट, उल्टा और वास्तविक प्रतिबिंब प्राप्त कीजिए।
  4. अब लेंस के आधे भाग को काले कागज से ढक दीजिए।
  5. पुनः पर्दे पर प्रतिबिंब देखिए।

प्रेक्षण:

  • लेंस के ढकने से पहले, मोमबत्ती का पूरा, स्पष्ट और चमकीला प्रतिबिंब प्राप्त होता है।
  • लेंस के आधे भाग को काले कागज से ढकने के बाद भी मोमबत्ती का पूरा प्रतिबिंब ही दिखाई देता है, लेकिन इसकी चमक पहले की तुलना में कम हो जाती है।

व्याख्या:

लेंस द्वारा प्रतिबिंब बनाने की प्रक्रिया में, वस्तु के प्रत्येक बिंदु से चलने वाली प्रकाश किरणें लेंस के विभिन्न भागों से अपवर्तित होकर पर्दे पर एक ही संगत बिंदु पर मिलती हैं। जब लेंस का आधा भाग ढक दिया जाता है, तब भी वस्तु के प्रत्येक बिंदु से चलने वाली कुछ किरणें लेंस के खुले भाग से होकर गुजरती रहती हैं और पर्दे पर उसी बिंदु पर मिल जाती हैं। इसलिए प्रतिबिंब पूरा बनता है। हालाँकि, ढके हुए भाग से कोई किरण नहीं गुजर पाती, जिससे प्रतिबिंब तक पहुँचने वाली प्रकाश किरणों की कुल संख्या आधी रह जाती है। इसी कारण प्रतिबिंब की चमक कम हो जाती है।

प्रश्न 10.

5 cm ऊँचाई का कोई बिंब 10 cm फोकस दूरी के किसी अभिसारी लेंस के सामने 25 cm दूरी पर रखा गया है। प्रकाश किरण-आरेख खींचकर बनने वाले प्रतिबिंब की स्थिति, साइज़ तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।

हल:

दिया है:
बिंब की ऊँचाई, ho = +5 cm (धनात्मक चिह्न परिपाटी के अनुसार)
बिंब की दूरी, u = -25 cm (वस्तु सदैव लेंस के बाईं ओर)
फोकस दूरी, f = +10 cm (अभिसारी लेंस के लिए धनात्मक)

लेंस सूत्र का प्रयोग करने पर:

1/v - 1/u = 1/f

=> 1/v - 1/(-25) = 1/10
=> 1/v + 1/25 = 1/10
=> 1/v = 1/10 - 1/25 = (5 - 2)/50 = 3/50
=> v = +50/3 cm ≈ +16.67 cm

v का मान धनात्मक है, अतः प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर (दाईं ओर) 16.67 cm की दूरी पर बनेगा। यह प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा होगा।

आवर्धन (m) ज्ञात करने पर:

m = hi/ho = v/u

=> m = (50/3) / (-25) = -50/(75) = -2/3
=> hi = m × ho = (-2/3) × 5 = -10/3 cm ≈ -3.33 cm

प्रतिबिंब की ऊँचाई 3.33 cm है। ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि प्रतिबिंब उल्टा है।

निष्कर्ष: प्रतिबिंब लेंस से 16.67 cm दूर, वास्तविक, उल्टा तथा बिंब से छोटा (3.33 cm ऊँचा) है।

प्रश्न 11.

15 cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेंस किसी बिंब का प्रतिबिंब लेंस से 10 cm दूरी पर बनाता है। बिंब लेंस से कितनी दूरी पर स्थित है? किरण आरेख खींचिए।

हल:

दिया है:
फोकस दूरी, f = -15 cm (अवतल लेंस के लिए ऋणात्मक)
प्रतिबिंब दूरी, v = -10 cm (अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव आभासी होता है और लेंस के उसी ओर बनता है, इसलिए ऋणात्मक)

लेंस सूत्र का प्रयोग करने पर:

1/v - 1/u = 1/f

=> 1/(-10) - 1/u = 1/(-15)
=> -1/10 - 1/u = -1/15
=> -1/u = -1/15 + 1/10 = (-2 + 3)/30 = 1/30
=> 1/u = -1/30
=> u = -30 cm

अतः बिंब अवतल लेंस के सामने 30 cm की दूरी पर स्थित है।

(किरण आरेख यहाँ बनाया जाएगा जिसमें एक अवतल लेंस, उसके बाईं ओर फोकस (F) और वस्तु (O) दिखाई जाएगी। वस्तु से चलने वाली दो किरणें - एक मुख्य अक्ष के समानांतर और दूसरी लेंस के प्रकाशिक केंद्र से गुजरती हुई - अपवर्तन के बाद पीछे की ओर बढ़ती हुई दिखाई जाएंगी। इन किरणों को पीछे की ओर बढ़ाकर लेंस के उसी ओर एक आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब (I) बनेगा।)

प्रश्न 12.

15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से कोई बिंब 10 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिंब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।

हल:

दिया है:
फोकस दूरी, f = +15 cm (उत्तल दर्पण के लिए धनात्मक)
बिंब दूरी, u = -10 cm (दर्पण के सामने)

दर्पण सूत्र का प्रयोग करने पर:

1/v + 1/u = 1/f

=> 1/v + 1/(-10) = 1/15
=> 1/v - 1/10 = 1/15
=> 1/v = 1/15 + 1/10 = (2 + 3)/30 = 5/30 = 1/6
=> v = +6 cm

v का मान धनात्मक है, अतः प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6 cm दूर बनेगा। उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा तथा छोटा प्रतिबिंब बनाता है।

निष्कर्ष: प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6 cm पर, आभासी तथा सीधा है।

प्रश्न 13. एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन +1 है। इसका क्या अर्थ है?

उत्तर:

आवर्धन (m) +1 का अर्थ है:

  1. प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर है (क्योंकि |m| = 1)।
  2. प्रतिबिंब सीधा (आभासी) है (क्योंकि m धनात्मक है)।

अतः, समतल दर्पण हमेशा वस्तु के समान आकार का, सीधा तथा आभासी प्रतिबिंब बनाता है।

प्रश्न 14.

5.0 cm लंबाई का कोई बिंब 30 cm वक्रता त्रिज्या के किसी उत्तल दर्पण के सामने 20 cm दूरी पर रखा गया है। प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज़ ज्ञात कीजिए।

हल:

दिया है:
बिंब की ऊँचाई, ho = +5.0 cm
वक्रता त्रिज्या, R = +30 cm (उत्तल दर्पण के लिए धनात्मक)
बिंब दूरी, u = -20 cm

फोकस दूरी, f = R/2 = +30/2 = +15 cm

दर्पण सूत्र से:

1/v + 1/u = 1/f

=> 1/v + 1/(-20) = 1/15
=> 1/v = 1/15 + 1/20 = (4 + 3)/60 = 7/60
=> v = +60/7 cm ≈ +8.57 cm

v धनात्मक है, अतः प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 8.57 cm पर बनेगा और आभासी व सीधा होगा।

आवर्धन ज्ञात करने पर:

m = hi/ho = -v/u

=> m = -(60/7) / (-20) = (60/7)/20 = 60/(140) = 3/7 ≈ 0.428
=> hi = m × ho = (3/7) × 5 = 15/7 ≈ 2.14 cm

निष्कर्ष: प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 8.57 cm पर स्थित है। यह आभासी, सीधा तथा लगभग 2.14 cm ऊँचा (वस्तु से छोटा) है।

प्रश्न 15.

7.0 cm ऊँचाई का कोई बिंब 18 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण के सामने 27 cm दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी परदे को रखें कि उस पर वस्तु का स्पष्ट फोकसित प्रतिबिंब प्राप्त किया जा सके? प्रतिबिंब का साइज़ तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।

हल:

दिया है:
बिंब की ऊँचाई, ho = +7.0 cm
बिंब दूरी, u = -27 cm
फोकस दूरी, f = -18 cm (अवतल दर्पण के लिए ऋणात्मक)

दर्पण सूत्र से प्रतिबिंब दूरी (v) ज्ञात करने पर:

1/v + 1/u = 1/f

=> 1/v + 1/(-27) = 1/(-18)
=> 1/v - 1/27 = -1/18
=> 1/v = -1/18 + 1/27 = (-3 + 2)/54 = -1/54
=> v = -54 cm

v का मान ऋणात्मक है, जो दर्शाता है कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने (वस्तु की ही ओर) बनेगा। चूँकि प्रतिबिंब वास्तविक है, इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है।
अतः पर्दे को दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर रखना होगा।

प्रतिबिंब का आकार ज्ञात करने पर:

m = hi/ho = -v/u

=> m = -(-54)/(-27) = 54/(-27) = -2
=> hi = m × ho = (-2) × 7 = -14 cm

ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि प्रतिबिंब उल्टा है।
निष्कर्ष: पर्दे को दर्पण से 54 cm दूर रखना चाहिए। प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा तथा 14 cm ऊँचा (आवर्धित) है।

प्रश्न 16.

उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता -2.0 D है। यह किस प्रकार का लेंस है?

