Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन) Solutions
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प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन
1. निम्नलिखित में से कौन संपोषित विकास का उद्देश्य है?
(A) वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं से समझौता किए बिना करना।
(B) केवल भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति करना।
(C) केवल वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति करना।
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
व्याख्या: संपोषित विकास का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हम अपनी वर्तमान जरूरतों को पूरा करें, लेकिन ऐसा करते समय भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों और पर्यावरण की गुणवत्ता को बनाए रखें। यह वर्तमान और भविष्य के बीच एक संतुलन स्थापित करता है।
2. निम्नलिखित में से कौन-सा जैव निम्नीकरणीय पदार्थ है?
(A) प्लास्टिक
(B) कागज
(C) धातु
(D) काँच
व्याख्या: कागज एक जैव निम्नीकरणीय पदार्थ है क्योंकि यह लकड़ी के रेशों (सेलूलोज़) से बना होता है। सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, कवक आदि) प्राकृतिक रूप से इसे तोड़कर सरल पदार्थों में बदल सकते हैं। प्लास्टिक, धातु और काँच गैर-निम्नीकरणीय हैं क्योंकि सूक्ष्मजीव इन्हें आसानी से विघटित नहीं कर पाते।
3. निम्नलिखित में से कौन-सा गैर-नवीकरणीय संसाधन है?
(A) वन
(B) वायु
(C) कोयला
(D) जल
व्याख्या: कोयला एक जीवाश्म ईंधन है जो लाखों वर्षों में बनता है। एक बार उपयोग करने के बाद इसे मानव जीवनकाल में दोबारा नहीं बनाया जा सकता, इसलिए यह एक गैर-नवीकरणीय संसाधन है। वन, वायु और जल प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा अपने आप पुनः पूर्ति कर सकते हैं, अतः ये नवीकरणीय संसाधन हैं।
4. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(A) संसाधन अनंत हैं।
(B) संसाधन सीमित हैं।
(C) संसाधनों का उपयोग बिना सोचे-समझे किया जा सकता है।
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
व्याख्या: हमारे ग्रह पर अधिकांश प्राकृतिक संसाधन सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। इनकी पुनः पूर्ति की दर मानवीय माँग की दर से बहुत धीमी है। इसलिए, इनका विवेकपूर्ण और संपोषित तरीके से उपयोग करना आवश्यक है ताकि ये भविष्य के लिए भी बचे रहें।
5. निम्नलिखित में से कौन-सा जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट नहीं है?
(A) डी.डी.टी.
(B) खाद्य अपशिष्ट
(C) कागज
(D) लकड़ी
व्याख्या: डी.डी.टी. एक रासायनिक कीटनाशक है जो कार्बनिक यौगिकों से बना होता है, लेकिन यह प्रकृति में बहुत धीमी गति से विघटित होता है और खाद्य श्रृंखला में जमा होकर जैव-आवर्धन का कारण बनता है। इसलिए, इसे प्रभावी रूप से गैर-निम्नीकरणीय अपशिष्ट माना जाता है। खाद्य अपशिष्ट, कागज और लकड़ी जैव निम्नीकरणीय हैं।
6. संपोषित विकास से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: संपोषित विकास वह विकास है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करता है, बिना भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता किए। इसका अर्थ है प्राकृतिक संसाधनों का इस प्रकार उपयोग करना कि वे समाप्त न हों और पर्यावरणीय संतुलन बना रहे। इसमें दीर्घकालिक सोच, संसाधनों का पुनर्चक्रण, प्रदूषण नियंत्रण और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण पर जोर दिया जाता है।
7. प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है:
- सीमित उपलब्धता: अधिकांश संसाधन सीमित हैं और अत्यधिक दोहन से वे समाप्त हो सकते हैं।
- बढ़ती जनसंख्या: जनसंख्या वृद्धि के साथ संसाधनों की माँग बढ़ती जा रही है।
- पर्यावरणीय संतुलन: अविवेकपूर्ण उपयोग से वनों का कटाव, मृदा अपरदन, जल और वायु प्रदूषण जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र को असंतुलित कर देती हैं।
- भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षण: हमारा यह नैतिक दायित्व है कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संसाधनों को सुरक्षित रखें।
- आर्थिक स्थिरता: संसाधनों का कुशल प्रबंधन दीर्घकालिक आर्थिक विकास को सुनिश्चित करता है।
8. तीन आर (3R) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: तीन आर (3R) का अर्थ है - Reduce (कम करना), Reuse (पुनः उपयोग) और Recycle (पुनर्चक्रण)। यह पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
- कम करना (Reduce): संसाधनों और ऊर्जा का उपयोग कम से कम करना। जैसे- बिजली और पानी की बचत करना, कम पैकेजिंग वाली वस्तुएँ खरीदना।
- पुनः उपयोग (Reuse): किसी वस्तु को फेंकने के बजाय बार-बार उपयोग में लाना। जैसे- शॉपिंग बैग का बार-बार उपयोग, पुराने बर्तनों में पौधे लगाना।
- पुनर्चक्रण (Recycle): उपयोग की गई वस्तुओं (जैसे कागज, प्लास्टिक, काँच, धातु) को कच्चे माल के रूप में इकट्ठा करके नई वस्तुएँ बनाना। इससे नए संसाधनों की खपत और कचरे की मात्रा कम होती है।
9. जैव निम्नीकरणीय तथा अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ में अंतर स्पष्ट कीजिए।
| जैव निम्नीकरणीय पदार्थ | अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ |
|---|---|
| ये वे पदार्थ हैं जिन्हें सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, कवक आदि) प्राकृतिक रूप से विघटित कर सरल पदार्थों में बदल सकते हैं। | ये वे पदार्थ हैं जिन्हें सूक्ष्मजीव आसानी से विघटित नहीं कर पाते या इनके विघटन में बहुत लंबा समय लगता है। |
| इनका विघटन अपेक्षाकृत कम समय (कुछ दिनों से लेकर कुछ महीनों) में हो जाता है। | इनका विघटन सैकड़ों या हजारों वर्षों तक भी हो सकता है। |
| ये पर्यावरण में जमा नहीं होते और प्रदूषण कम करते हैं। | ये पर्यावरण में लंबे समय तक जमा रहकर प्रदूषण फैलाते हैं। |
| उदाहरण: फल-सब्जी के छिलके, कागज, लकड़ी, कपास के कपड़े, पशुओं का मलमूत्र। | उदाहरण: प्लास्टिक, पॉलीथीन, डी.डी.टी., काँच, एल्युमीनियम के डिब्बे, रेडियोधर्मी पदार्थ। |
10. वन संपोषित विकास में किस प्रकार सहायक हैं?
उत्तर: वन संपोषित विकास में निम्नलिखित प्रकार से सहायक हैं:
- जैव विविधता का संरक्षण: वन विभिन्न प्रकार के पौधों, जानवरों और सूक्ष्मजीवों का आवास हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र को स्थिर रखते हैं।
- जलवायु नियंत्रण: वन वर्षा लाने, तापमान नियंत्रित करने और कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर ग्लोबल वार्मिंग कम करने में मदद करते हैं।
- मृदा एवं जल संरक्षण: वनों की जड़ें मिट्टी को बाँधकर उसके कटाव को रोकती हैं और जल चक्र को नियंत्रित कर भूजल स्तर को बनाए रखती हैं।
- संसाधनों की पूर्ति: वन लकड़ी, ईंधन, औषधियाँ, फल, रबर आदि जैसे नवीकरणीय संसाधन प्रदान करते हैं, जिन पर लाखों लोगों की आजीविका निर्भर है।
- प्राकृतिक सौंदर्य एवं पर्यटन: वन प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करते हैं और पर्यटन को बढ़ावा देकर आय का स्रोत बनते हैं।
11. जल संरक्षण के उपाय लिखिए।
उत्तर: जल संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:
- वर्षा जल संचयन: घरों, स्कूलों और सार्वजनिक भवनों की छतों पर वर्षा के जल को एकत्र करके भूजल स्तर को रिचार्ज करना या भंडारण करना।
- सिंचाई की आधुनिक विधियाँ अपनाना: ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसी विधियों से सिंचाई करके पानी की बर्बादी रोकना।
- घरेलू उपाय: नलों को टपकने न देना, शॉवर की जगह बाल्टी से नहाना, ब्रश करते या बर्तन धोते समय नल बंद रखना।
- जल प्रदूषण रोकना: औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट को नदियों और तालाबों में बहाने से रोकना, जैविक खेती को बढ़ावा देना।
- वनरोपण: अधिक से अधिक पेड़ लगाना, क्योंकि वन वर्षा लाने और जल स्रोतों को जीवित रखने में सहायक होते हैं।
- जन जागरूकता: लोगों को जल के महत्व और संरक्षण के तरीकों के बारे में शिक्षित करना।
- पुनः उपयोग: नहाने-धोने के पानी का उपयोग पौधों में लगाने या शौचालय साफ करने में करना।
12. कोयला एवं पेट्रोलियम के संपोषित उपयोग के लिए सुझाव दीजिए।
उत्तर: कोयला और पेट्रोलियम जीवाश्म ईंधन हैं जो गैर-नवीकरणीय और प्रदूषणकारी हैं। इनके संपोषित उपयोग के लिए निम्नलिखित सुझाव हैं:
- वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत और बायोगैस जैसे नवीकरणीय स्रोतों के उपयोग को प्रोत्साहित करना ताकि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो।
- ऊर्जा दक्षता बढ़ाना: ऐसे उपकरण और वाहनों का उपयोग करना जो कम ईंधन में अधिक कार्यक्षमता प्रदान करते हों।
- सार्वजनिक परिवहन का उपयोग: निजी वाहनों के स्थान पर बस, रेल, मेट्रो आदि सार्वजनिक परिवहन के साधनों का उपयोग करना ताकि पेट्रोल/डीजल की खपत कम हो।
- खनन में सावधानी: कोयला खनन के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पालन करना और खदानों का पुनः रूपांतरण करना।
- पुनर्चक्रण: प्लास्टिक (पेट्रोलियम उत्पाद) का पुनर्चक्रण करके नए पेट्रोलियम के उपयोग को कम करना।
- जन जागरूकता: लोगों को ऊर्जा बचत और संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करना।
- नीतिगत हस्तक्षेप: सरकार द्वारा कार्बन उत्सर्जन पर कर लगाना और स्वच्छ ऊर्जा पर सब्सिडी देना।
प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन
1. पर्यावरण-मित्र या हरित क्रियाकलाप क्या हैं? कुछ उदाहरण दीजिए।
पर्यावरण-मित्र या हरित क्रियाकलाप वे कार्य या प्रक्रियाएँ हैं जो पर्यावरण पर न्यूनतम या शून्य हानिकारक प्रभाव डालती हैं। ये प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलती हैं और संसाधनों के संरक्षण, कचरे में कमी तथा प्रदूषण नियंत्रण पर ध्यान देती हैं।
उदाहरण:
- कागज, प्लास्टिक, काँच और धातु का पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) करना।
- ऊर्जा बचाने के लिए सौर ऊर्जा या पवन ऊर्जा का उपयोग करना।
- जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) करना।
- कम्पोस्ट खाद बनाकर कार्बनिक कचरे का पुन: उपयोग करना।
- सार्वजनिक परिवहन, साइकिल चलाना या पैदल चलना ताकि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।
2. संपोषित विकास से आप क्या समझते हैं?
संपोषित विकास एक ऐसी विकास प्रक्रिया है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करती है, बिना भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता किए। इसका मूल सिद्धांत यह है कि हम प्राकृतिक संसाधनों का इस तरह से उपयोग करें कि वे समाप्त न हों और पर्यावरणीय संतुलन बना रहे। इसमें आर्थिक विकास, सामाजिक समानता और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना शामिल है।
3. अपने घर से निकलने वाले कचरे से आप कम्पोस्ट कैसे तैयार करेंगे?