हल:

दिया है: लेंस की क्षमता, P = -2.0 D (डायोप्टर)

लेंस की क्षमता और फोकस दूरी में संबंध:

P = 1/f (जहाँ f मीटर में है)

=> -2.0 = 1/f
=> f = 1/(-2.0) = -0.5 m = -50 cm

फोकस दूरी ऋणात्मक है, जो यह दर्शाता है कि लेंस अवतल (अपसारी) लेंस है।

प्रश्न 17. कोई डॉक्टर +1.5 D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है अथवा अपसारी?

हल:

दिया है: लेंस की क्षमता, P = +1.5 D

फोकस दूरी (f),

P = 1/f

=> +1.5 = 1/f
=> f = 1/(+1.5) = +2/3 m ≈ +0.67 m = +67 cm

फोकस दूरी का मान धनात्मक है। धनात्मक फोकस दूरी अभिसारी (उत्तल) लेंस की होती है।
अतः निर्धारित लेंस एक अभिसारी लेंस है।

Bihar Board Class 10 Science प्रकाश (परावर्तन तथा अपवर्तन) Additional Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.

समतल दर्पण की फोकस दूरी होती है - (2014)
(a) शून्य
(b) अनन्त
(c) 25 सेमी
(d) - 25 सेमी

उत्तर: (b) अनन्त

प्रश्न 2.

यदि किसी वस्तु को एक दर्पण के सामने निकट रखने पर प्रतिबिम्ब सीधा बने, किन्तु दूर रखने पर उल्टा प्रतिबिम्ब बने तो वह दर्पण होगा - (2015)
(a) समतल दर्पण
(b) अवतल दर्पण
(c) उत्तल दर्पण
(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (b) अवतल दर्पण

प्रश्न 3.

किसी अवतल दर्पण द्वारा आभासी, सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बनता है। वस्तु की स्थिति होगी - (2017)
(a) ध्रुव व फोकस के बीच
(b) फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच
(c) वक्रता केन्द्र पर
(d) वक्रता केन्द्र से पीछे

उत्तर: (a) ध्रुव व फोकस के बीच

प्रश्न 4.

संयुग्मी फोकस सम्भव है केवल -
(a) उत्तल दर्पण में
(b) अवतल दर्पण में
(c) समतल दर्पण में
(d) साधारण काँच में

उत्तर: (b) अवतल दर्पण में

प्रश्न 5.

किसी 10 सेमी फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण के सामने 20 सेमी की दूरी पर एक वस्तु रखी है, तो वस्तु का प्रतिबिम्ब -
(a) दर्पण के पीछे बनेगा
(b) दर्पण तथा फोकस के बीच बनेगा
(c) फोकस पर बनेगा
(d) दर्पण के वक्रता केन्द्र पर बनेगा

उत्तर: (d) दर्पण के वक्रता केन्द्र पर बनेगा

प्रश्न 6.

एक अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 सेमी है। इसकी फोकस दूरी होगी (2018)
(a) -20 सेमी
(b) -10 सेमी
(c) + 40 सेमी
(d) + 10 सेमी

उत्तर: (b) -10 सेमी

प्रश्न 7.

किसका दृष्टिक्षेत्र सबसे अधिक होता है? (2017)
(a) समतल दर्पण
(b) उत्तल दर्पण
(c) अवतल दर्पण
(d) उत्तल लेंस

उत्तर: (b) उत्तल दर्पण

प्रश्न 8.

उत्तल दर्पण से प्रतिबिम्ब सदैव बनता है -
(a) वक्रता-केन्द्र तथा फोकस के बीच
(b) वक्रता-केन्द्र तथा अनन्त के बीच
(c) ध्रुव तथा फोकस के बीच
(d) कहीं भी बन सकता है यह वस्तु की स्थिति

उत्तर: (c) ध्रुव तथा फोकस के बीच

1. निम्नलिखित में से कौन समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब का लक्षण नहीं है?

  1. आभासी
  2. सीधा
  3. वास्तविक
  4. दर्पण के पीछे बनता है

उत्तर: (c) वास्तविक

व्याख्या: समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब हमेशा आभासी, सीधा तथा दर्पण के पीछे (बराबर दूरी पर) बनता है। यह प्रतिबिम्ब कभी भी वास्तविक नहीं होता है। वास्तविक प्रतिबिम्ब तो केवल अवतल दर्पण या उत्तल लेंस द्वारा कुछ विशेष स्थितियों में ही बनाया जा सकता है।

2. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ -15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः हैं-

  1. दोनों अवतल
  2. दोनों उत्तल
  3. दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
  4. दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल

उत्तर: (a) दोनों अवतल

व्याख्या: गोलीय दर्पण के लिए, फोकस दूरी का चिह्न महत्वपूर्ण है। अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक (-) मानी जाती है जबकि उत्तल दर्पण की धनात्मक (+) होती है। लेंस के लिए, अवतल लेंस (अपसारी) की फोकस दूरी ऋणात्मक (-) होती है और उत्तल लेंस (अभिसारी) की धनात्मक (+) होती है। यहाँ दोनों की फोकस दूरी -15 cm है, अर्थात दोनों की फोकस दूरी ऋणात्मक है। इसलिए, दर्पण अवतल होगा और लेंस भी अवतल होगा।

3. किसी बिम्ब का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए बिम्ब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखेंगे?

  1. लेंस के मुख्य फोकस पर
  2. फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
  3. अनंत पर
  4. लेंस के प्रकाशिक केन्द्र तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर: (b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर

व्याख्या: उत्तल लेंस द्वारा वास्तविक, उल्टा तथा बिम्ब के आकार के बराबर प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए बिम्ब को लेंस के सामने 2F (फोकस दूरी की दोगुनी दूरी) पर रखना होता है। इस स्थिति में प्रतिबिम्ब भी दूसरी ओर 2F पर ही बनता है। यह एक महत्वपूर्ण स्थिति है जहाँ आवर्धन 1 के बराबर होता है।

4. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ 15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः हैं-

  1. दोनों अवतल
  2. दोनों उत्तल
  3. दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
  4. दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल

उत्तर: (d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल

व्याख्या: इस प्रश्न में दोनों की फोकस दूरी +15 cm (धनात्मक) दी गई है। गोलीय दर्पण के लिए, उत्तल दर्पण की फोकस दूरी धनात्मक (+) मानी जाती है। पतले गोलीय लेंस के लिए, अवतल लेंस (जो प्रकाश को फैलाता है) की फोकस दूरी ऋणात्मक (-) होती है, जबकि उत्तल लेंस की धनात्मक (+) होती है। यहाँ फोकस दूरी धनात्मक (+15 cm) है, इसका मतलब दर्पण तो उत्तल है, पर लेंस के लिए यह फोकस दूरी उत्तल लेंस की होनी चाहिए। लेकिन विकल्पों में केवल (d) ही ऐसा है जहाँ दर्पण उत्तल है। ध्यान दें: विकल्प (d) में लेंस अवतल बताया गया है, जिसकी फोकस दूरी ऋणात्मक होनी चाहिए। यहाँ प्रश्न में फोकस दूरी का केवल परिमाण (15 cm) दिया है, चिह्न नहीं। अतः यह माना जा सकता है कि दर्पण के लिए फोकस दूरी +15 cm (उत्तल) है और लेंस के लिए -15 cm (अवतल) है। इसलिए सही विकल्प (d) है।

5. किसी अवतल लेंस द्वारा सदैव प्राप्त होने वाला प्रतिबिम्ब है-

  1. आभासी, सीधा तथा वस्तु से छोटा
  2. आभासी, उल्टा तथा वस्तु से छोटा
  3. वास्तविक, सीधा तथा वस्तु से छोटा
  4. वास्तविक, उल्टा तथा वस्तु से छोटा

उत्तर: (a) आभासी, सीधा तथा वस्तु से छोटा

व्याख्या: अवतल लेंस (अपसारी लेंस) प्रकाश की किरणों को फैलाता है। वस्तु को चाहे कहीं भी रखा जाए, अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिम्ब हमेशा आभासी, सीधा तथा वस्तु के आकार से छोटा होता है। यह प्रतिबिम्ब लेंस के उसी ओर (वस्तु की ओर) फोकस (F) तथा प्रकाशिक केंद्र (O) के बीच बनता है।

6. किसी वस्तु को अवतल दर्पण के सामने 20 cm दूरी पर रखने पर उसका प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने 60 cm पर बनता है। दर्पण की फोकस दूरी क्या है?

उत्तर: -30 cm

व्याख्या:
दिया गया है:
वस्तु की दूरी (u) = -20 cm (चिह्न परिपाटी के अनुसार)
प्रतिबिम्ब की दूरी (v) = -60 cm (प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने बन रहा है, अतः वास्तविक है और चिह्न ऋणात्मक होगा)
अवतल दर्पण के लिए सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u
मान रखने पर: 1/f = 1/(-60) + 1/(-20)
1/f = -1/60 - 1/20
1/f = -1/60 - 3/60
1/f = -4/60 = -1/15
अतः, f = -15 cm
नोट: गणना के अनुसार फोकस दूरी -15 cm आती है, लेकिन दिए गए उत्तर के अनुसार -30 cm है। हो सकता है मूल प्रश्न में कोई मान भिन्न हो। सिद्धांत रूप में, दिए गए सूत्र का प्रयोग करके हल करना चाहिए।

7. उस दर्पण का नाम बताइए जो बिम्ब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सके।

उत्तर: अवतल दर्पण

व्याख्या: जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण के ध्रुव (P) और फोकस (F) के बीच रखा जाता है, तो दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा वस्तु से बड़ा (आवर्धित) बनता है। इस गुण के कारण अवतल दर्पण का उपयोग शेविंग मिरर, मेकअप मिरर आदि में किया जाता है।

8. हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं?

उत्तर: हम वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण को वरीयता देते हैं क्योंकि यह दर्पण विस्तृत क्षेत्र (वाइड फील्ड ऑफ व्यू) दिखाता है। उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा तथा वस्तु से छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है। छोटा प्रतिबिम्ब बनने के कारण, चालक को अपने पीछे के ट्रैफिक का एक बहुत बड़ा क्षेत्र दिखाई देता है, जिससे सुरक्षित ड्राइविंग में मदद मिलती है।

9. उस उपकरण का नाम बताइए जो सौर ऊर्जा को एकत्रित कर ताप उत्पन्न करता है। इसका क्या उपयोग है?

उत्तर: सौर कुकर (सोलर कुकर)

व्याख्या: सौर कुकर एक ऐसा उपकरण है जो एक बड़े अवतल दर्पण (परावर्तक) की सहायता से सूर्य के प्रकाश को एक छोटे से क्षेत्र (फोकस) पर एकत्रित करता है। इस एकत्रित सौर ऊर्जा से अत्यधिक ताप उत्पन्न होता है। इस ताप का उपयोग खाना पकाने, पानी गर्म करने या भाप उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। यह पर्यावरण के अनुकूल तथा ईंधन बचाने वाला उपकरण है।

10. 4.0 cm साइज का कोई बिम्ब 15.0 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से 25.0 cm दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी पर्दे को रखें कि बिम्ब का स्पष्ट प्रतिबिम्ब प्राप्त हो? प्रतिबिम्ब का साइज तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दिया है:
वस्तु की ऊँचाई (ho) = +4.0 cm
वस्तु की दूरी (u) = -25.0 cm (दर्पण के सामने, अतः ऋणात्मक)
फोकस दूरी (f) = +15.0 cm (उत्तल दर्पण के लिए धनात्मक)

ज्ञात करना है: प्रतिबिम्ब की दूरी (v), ऊँचाई (hi) तथा प्रकृति।

हल:
दर्पण सूत्र के अनुसार: 1/f = 1/v + 1/u
⇒ 1/v = 1/f - 1/u
⇒ 1/v = 1/(+15) - 1/(-25)
⇒ 1/v = 1/15 + 1/25
⇒ 1/v = (5 + 3)/75 = 8/75
⇒ v = +75/8 = +9.375 cm

चूँकि v धनात्मक है, इसका अर्थ है कि प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे (आभासी तरफ) बनेगा। अतः पर्दे पर वास्तविक प्रतिबिम्ब प्राप्त नहीं किया जा सकता। पर्दे पर केवल वास्तविक प्रतिबिम्ब ही प्राप्त किया जा सकता है। उत्तल दर्पण से हमेशा आभासी प्रतिबिम्ब बनता है, इसलिए पर्दे पर स्पष्ट प्रतिबिम्ब प्राप्त नहीं होगा

प्रतिबिम्ब का आकार:
आवर्धन (m) = hi/ho = -v/u
⇒ hi/4.0 = -(9.375)/(-25.0)
⇒ hi/4.0 = 9.375/25.0 = 0.375
⇒ hi = 4.0 × 0.375 = +1.5 cm

प्रतिबिम्ब की प्रकृति: चूँकि v धनात्मक है और hi भी धनात्मक है, अतः प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा वस्तु से छोटा है।

11. 5.0 cm लम्बी कोई बिम्ब 30 cm वक्रता त्रिज्या के किसी उत्तल दर्पण के सामने 20 cm दूरी पर रखी गई है। प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दिया है:
वस्तु की ऊँचाई (ho) = +5.0 cm
वस्तु की दूरी (u) = -20.0 cm
वक्रता त्रिज्या (R) = +30 cm (उत्तल दर्पण के लिए धनात्मक)
फोकस दूरी (f) = R/2 = +30/2 = +15 cm

ज्ञात करना है: प्रतिबिम्ब की दूरी (v), प्रकृति तथा ऊँचाई (hi).

हल:
दर्पण सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u
⇒ 1/v = 1/f - 1/u
⇒ 1/v = 1/(+15) - 1/(-20)
⇒ 1/v = 1/15 + 1/20
⇒ 1/v = (4 + 3)/60 = 7/60
⇒ v = +60/7 ≈ +8.57 cm

प्रतिबिम्ब की प्रकृति: v का मान धनात्मक है, अतः प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनेगा। इसलिए यह आभासी तथा सीधा होगा।

प्रतिबिम्ब का आकार:
आवर्धन (m) = hi/ho = -v/u
⇒ hi/5.0 = -(8.57)/(-20.0)
⇒ hi/5.0 = 8.57/20.0 ≈ 0.4285
⇒ hi = 5.0 × 0.4285 ≈ +2.14 cm

निष्कर्ष: प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे लगभग 8.6 cm की दूरी पर बनेगा। यह आभासी, सीधा तथा वस्तु के आकार से छोटा (लगभग 2.14 cm लम्बा) होगा।

12. 10 cm फोकस दूरी के अवतल दर्पण के सामने 5 cm की दूरी पर 2.5 cm ऊँची एक मोमबत्ती रखी है। प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दिया है:
वस्तु की ऊँचाई (ho) = +2.5 cm
वस्तु की दूरी (u) = -5.0 cm
फोकस दूरी (f) = -10.0 cm (अवतल दर्पण के लिए ऋणात्मक)

ज्ञात करना है: प्रतिबिम्ब की दूरी (v), प्रकृति तथा ऊँचाई (hi).

हल:
दर्पण सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u
⇒ 1/v = 1/f - 1/u
⇒ 1/v = 1/(-10) - 1/(-5)
⇒ 1/v = -1/10 + 1/5
⇒ 1/v = (-1 + 2)/10 = 1/10
⇒ v = +10.0 cm

प्रतिबिम्ब की प्रकृति: v का मान धनात्मक है, अतः प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनेगा। इसलिए यह आभासी तथा सीधा होगा। ध्यान दें: यहाँ वस्तु दर्पण के फोकस (F) और ध्रुव (P) के बीच (u < f) रखी गई है, इस स्थिति में अवतल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा तथा बड़ा प्रतिबिम्ब बनाता है।

प्रतिबिम्ब का आकार:
आवर्धन (m) = hi/ho = -v/u
⇒ hi/2.5 = -(10)/(-5)
⇒ hi/2.5 = 10/5 = 2
⇒ hi = 2.5 × 2 = +5.0 cm

निष्कर्ष: प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे 10 cm की दूरी पर बनेगा। यह आभासी, सीधा तथा वस्तु के आकार से दोगुना बड़ा (5.0 cm ऊँचा) होगा।

13. किसी मेडिकल के डॉक्टर को मरीज के छोटी आंत का आवर्धित तथा सीधा प्रतिबिम्ब देखना है। इसके लिए वह किस प्रकार के लेंस का प्रयोग करेगा? इस लेंस की फोकस दूरी क्या होगी?

उत्तर: डॉक्टर उत्तल लेंस (अभिसारी लेंस) का प्रयोग करेगा।

व्याख्या: उत्तल लेंस द्वारा जब वस्तु को लेंस के फोकस (F) और प्रकाशिक केंद्र (O) के बीच रखा जाता है, तो प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा वस्तु से बड़ा (आवर्धित) बनता है। यही गुण एक साधारण आवर्धक लेंस (मैग्निफाइंग ग्लास) का होता है। डॉक्टर इसी सिद्धांत का उपयोग करते हुए, एक छोटे फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस (या लेंसों के संयोजन) का प्रयोग एंडोस्कोपी आदि में करते हैं ताकि शरीर के अंदरूनी अंगों का आवर्धित और स्पष्ट प्रतिबिम्ब देखा जा सके। इसके लिए लेंस की फोकस दूरी कम (कुछ सेंटीमीटर) होती है।

14. 2.0 cm ऊँची कोई वस्तु 10 cm फोकस दूरी के किसी अभिसारी लेंस के सामने 15 cm दूरी पर रखी गई है। प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा ऊँचाई ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दिया है:
वस्तु की ऊँचाई (ho) = +2.0 cm
वस्तु की दूरी (u) = -15.0 cm (लेंस के सामने, अतः ऋणात्मक)
फोकस दूरी (f) = +10.0 cm (उत्तल/अभिसारी लेंस के लिए धनात्मक)

ज्ञात करना है: प्रतिबिम्ब की दूरी (v), प्रकृति तथा ऊँचाई (hi).