घर के कार्बनिक कचरे से कम्पोस्ट बनाने की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में की जा सकती है:
- कचरे का चयन: रसोई से निकलने वाले कचरे जैसे सब्जियों और फलों के छिलके, बचा हुआ भोजन, चायपत्ती, अंडे के छिलके, सूखे पत्ते आदि एकत्र करें। मांस, डेयरी उत्पाद, तेल या प्लास्टिक को शामिल न करें।
- कंटेनर तैयार करना: एक बड़ा बर्तन या प्लास्टिक/सीमेंट का ड्रम लें। इसकी तली में छोटे-छोटे छेद बना दें ताकि अतिरिक्त नमी बाहर निकल सके।
- परतें बनाना: सबसे पहले ड्रम के तल में मोटी रेत या मिट्टी की एक परत बिछाएँ। फिर कचरे की एक परत डालें। इसके ऊपर सूखी पत्तियों या भूसे की एक पतली परत डालें। इस प्रकार कचरे और सूखे पदार्थों की परतें बनाते रहें।
- नमी और हवा का ध्यान रखना: कचरे को नम रखें (गीला नहीं) और हर 2-3 दिन में एक बार मिश्रण को हल्का-सा चलाएँ (खुरचें) ताकि उसमें हवा का संचार हो सके। यह सड़न की प्रक्रिया के लिए जरूरी है।
- कम्पोस्ट तैयार होना: लगभग 4-6 सप्ताह में कचरा सड़कर गहरे भूरे रंग का, दानेदार और मिट्टी जैसी गंध वाला कम्पोस्ट खाद बन जाएगा। इसे आप अपने बगीचे या गमलों में उपयोग कर सकते हैं।
4. निम्नलिखित के दो-दो उदाहरण दीजिए-
(क) नवीकरणीय संसाधन
(ख) अनवीकरणीय संसाधन
(क) नवीकरणीय संसाधन: वे संसाधन जो प्रकृति में स्वयं पुनः उत्पन्न हो जाते हैं या जिनका भंडार समाप्त नहीं होता।
- सौर ऊर्जा: सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा जो कभी खत्म नहीं होती।
- वायु (पवन ऊर्जा): हवा की गति से उत्पन्न ऊर्जा, जिसका उपयोग बिजली बनाने में किया जाता है।
(ख) अनवीकरणीय संसाधन: वे संसाधन जो सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और एक बार उपयोग करने के बाद पुनः उत्पन्न होने में लाखों वर्ष लगते हैं।
- कोयला: एक जीवाश्म ईंधन जो पृथ्वी के अंदर पेड़-पौधों के लाखों वर्षों तक दबे रहने से बनता है।
- प्राकृतिक गैस: भूगर्भ से निकलने वाली गैस जो मुख्यतः मीथेन से बनी होती है और ईंधन के रूप में उपयोग की जाती है।
5. निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए-
(क) संरक्षण और संरक्षण
(ख) जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ
(क) संरक्षण और संरक्षण:
संरक्षण (Conservation): संरक्षण का अर्थ है प्राकृतिक संसाधनों का बुद्धिमानीपूर्ण और कुशलतापूर्वक उपयोग करना ताकि उनका दीर्घकालिक उपयोग सुनिश्चित हो सके और उनकी गुणवत्ता बनी रहे। इसमें संसाधनों की बर्बादी रोकना और उनके पुनर्चक्रण पर जोर देना शामिल है।
संरक्षण (Preservation): संरक्षण का अर्थ है प्रकृति या प्राकृतिक संसाधनों को उनके मूल रूप में, बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के, सुरक्षित रखना। इसमें संसाधनों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना या उन्हें अछूता रखना शामिल है, जैसे किसी क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित कर देना।
(ख) जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ:
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ (Biodegradable Substances): वे पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, कवक आदि) की क्रिया द्वारा सरलता से और प्राकृतिक रूप से अपघटित (सड़-गलकर) हो जाते हैं और पर्यावरण में मिल जाते हैं। इनसे पर्यावरण प्रदूषण नहीं होता।
उदाहरण: फल-सब्जियों के छिलके, कागज, लकड़ी, कपास के कपड़े।
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ (Non-biodegradable Substances): वे पदार्थ जो सूक्ष्मजीवों द्वारा आसानी से अपघटित नहीं होते और लंबे समय तक पर्यावरण में ज्यों के त्यों पड़े रहते हैं, जिससे प्रदूषण फैलता है।
उदाहरण: प्लास्टिक, धातु (एल्युमिनियम के डिब्बे), काँच, सिंथेटिक रबर।
6. निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए-
(क) निम्नलिखित में से कौन पर्यावरण-मित्र क्रियाकलाप है?