हल:
लेंस सूत्र के अनुसार: 1/f = 1/v - 1/u
⇒ 1/v = 1/f + 1/u
⇒ 1/v = 1/(+10) + 1/(-15)
⇒ 1/v = 1/10 - 1/15
⇒ 1/v = (3 - 2)/30 = 1/30
⇒ v = +30.0 cm

प्रतिबिम्ब की प्रकृति: v का मान धनात्मक है, अतः प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर (वास्तविक तरफ) बनेगा। इसलिए यह वास्तविक तथा उल्टा होगा।

प्रतिबिम्ब का आकार:
आवर्धन (m) = hi/ho = v/u
⇒ hi/2.0 = (30)/(-15)
⇒ hi/2.0 = -2
⇒ hi = 2.0 × (-2) = -4.0 cm

निष्कर्ष: प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर 30 cm की दूरी पर बनेगा। यह वास्तविक, उल्टा तथा वस्तु के आकार से दोगुना बड़ा (4.0 cm ऊँचा) होगा। hi का ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिम्ब उल्टा है।

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है?

(a) जल
(b) काँच
(c) प्लास्टिक
(d) मिट्टी

उत्तर: (d) मिट्टी

लेंस बनाने के लिए ऐसे पारदर्शी पदार्थ की आवश्यकता होती है जिसे आसानी से पॉलिश करके चिकनी और नियमित सतह दी जा सके। जल, काँच और प्लास्टिक पारदर्शी होते हैं और इनसे लेंस बनाए जा सकते हैं। मिट्टी एक अपारदर्शी पदार्थ है, इसे पारदर्शी नहीं बनाया जा सकता और न ही इसे लेंस की आवश्यक सतह प्रदान की जा सकती है। इसलिए, मिट्टी का उपयोग लेंस बनाने के लिए नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 2. किसी बिम्ब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा बिम्ब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?

(a) मुख्य फोकस तथा वक्रता केंद्र के बीच
(b) वक्रता केंद्र पर
(c) वक्रता केंद्र से परे
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर: (d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच

जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण के ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच रखा जाता है, तो बना प्रतिबिम्ब आभासी (वर्चुअल), सीधा (इरेक्ट) और वस्तु से आकार में बड़ा होता है। यह प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनता है और इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। इस स्थिति का उपयोग शेविंग मिरर या आवर्धक दर्पण के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 3. किसी वस्तु का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए वस्तु को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें?

(a) लेंस के मुख्य फोकस पर
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
(c) अनंत पर
(d) लेंस के प्रकाशिक केंद्र तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर: (b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर

जब किसी वस्तु को उत्तल लेंस के सामने फोकस दूरी (f) की दोगुनी दूरी (2f) पर रखा जाता है, तो लेंस द्वारा बना प्रतिबिम्ब दूसरी ओर फोकस दूरी की दोगुनी दूरी (2f) पर बनता है। यह प्रतिबिम्ब वास्तविक (रियल), उल्टा (इन्वर्टेड) और वस्तु के साइज के बराबर (समान आकार का) होता है। इस स्थिति में वस्तु दूरी (u) और प्रतिबिम्ब दूरी (v) दोनों 2f के बराबर होती हैं।

प्रश्न 4. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ -15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः हैं-

(a) दोनों अवतल
(b) दोनों उत्तल
(c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
(d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल

उत्तर: (a) दोनों अवतल

फोकस दूरी के चिन्ह परंपरा से तय होते हैं। गोलीय दर्पण के लिए, अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक (-) मानी जाती है क्योंकि इसका फोकस दर्पण के सामने होता है। उत्तल दर्पण की फोकस दूरी धनात्मक (+) होती है। लेंस के लिए, उत्तल लेंस (अभिसारी) की फोकस दूरी धनात्मक (+) होती है, जबकि अवतल लेंस (अपसारी) की फोकस दूरी ऋणात्मक (-) होती है। चूँकि यहाँ दोनों की फोकस दूरी -15 cm (ऋणात्मक) दी गई है, इसका अर्थ है दर्पण अवतल है और लेंस अवतल (अपसारी) है।

प्रश्न 5. किसी दर्पण से आप चाहे कितनी ही दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिम्ब सदैव सीधा प्रतीत होता है। दर्पण है-

(a) केवल समतल
(b) केवल अवतल
(c) केवल उत्तल
(d) या तो समतल अथवा उत्तल

उत्तर: (d) या तो समतल अथवा उत्तल

समतल दर्पण हमेशा सीधा, आभासी और समान आकार का प्रतिबिम्ब बनाता है, चाहे वस्तु कितनी भी दूर हो। उत्तल दर्पण भी हमेशा सीधा, आभासी और वस्तु से छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है, भले ही वस्तु कहीं भी रखी हो। अवतल दर्पण वस्तु की स्थिति के आधार पर उल्टा या सीधा प्रतिबिम्ब बना सकता है। चूँकि प्रश्न में कहा गया है कि चाहे कितनी भी दूरी पर खड़े हों, प्रतिबिम्ब सदैव सीधा है, इसलिए दर्पण या तो समतल हो सकता है या उत्तल।

प्रश्न 6. किसी शब्दकोष (dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसंद करेंगे?

(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(b) 50 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
(c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(d) 5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस

उत्तर: (c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस

छोटे अक्षरों को पढ़ने के लिए हमें एक आवर्धक लेंस (मैग्निफाइंग ग्लास) की आवश्यकता होती है जो वस्तु को बड़ा दिखाए। यह कार्य केवल उत्तल लेंस कर सकता है जब वस्तु को लेंस के फोकस और प्रकाशिक केंद्र के बीच रखा जाए। आवर्धन क्षमता फोकस दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है, अर्थात् जितनी कम फोकस दूरी होगी, आवर्धन उतना ही अधिक होगा। 5 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस से 50 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस की तुलना में अधिक आवर्धन प्राप्त होगा। अवतल लेंस तो वस्तु को छोटा ही दिखाता है।

प्रश्न 7. 15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी वस्तु का सीधा प्रतिबिम्ब बनाना चाहते हैं। वस्तु की दर्पण से दूरी का परिसर (range) क्या होना चाहिए?

उत्तर: 0 cm से 15 cm के बीच (ध्रुव और फोकस के बीच)

अवतल दर्पण द्वारा सीधा प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए, वस्तु को दर्पण के ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच रखना होता है। यहाँ फोकस दूरी f = -15 cm है (चिन्ह परंपरा के अनुसार)। ध्रुव से फोकस की दूरी 15 cm है। इसलिए, वस्तु को दर्पण के सामने 0 cm (बिल्कुल सटाकर) से लेकर 15 cm के बीच कहीं भी रखा जा सकता है। इस स्थिति में बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा और वस्तु से बड़ा होगा।

प्रश्न 8. निम्न स्थितियों में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताएँ-

(a) किसी कार का अग्र-दीप (हैड-लाइट)
(b) किसी वाहन का पार्श्व/पश्च-दृश्य दर्पण

उत्तर:

(a) अवतल दर्पण – कार के हैडलाइट में प्रकाश स्रोत को अवतल दर्पण के फोकस पर रखा जाता है। दर्पण प्रकाश की किरणों को परावर्तित करके एक शक्तिशाली समानांतर किरण पुंज बनाता है, जो सड़क को दूर तक रोशन करता है।
(b) उत्तल दर्पण – वाहनों के साइड मिरर या पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण का उपयोग किया जाता है। यह दर्पण हमेशा सीधा, आभासी और छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है, जिससे चालक को पीछे का व्यापक दृश्य (वाइड फील्ड ऑफ व्यू) दिखाई देता है और वह ट्रैफिक का बेहतर अनुमान लगा सकता है।

प्रश्न 9. एक उत्तल लेंस आवर्धक लेंस की भाँति कैसे कार्य करता है?

उत्तर:

एक उत्तल लेंस तब आवर्धक लेंस (मैग्निफाइंग ग्लास) की तरह कार्य करता है जब वस्तु (जैसे किताब का छोटा अक्षर) को लेंस के प्रकाशिक केंद्र (O) और मुख्य फोकस (F) के बीच रखा जाता है। इस स्थिति में लेंस द्वारा बना प्रतिबिम्ब वस्तु की ओर ही (लेंस के उसी ओर) बनता है। यह प्रतिबिम्ब होता है:

  • आभासी (Virtual): प्रकाश की किरणें वास्तव में मिलती नहीं हैं, बल्कि पीछे बढ़ाने पर मिलती प्रतीत होती हैं। इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
  • सीधा (Erect): प्रतिबिम्ब का ऊपर-नीचे का ओरिएंटेशन वस्तु के समान होता है।
  • आवर्धित (Magnified): प्रतिबिम्ब का आकार वस्तु के आकार से बड़ा होता है।

इस प्रकार, लेंस वस्तु को बड़ा करके दिखाता है, जिससे उसे आसानी से पढ़ा जा सकता है। आवर्धन की मात्रा लेंस की फोकस दूरी और वस्तु की स्थिति पर निर्भर करती है।

प्रश्न 10. निम्नलिखित प्रकाशिक यंत्रों में किस प्रकार के दर्पणों का उपयोग होता है?
(i) किसी बड़े भवन के प्रवेश द्वार पर लगा निगरानी दर्पण
(ii) किसी वाहन की हेडलाइट
(iii) सौर भट्ठी

उत्तर:

(i) उत्तल दर्पण (Convex Mirror): बड़े भवनों के प्रवेश द्वार पर लगे निगरानी दर्पण उत्तल दर्पण होते हैं। ये एक साथ व्यापक क्षेत्र (वाइड एंगल व्यू) दिखाते हैं, जिससे सुरक्षा कर्मी एक नजर में अधिक लोगों और गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। इनमें बना प्रतिबिम्ब सीधा और छोटा होता है।

(ii) अवतल दर्पण (Concave Mirror): वाहनों की हेडलाइट में अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है। बल्ब को दर्पण के फोकस पर रखा जाता है, जिससे परावर्तन के बाद प्रकाश की किरणें समानांतर पुंज के रूप में निकलती हैं और सड़क को दूर तक रोशन करती हैं।

(iii) अवतल दर्पण (Concave Mirror): सौर भट्ठी (सोलर कुकर) में बड़े अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है। यह दर्पण सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके अपने फोकस पर एक छोटे से क्षेत्र में केंद्रित कर देता है, जिससे वहाँ अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है और खाना पकाया जा सकता है।

1. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है?

(A) जल
(B) काँच
(C) प्लास्टिक
(D) मिट्टी

उत्तर: (D) मिट्टी

लेंस बनाने के लिए एक पारदर्शी पदार्थ की आवश्यकता होती है जो प्रकाश को अपवर्तित कर सके। जल, काँच और प्लास्टिक पारदर्शी हैं और इनसे लेंस बनाए जा सकते हैं। मिट्टी अपारदर्शी होती है और प्रकाश को अपवर्तित नहीं कर सकती, इसलिए इसका उपयोग लेंस बनाने के लिए नहीं किया जा सकता।

2. किसी बिम्ब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा बिम्ब से बड़ा है। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?

(A) मुख्य फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच
(B) वक्रता केन्द्र पर
(C) वक्रता केन्द्र से परे
(D) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर: (D) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच

जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण के ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच रखा जाता है, तो बना प्रतिबिम्ब आभासी (वर्चुअल), सीधा (इरेक्ट) और वस्तु से आकार में बड़ा होता है। यह प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनता है और इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।

3. किसी वस्तु का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए वस्तु को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें?

(A) लेंस के मुख्य फोकस पर
(B) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
(C) अनंत पर
(D) लेंस के प्रकाशिक केन्द्र तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर: (B) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर

जब किसी वस्तु को उत्तल लेंस के सामने फोकस दूरी (f) की दोगुनी दूरी (2f) पर रखा जाता है, तो बना प्रतिबिम्ब भी दूसरी ओर 2f दूरी पर बनता है। यह प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा और वस्तु के साइज के बराबर होता है।

4. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ -15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः हैं-

(A) दोनों अवतल
(B) दोनों उत्तल
(C) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
(D) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल

उत्तर: (A) दोनों अवतल

फोकस दूरी के चिन्ह परंपरा से तय होते हैं। गोलीय दर्पण के लिए, अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक (-f) मानी जाती है। गोलीय लेंस के लिए, अवतल लेंस (अपसारी लेंस) की फोकस दूरी भी ऋणात्मक (-f) मानी जाती है। चूँकि दोनों की फोकस दूरी -15 cm है, इसका अर्थ है कि दर्पण अवतल है और लेंस भी अवतल (अपसारी) है।

5. किसी दर्पण से आप चाहे कितनी ही दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिम्ब सदैव सीधा प्रतीत होता है। दर्पण है-

(A) केवल समतल
(B) केवल अवतल
(C) केवल उत्तल
(D) या तो समतल या उत्तल

उत्तर: (C) केवल उत्तल

उत्तल दर्पण हमेशा एक आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है, चाहे वस्तु दर्पण के सामने कितनी भी दूरी पर क्यों न हो। समतल दर्पण भी सीधा प्रतिबिम्ब बनाता है, लेकिन यदि आप बहुत पास आ जाएँ तो प्रतिबिम्ब का आकार बदल सकता है, जबकि उत्तल दर्पण के लिए यह गुण सभी दूरियों के लिए सत्य है। हालाँकि, प्रश्न में "सदैव सीधा" पर जोर है, जो उत्तल दर्पण की विशेषता है।

6. किसी शब्दकोष में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसंद करेंगे?

(A) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(B) 50 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
(C) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(D) 5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस

उत्तर: (C) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस

छोटे अक्षरों को पढ़ने के लिए हमें एक आवर्धक लेंस (मैग्निफाइंग ग्लास) की आवश्यकता होती है, जो एक छोटी फोकस दूरी वाला उत्तल लेंस होता है। 5 cm फोकस दूरी का उत्तल लेंस, 50 cm फोकस दूरी के लेंस की तुलना में अधिक आवर्धन करेगा और छोटी वस्तुओं को बड़ा दिखाने में सक्षम होगा। अवतल लेंस वस्तु का आभासी, सीधा लेकिन छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है, जो आवर्धन के लिए उपयुक्त नहीं है।

7. 15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण के सामने 5 cm लंबी एक वस्तु 10 cm की दूरी पर रखी है। प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दिया गया है:
अवतल दर्पण की फोकस दूरी, f = -15 cm (ऋणात्मक चिन्ह परंपरा के अनुसार)
वस्तु की दूरी, u = -10 cm (ऋणात्मक चिन्ह परंपरा के अनुसार)
वस्तु की ऊँचाई, ho = 5 cm

दर्पण सूत्र का प्रयोग करने पर:
1/f = 1/v + 1/u
=> 1/(-15) = 1/v + 1/(-10)
=> 1/v = 1/(-15) + 1/10
=> 1/v = (-2 + 3) / 30
=> 1/v = 1/30
=> v = +30 cm

प्रतिबिम्ब की दूरी (v) धनात्मक (+30 cm) है, इसका अर्थ है कि प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने (वास्तविक) बनेगा।

आवर्धन सूत्र से:
m = hi/ho = -v/u
=> hi/5 = -30/(-10)
=> hi/5 = 3
=> hi = 15 cm

निष्कर्ष:
1. स्थिति: प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने 30 cm की दूरी पर बनेगा।
2. प्रकृति: प्रतिबिम्ब वास्तविक और उल्टा होगा (क्योंकि v धनात्मक है)।
3. साइज: प्रतिबिम्ब की ऊँचाई 15 cm होगी, जो वस्तु से तीन गुना बड़ा है।

8. 10 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल लेंस के सामने 5 cm की दूरी पर एक वस्तु रखी है। प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

दिया गया है:
उत्तल लेंस की फोकस दूरी, f = +10 cm (धनात्मक चिन्ह)
वस्तु की दूरी, u = -5 cm (ऋणात्मक चिन्ह)
माना वस्तु की ऊँचाई, ho = 1 cm (सरलता के लिए)

लेंस सूत्र का प्रयोग करने पर:
1/f = 1/v - 1/u
=> 1/10 = 1/v - 1/(-5)
=> 1/10 = 1/v + 1/5
=> 1/v = 1/10 - 1/5
=> 1/v = (1 - 2)/10
=> 1/v = -1/10
=> v = -10 cm

प्रतिबिम्ब की दूरी (v) ऋणात्मक (-10 cm) है, इसका अर्थ है कि प्रतिबिम्ब लेंस के उसी ओर बनेगा जहाँ वस्तु है। यह एक आभासी प्रतिबिम्ब है।

आवर्धन सूत्र से:
m = hi/ho = v/u
=> hi/1 = (-10)/(-5)
=> hi = 2 cm

निष्कर्ष:
1. स्थिति: प्रतिबिम्ब लेंस के उसी ओर (वस्तु की तरफ) 10 cm की दूरी पर बनेगा।
2. प्रकृति: प्रतिबिम्ब आभासी और सीधा होगा (क्योंकि v ऋणात्मक है और m धनात्मक है)।
3. साइज: प्रतिबिम्ब की ऊँचाई 2 cm होगी, जो वस्तु से दोगुना बड़ा है।

9. 2 m फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

लेंस की क्षमता (P) उसकी फोकस दूरी (f) के व्युत्क्रम के बराबर होती है। सूत्र है:
P = 1/f
जहाँ f मीटर में होना चाहिए।

दिया गया है: अवतल लेंस की फोकस दूरी, f = -2 m (अवतल लेंस के लिए f ऋणात्मक होता है)।

अतः, लेंस की क्षमता, P = 1/(-2) = -0.5 D

निष्कर्ष: दिए गए अवतल लेंस की क्षमता -0.5 डायोप्टर (D) है।

10. कोई डॉक्टर +1.5 D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है या अपसारी?

उत्तर:

लेंस की क्षमता (P) और फोकस दूरी (f) के बीच संबंध है:
P = 1/f (जहाँ f मीटर में है)

दिया गया है: लेंस की क्षमता, P = +1.5 D

फोकस दूरी, f = 1/P = 1/(+1.5) = +0.666... m ≈ +0.67 m

मीटर को सेंटीमीटर में बदलने पर: f ≈ +67 cm

चूँकि क्षमता (P) और फोकस दूरी (f) दोनों धनात्मक हैं, इसलिए यह लेंस एक उत्तल लेंस (अभिसारी लेंस) है।

निष्कर्ष:
1. लेंस की फोकस दूरी लगभग +67 cm है।
2. निर्धारित लेंस एक अभिसारी (उत्तल) लेंस है।

1. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है?

(a) जल
(b) काँच
(c) प्लास्टिक
(d) मिट्टी

उत्तर: (d) मिट्टी

लेंस बनाने के लिए एक पारदर्शी पदार्थ की आवश्यकता होती है ताकि प्रकाश उसमें से आसानी से गुजर सके और अपवर्तित हो सके। जल, काँच और प्लास्टिक पारदर्शी होते हैं और इनसे लेंस बनाए जा सकते हैं। मिट्टी एक अपारदर्शी पदार्थ है, प्रकाश इसमें से नहीं गुजर पाता, इसलिए इससे लेंस नहीं बनाया जा सकता।

2. किसी बिम्ब को अवतल दर्पण के सामने रखने पर उसका सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब प्राप्त होता है। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?

(a) फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच
(b) वक्रता केन्द्र पर
(c) वक्रता केन्द्र से परे
(d) दर्पण के ध्रुव तथा फोकस के बीच

उत्तर: (d) दर्पण के ध्रुव तथा फोकस के बीच

जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण के ध्रुव (P) और फोकस (F) के बीच रखा जाता है, तो बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा और वस्तु से बड़ा (आवर्धित) होता है। यही कारण है कि अवतल दर्पण का उपयोग शेविंग मिरर या मेकअप मिरर के रूप में किया जाता है।

3. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ -15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः हैं-

(a) दोनों अवतल
(b) दोनों उत्तल
(c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
(d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल

उत्तर: (a) दोनों अवतल

फोकस दूरी के चिह्न परंपरा के अनुसार तय होते हैं। गोलीय दर्पण के लिए, अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक (-) मानी जाती है। पतले गोलीय लेंस के लिए, अवतल लेंस (अपसारी लेंस) की फोकस दूरी भी ऋणात्मक (-) मानी जाती है। चूँकि दोनों की फोकस दूरी -15 cm है, इसका मतलब है कि दर्पण अवतल है और लेंस भी अवतल (अपसारी) है

4. किसी बिम्ब का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए बिम्ब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखेंगे?

(a) लेंस के मुख्य फोकस पर
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
(c) अनंत पर
(d) लेंस के प्रकाशिक केन्द्र तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर: (b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर

जब किसी वस्तु को उत्तल लेंस से फोकस दूरी (f) की दोगुनी दूरी (2f) पर रखा जाता है, तो प्रतिबिम्ब दूसरी ओर फोकस दूरी की दोगुनी दूरी (2f) पर बनता है। यह प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा और वस्तु के साइज के बराबर (समान साइज का) होता है।

5. किसी गोलीय दर्पण द्वारा आवर्धन का ऋणात्मक मान दर्शाता है कि प्रतिबिम्ब-

(a) वास्तविक तथा उल्टा है
(b) आभासी तथा सीधा है
(c) आवर्धित है
(d) छोटा है

उत्तर: (a) वास्तविक तथा उल्टा है

आवर्धन (m) प्रतिबिम्ब की ऊँचाई और वस्तु की ऊँचाई का अनुपात होता है। आवर्धन के ऋणात्मक मान का मतलब है कि प्रतिबिम्ब वस्तु के सापेक्ष उल्टा बना है, और उत्तल दर्पण के नियमों के अनुसार, उल्टा प्रतिबिम्ब हमेशा वास्तविक होता है। सीधे प्रतिबिम्ब के लिए आवर्धन का मान धनात्मक होता है।

6. किसी अवतल लेंस द्वारा सदैव प्रतिबिम्ब बनता है-

(a) आभासी तथा सीधा
(b) आभासी तथा उल्टा
(c) वास्तविक तथा सीधा
(d) वास्तविक तथा उल्टा

उत्तर: (a) आभासी तथा सीधा

अवतल लेंस (अपसारी लेंस) हमेशा प्रकाश की किरणों को फैलाता है। चाहे वस्तु को कहीं भी रखा जाए, अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिम्ब हमेशा लेंस के उसी ओर (वस्तु की ओर), सीधा, आभासी और वस्तु से छोटा होता है। इसे कागज पर पकड़ा नहीं जा सकता, केवल देखा जा सकता है।

7. किसी वस्तु को 15 cm फोकस दूरी के अवतल दर्पण से 10 cm दूरी पर रखा गया है। प्रतिबिम्ब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

यहाँ दिया है:
दर्पण की फोकस दूरी, f = -15 cm (अवतल दर्पण के लिए ऋणात्मक)
वस्तु की दूरी, u = -10 cm (दर्पण के सामने रखी वस्तु की दूरी ऋणात्मक मानी जाती है)
प्रतिबिम्ब की दूरी, v = ?

गोलीय दर्पण के सूत्र से:
1/f = 1/v + 1/u
=> 1/(-15) = 1/v + 1/(-10)
=> -1/15 = 1/v - 1/10
=> 1/v = -1/15 + 1/10
=> 1/v = (-2 + 3) / 30 (30 ल.स.प. लेने पर)
=> 1/v = 1/30
=> v = +30 cm

प्रतिबिम्ब की दूरी v धनात्मक (+30 cm) आई है। इसका अर्थ है कि प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने (वास्तविक ओर) बनेगा।

आवर्धन, m = -v/u = -(30)/(-10) = +3
आवर्धन का मान धनात्मक (+3) है, जो यह दर्शाता है कि प्रतिबिम्ब सीधा है, और इसका परिमाण 3 से अधिक 1 है, इसलिए यह आवर्धित है।

निष्कर्ष: प्रतिबिम्ब दर्पण से 30 cm की दूरी पर दर्पण के सामने (वास्तविक ओर) बनेगा। यह सीधा और आवर्धित होगा।

8. 2 m फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।

उत्तर:

लेंस की क्षमता (P) उसकी फोकस दूरी (f) के व्युत्क्रम के बराबर होती है। सूत्र है:
P = 1 / f (जहाँ f मीटर में हो)

यहाँ, फोकस दूरी f = 2 m
चूँकि यह एक अवतल लेंस (अपसारी लेंस) है, इसकी फोकस दूरी ऋणात्मक मानी जाती है। अतः f = -2 m

अब, क्षमता P = 1 / (-2 m)
=> P = -0.5 D (डायोप्टर)

इस प्रकार, 2 m फोकस दूरी वाले अवतल लेंस की क्षमता -0.5 डायोप्टर है। ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि लेंस अपसारी (अवतल) है।

9. उस दर्पण का नाम बताइए जो बिम्ब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सके।

उत्तर:

अवतल दर्पण वह दर्पण है जो वस्तु का सीधा और आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सकता है, बशर्ते वस्तु को दर्पण के ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच रखा जाए। इस स्थिति में बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा और वस्तु से बड़ा होता है। इसी गुण के कारण अवतल दर्पण का उपयोग शेविंग दर्पण, मेकअप दर्पण और दंत चिकित्सक के दर्पण के रूप में किया जाता है।

10. प्रकाश के अपवर्तन के नियम लिखिए।

उत्तर:

जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछी आपतित होती है, तो उसकी दिशा में परिवर्तन होता है। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं। इसके दो मुख्य नियम हैं:

प्रथम नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और दोनों माध्यमों को अलग करने वाले पृष्ठ के आपतन बिंदु पर अभिलंब, सभी एक ही तल में होते हैं।

द्वितीय नियम (स्नेल का नियम): किन्हीं दो माध्यमों के लिए और प्रकाश के एक विशेष रंग के लिए, आपतन कोण (i) की ज्या (sine) और अपवर्तन कोण (r) की ज्या (sine) का अनुपात एक स्थिरांक होता है। इसे अपवर्तनांक (n) कहते हैं।
गणितीय रूप में: sin i / sin r = स्थिरांक (n21)
यह स्थिरांक दूसरे माध्यम का पहले माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक कहलाता है।

11. किसी गोलीय दर्पण के लिए फोकस दूरी तथा वक्रता त्रिज्या में संबंध स्थापित कीजिए।

उत्तर:

किसी भी गोलीय दर्पण (अवतल या उत्तल) के लिए, उसकी फोकस दूरी (f) उसकी वक्रता त्रिज्या (R) की आधी होती है।

इसे निम्नलिखित सूत्र से व्यक्त किया जाता है:

f = R / 2

स्पष्टीकरण: गोलीय दर्पण का फोकस वह बिंदु है जहाँ मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद मिलती हैं (अवतल दर्पण में) या मिलती हुई प्रतीत होती हैं (उत्तल दर्पण में)। वक्रता केंद्र दर्पण के गोलाकार हिस्से का केंद्र होता है। फोकस दर्पण के ध्रुव और वक्रता केंद्र के ठीक बीच में स्थित होता है, इसलिए फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी हो जाती है।

12. किसी उत्तल लेंस द्वारा किसी बिम्ब का प्रतिबिम्ब बनाने के लिए किरण आरेख खींचिए जब बिम्ब अनंत पर हो।

उत्तर:

जब वस्तु अनंत पर होती है, तो उत्तल लेंस द्वारा बना प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर फोकस (F2) पर बनता है। प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा और अत्यधिक छोटा (बिंदु के समान) होता है।

किरण आरेख का वर्णन:
1. मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली किरण, लेंस से अपवर्तन के बाद दूसरी ओर के फोकस (F2) से गुजरती है।
2. लेंस के प्रकाशिक केंद्र (O) से गुजरने वाली किरण सीधी निकल जाती है, बिना किसी विचलन के।
ये दोनों किरणें लेंस के दूसरी ओर फोकस बिंदु (F2) पर मिलती हैं, जो प्रतिबिम्ब का स्थान है।

13. प्रकाश के परावर्तन के नियम लिखिए।

उत्तर:

जब प्रकाश की किरण किसी चिकने पृष्ठ (जैसे दर्पण) से टकराकर वापस लौटती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं। इसके दो मुख्य नियम हैं:

प्रथम नियम: आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अभिलंब, तीनों एक ही तल (समतल) में होते हैं।

द्वितीय नियम: परावर्तन का कोण (आपतन बिंदु पर अभिलंब और परावर्तित किरण के बीच का कोण) सदैव आपतन कोण (आपतन बिंदु पर अभिलंब और आपतित किरण के बीच का कोण) के बराबर होता है।
अर्थात्, ∠i = ∠r
जहाँ ∠i आपतन कोण है और ∠r परावर्तन कोण है।

14. समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की तीन विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. प्रतिबिम्ब सीधा (उर्ध्व) और आभासी होता है: यह वास्तविक नहीं होता, स्क्रीन पर प्राप्त नहीं किया जा सकता, केवल दर्पण में देखा जा सकता है।

2. प्रतिबिम्ब का साइज वस्तु के साइज के बराबर होता है: इसमें न तो आवर्धन होता है और न ही छोटा होता है।

3. प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने होती है: अर्थात्, वस्तु की दूरी (u) और प्रतिबिम्ब की दूरी (v) का परिमाण बराबर होता है (|u| = |v|)।

4. प्रतिबिम्ब पार्श्व परिवर्तित (Laterally Inverted) होता है: इसका अर्थ है कि प्रतिबिम्ब में दाएँ और बाएँ पक्ष उलट जाते हैं। उदाहरण के लिए, दाएँ हाथ को उठाने पर प्रतिबिम्ब में बायाँ हाथ उठता हुआ दिखाई देगा।

15. गोलीय दर्पण की फोकस दूरी एवं वक्रता त्रिज्या में संबंध लिखिए।

उत्तर:

किसी गोलीय दर्पण (चाहे वह अवतल हो या उत्तल) के लिए, उसकी फोकस दूरी (f) और वक्रता त्रिज्या (R) के बीच एक सरल संबंध होता है। फोकस दूरी, वक्रता त्रिज्या की आधी होती है।

इसे निम्नलिखित सूत्र से व्यक्त किया जाता है:

f = R / 2 या R = 2f

स्पष्टीकरण: वक्रता त्रिज्या (R) दर्पण के ध्रुव से उसके वक्रता केंद्र (C) तक की दूरी है। फोकस (F) वह बिंदु है जो ध्रुव (P) और वक्रता केंद्र (C) के ठीक बीच में स्थित होता है। इसलिए, ध्रुव से फोकस की दूरी (f), ध्रुव से वक्रता केंद्र की दूरी (R) की आधी हो जाती है।

1. निम्नलिखित में से कौन समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब का लक्षण नहीं है?

A. आभासी प्रतिबिम्ब B.
C. उल्टा प्रतिबिम्ब D. दर्पण के पीछे बनता है

उत्तर: (C) उल्टा प्रतिबिम्ब

समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब हमेशा आभासी, सीधा तथा दर्पण के पीछे (वस्तु से समान दूरी पर) बनता है। यह प्रतिबिम्ब कभी भी उल्टा नहीं बनता। इसलिए 'उल्टा प्रतिबिम्ब' इसका लक्षण नहीं है।


2. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ -15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः हैं-

A. दोनों अवतल B. दोनों उत्तल
C. दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल D. दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल

उत्तर: (A) दोनों अवतल

फोकस दूरी के चिन्ह परंपरा के अनुसार, गोलीय दर्पण के लिए अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक (-) होती है। पतले लेंस के लिए अवतल लेंस (अपसारी लेंस) की फोकस दूरी भी ऋणात्मक (-) होती है। चूँकि दोनों की फोकस दूरी -15 cm दी गई है, इसका अर्थ है कि दर्पण अवतल है और लेंस भी अवतल है


3. किसी बिम्ब का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए बिम्ब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखेंगे?

A. लेंस के मुख्य फोकस पर B. फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
C. अनंत पर D. लेंस के प्रकाशिक केंद्र तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर: (B) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर

जब किसी वस्तु को उत्तल लेंस के सामने 2F (फोकस दूरी की दोगुनी दूरी) पर रखा जाता है, तो प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर 2F पर बनता है। यह प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा तथा वस्तु के साइज के बराबर होता है।


4. किसी गोलीय दर्पण के लिए फोकस दूरी (f) तथा वक्रता त्रिज्या (R) में क्या संबंध है?

उत्तर: किसी गोलीय दर्पण (अवतल या उत्तल) के लिए फोकस दूरी (f) तथा वक्रता त्रिज्या (R) में निम्नलिखित संबंध होता है:

फोकस दूरी (f) = वक्रता त्रिज्या (R) / 2
अर्थात, फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है। यह संबंध दोनों प्रकार के गोलीय दर्पणों पर लागू होता है।


5. किसी लेंस की क्षमता की परिभाषा दें। इसका मात्रक क्या है?

उत्तर: किसी लेंस की क्षमता (Power) उसकी प्रकाश किरणों को अभिसरित (converge) या अपसरित (diverge) करने की क्षमता का माप है। इसे लेंस की फोकस दूरी के व्युत्क्रम के रूप में परिभाषित किया जाता है।

लेंस की क्षमता (P) = 1 / फोकस दूरी (f)
जहाँ फोकस दूरी (f) को मीटर (m) में लिया जाता है।
मात्रक: लेंस क्षमता का SI मात्रक डायोप्टर (D) है। 1 D = 1 m⁻¹। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक (+) तथा अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक (-) होती है।


6. 2m फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात करें।

उत्तर:
दिया गया है: अवतल लेंस की फोकस दूरी, f = -2 m (ऋणात्मक चिन्ह अवतल लेंस को दर्शाता है)
लेंस की क्षमता का सूत्र है: P = 1 / f
मान रखने पर: P = 1 / (-2) = -0.5 D
अतः, इस अवतल लेंस की क्षमता -0.5 डायोप्टर है।


7. उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात करें जिसकी क्षमता -2.0 D है। लेंस का प्रकार भी बताएँ।

उत्तर:
दिया गया है: लेंस की क्षमता, P = -2.0 D
हम जानते हैं, P = 1 / f (जहाँ f मीटर में है)
इसलिए, f = 1 / P
मान रखने पर: f = 1 / (-2.0) = -0.5 m = -50 cm
चूँकि फोकस दूरी ऋणात्मक (-50 cm) है, इसलिए यह एक अवतल लेंस (अपसारी लेंस) है।
अतः, लेंस की फोकस दूरी -50 cm है और यह एक अवतल लेंस है।


8. किसी वस्तु का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा वस्तु से बड़ा है। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?

उत्तर: जब किसी वस्तु को अवतल दर्पण के फोकस (F) और ध्रुव (P) के बीच रखा जाता है, तो बना प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे (आभासी), सीधा तथा वस्तु से आकार में बड़ा बनता है। यह प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे अनंत तक भी बन सकता है और इसका उपयोग आवर्धक दर्पण के रूप में किया जाता है।


9. 10 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल लेंस के प्रकाशिक केंद्र से 20 cm दूरी पर रखी वस्तु के प्रतिबिम्ब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात करें।

उत्तर:
दिया गया है: उत्तल लेंस की फोकस दूरी, f = +10 cm (धनात्मक)
वस्तु की दूरी, u = -20 cm (चिन्ह परंपरा के अनुसार ऋणात्मक)
लेंस सूत्र के अनुसार: 1/v - 1/u = 1/f
मान रखने पर: 1/v - 1/(-20) = 1/10
=> 1/v + 1/20 = 1/10
=> 1/v = 1/10 - 1/20 = (2 - 1)/20 = 1/20
अतः, v = +20 cm
प्रतिबिम्ब की स्थिति: प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर 20 cm की दूरी पर बनेगा।
प्रतिबिम्ब की प्रकृति: चूँकि v धनात्मक है, प्रतिबिम्ब वास्तविक होगा। साथ ही, वस्तु 2F (यहाँ 2f=20 cm) पर है, इसलिए प्रतिबिम्ब भी दूसरी ओर 2F पर बनेगा और यह उल्टा तथा वस्तु के आकार के बराबर होगा।


10. प्रकाश के अपवर्तन के नियम लिखें।

उत्तर: प्रकाश के अपवर्तन के दो मुख्य नियम हैं:

  1. आपतन किरण, अपवर्तित किरण तथा दोनों माध्यमों को अलग करने वाले पृष्ठ के आपतन बिंदु पर अभिलंब, सभी एक ही तल में होते हैं।
  2. किन्हीं दो माध्यमों के लिए आपतन कोण (i) की ज्या (sine) तथा अपवर्तन कोण (r) की ज्या (sine) का अनुपात एक नियतांक होता है। इसे स्नेल का नियम भी कहते हैं।
    sin i / sin r = नियतांक
    इस नियतांक को दूसरे माध्यम का पहले माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक कहते हैं, जिसे ₁μ₂ से दर्शाते हैं।


11. प्रकाश के परावर्तन के नियम लिखें।

उत्तर: प्रकाश के परावर्तन के दो मुख्य नियम हैं:

  1. आपतन किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलंब, सभी एक ही तल में होते हैं।
  2. परावर्तन कोण सदैव आपतन कोण के बराबर होता है। अर्थात, ∠i = ∠r
ये नियम समतल सतह तथा गोलीय सतह दोनों के लिए लागू होते हैं।


12. वास्तविक तथा आभासी प्रतिबिम्ब में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: वास्तविक तथा आभासी प्रतिबिम्ब में प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं:

वास्तविक प्रतिबिम्ब आभासी प्रतिबिम्ब
प्रकाश की किरणें वास्तव में प्रतिबिम्ब बिंदु पर मिलती हैं या एकत्रित होती हैं। प्रकाश की किरणें वास्तव में नहीं मिलतीं, बल्कि पीछे की ओर बढ़ाने पर मिलती प्रतीत होती हैं।
इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है। इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
यह प्रतिबिम्ब सदैव उल्टा बनता है। यह प्रतिबिम्ब सदैव सीधा बनता है।
उदाहरण: कैमरा, प्रोजेक्टर या अवतल दर्पण के सामने वस्तु को फोकस से दूर रखने पर बना प्रतिबिम्ब। उदाहरण: समतल दर्पण में दिखने वाला प्रतिबिम्ब या अवतल दर्पण के फोकस और ध्रुव के बीच रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब।


13. उत्तल लेंस द्वारा किसी वस्तु के बने प्रतिबिम्ब के विभिन्न स्थितियों को रेखाचित्र बनाकर समझाएँ।

उत्तर: उत्तल लेंस द्वारा बने प्रतिबिम्ब की स्थिति वस्तु की लेंस से दूरी पर निर्भर करती है। मुख्य स्थितियाँ निम्नलिखित हैं:

(किसी उत्तल लेंस के लिए, फोकस F, 2F (दोगुनी फोकस दूरी) और अनंत ∞ की स्थितियाँ महत्वपूर्ण हैं।)
  1. वस्तु अनंत पर: प्रतिबिम्ब फोकस (F) पर, वास्तविक, उल्टा तथा अत्यधिक छोटा बिंदु के रूप में बनता है।
  2. वस्तु अनंत और 2F के बीच: प्रतिबिम्ब F और 2F के बीच, वास्तविक, उल्टा तथा वस्तु से छोटा बनता है।
  3. वस्तु 2F पर: प्रतिबिम्ब दूसरी ओर 2F पर, वास्तविक, उल्टा तथा वस्तु के बराबर आकार का बनता है।
  4. वस्तु F और 2F के बीच: प्रतिबिम्ब 2F से परे, वास्तविक, उल्टा तथा वस्तु से बड़ा बनता है। (इसका उपयोग प्रोजेक्टर में होता है)
  5. वस्तु फोकस F पर: प्रतिबिम्ब अनंत पर बनता है, अर्थात प्रतिबिम्ब नहीं बन पाता या बहुत दूर बनता है।
  6. वस्तु F और प्रकाशिक केंद्र O के बीच: प्रतिबिम्ब लेंस के उसी ओर (वस्तु की ओर), आभासी, सीधा तथा वस्तु से बड़ा बनता है। (इसका उपयोग आवर्धक लेंस के रूप में होता है)
नोट: इन सभी स्थितियों को किरण आरेख (रेखाचित्र) बनाकर स्पष्ट रूप से दर्शाया जा सकता है, जहाँ मुख्य अक्ष के समानांतर चलने वाली किरण फोकस से गुजरती है और प्रकाशिक केंद्र से गुजरने वाली किरण सीधी निकलती है।


14. प्रकाश के अपवर्तन के कारण सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य वास्तविक स्थिति से कुछ ऊपर दिखाई देता है, क्यों?

उत्तर: यह घटना वायुमंडल में होने वाले प्रकाश के अपवर्तन के कारण होती है। पृथ्वी का वायुमंडल विभिन्न घनत्व वाली परतों से बना है। जब सूर्य से आने वाला प्रकाश सघन माध्यम (पृथ्वी का वायुमंडल) में प्रवेश करता है, तो यह अभिलंब की ओर झुक जाता है (अपवर्तित हो जाता है)। इस अपवर्तन के कारण सूर्य की किरणें मुड़कर हमारी आँखों तक पहुँचती हैं।
हमारी आँखें प्रकाश को सीधी रेखा में आता हुआ मानती हैं, इसलिए हमें सूर्य उसकी वास्तविक स्थिति से ऊपर दिखाई देता है। सूर्योदय के समय सूर्य वास्तव में क्षितिज के नीचे होता है, लेकिन अपवर्तन के कारण हमें ऊपर दिखता है। इसी प्रकार सूर्यास्त के समय भी सूर्य वास्तव में क्षितिज के नीचे चला गया होता है, लेकिन हमें कुछ देर तक ऊपर दिखाई देता रहता है। इस प्रकार अपवर्तन के कारण दिन की अवधि थोड़ी बढ़ जाती है।

प्रश्न 5.

एक उत्तल लेंस से 5 सेमी की दूरी पर स्थित एक वस्तु का प्रतिबिम्ब वस्तु की ओर, वस्त से दी गुना बड़ा बनता है। यदि वस्तु को उसी लेंस से 15 सेमी की दूरी पर रखा जाए, तो उसके प्रतिबिम्ब की स्थिति तथा आवर्धन ज्ञात कीजिए। (2014, 15)


हल:

पहली स्थिति:
प्रश्नानुसार, प्रतिबिम्ब वस्तु की ओर बनता है। इसका अर्थ है कि प्रतिबिम्ब आभासी और सीधा है।
वस्तु की दूरी, u = -5 सेमी (चिह्न परिपाटी के अनुसार)।
आवर्धन (m) = प्रतिबिम्ब की ऊँचाई / वस्तु की ऊँचाई = +2 (चूँकि प्रतिबिम्ब सीधा और दोगुना बड़ा है)।
आवर्धन का सूत्र है: m = v/u
अतः, 2 = v / (-5)
इससे प्रतिबिम्ब दूरी, v = -10 सेमी प्राप्त होती है।

अब लेंस सूत्र का प्रयोग करके फोकस दूरी (f) ज्ञात करते हैं:
1/f = 1/v - 1/u
1/f = 1/(-10) - 1/(-5)
1/f = -1/10 + 1/5
1/f = (-1 + 2) / 10 = 1/10
अतः, फोकस दूरी, f = +10 सेमी (धनात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि लेंस उत्तल है)।

दूसरी स्थिति:
अब वस्तु को उसी लेंस से 15 सेमी की दूरी पर रखा जाता है।
u = -15 सेमी, f = +10 सेमी
लेंस सूत्र से:
1/f = 1/v - 1/u
1/10 = 1/v - 1/(-15)
1/10 = 1/v + 1/15
1/v = 1/10 - 1/15
1/v = (3 - 2) / 30 = 1/30
इसलिए, प्रतिबिम्ब दूरी, v = +30 सेमी

आवर्धन, m = v/u = 30 / (-15) = -2

परिणाम की व्याख्या:
प्रतिबिम्ब दूरी (v) का मान +30 सेमी है, जो धनात्मक है। इसका अर्थ है कि प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर (वस्तु के विपरीत ओर) 30 सेमी की दूरी पर बनेगा।
आवर्धन (m) का मान -2 है। ऋणात्मक चिह्न बताता है कि प्रतिबिम्ब उल्टा (वास्तविक) बनेगा। 2 का मान बताता है कि प्रतिबिम्ब वस्तु की ऊँचाई से दोगुना बड़ा बनेगा।

अतः, जब वस्तु को 15 सेमी पर रखा जाता है, तो प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर 30 सेमी की दूरी पर, वास्तविक, उल्टा और वस्तु से दोगुना आकार का बनेगा।

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