(i) बाजार जाने के लिए कार का प्रयोग
(ii) बाजार जाने के लिए साइकिल का प्रयोग
(iii) बाजार जाने के लिए स्कूटर का प्रयोग
(iv) बाजार जाने के लिए मोटरसाइकिल का प्रयोग
सही उत्तर: (ii) बाजार जाने के लिए साइकिल का प्रयोग
व्याख्या: साइकिल का प्रयोग पर्यावरण-मित्र क्रियाकलाप है क्योंकि यह पेट्रोल/डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन का उपयोग नहीं करती और न ही कोई हानिकारक गैस उत्सर्जित करती है। इससे वायु प्रदूषण नहीं होता और ऊर्जा की बचत भी होती है।
(ख) निम्नलिखित में से कौन जैव निम्नीकरणीय पदार्थ है?
(i) डी. डी. टी.
(ii) एल्युमिनियम
(iii) प्लास्टिक
(iv) कृषि अपशिष्ट
सही उत्तर: (iv) कृषि अपशिष्ट
व्याख्या: कृषि अपशिष्ट (जैसे फसल अवशेष, पुआल, गोबर आदि) प्राकृतिक रूप से सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित होकर मिट्टी में मिल जाते हैं। डी.डी.टी. (कीटनाशक), एल्युमिनियम और प्लास्टिक अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ हैं जो पर्यावरण में लंबे समय तक रहकर प्रदूषण फैलाते हैं।
(ग) निम्नलिखित में से कौन अनवीकरणीय संसाधन है?
(i) जल
(ii) वन एवं वन्य जीव
(iii) कोयला एवं पेट्रोलियम
(iv) सौर ऊर्जा
सही उत्तर: (iii) कोयला एवं पेट्रोलियम
व्याख्या: कोयला और पेट्रोलियम जीवाश्म ईंधन हैं जो पृथ्वी के अंदर लाखों वर्षों में बने हैं। इनकी मात्रा सीमित है और एक बार उपयोग के बाद इन्हें पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता। जल, वन एवं वन्य जीव और सौर ऊर्जा नवीकरणीय संसाधन हैं।
प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन
1. पर्यावरण-मित्र बनने के लिए आप अपनी दिनचर्या में कौन-कौन से परिवर्तन ला सकते हैं?
पर्यावरण-मित्र बनने के लिए हम अपनी दिनचर्या में निम्नलिखित परिवर्तन ला सकते हैं:
- जल का संरक्षण: नहाते समय शॉवर का उपयोग कम समय के लिए करना, नल को बहता न छोड़ना, और बारिश के पानी को संग्रहित करना।
- ऊर्जा बचत: बिजली के उपकरणों का उपयोग केवल आवश्यकता पड़ने पर करना, बल्बों की जगह LED लाइट्स का प्रयोग करना, और धूप का उपयोग करके कपड़े सुखाना।
- कचरा प्रबंधन: कचरे को सूखा और गीला अलग-अलग करके डालना, प्लास्टिक के उपयोग से बचना, और जैविक कचरे को कम्पोस्ट खाद में बदलना।
- परिवहन: छोटी दूरी के लिए पैदल चलना या साइकिल का उपयोग करना, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देना, और वाहनों का सामूहिक उपयोग (कारपूल) करना।
- उपभोग: पुन: प्रयोग योग्य वस्तुओं (जैसे कपड़े की थैली, कांच के बर्तन) का उपयोग करना और केवल आवश्यक वस्तुएं ही खरीदना।
2. संसाधनों का दीर्घकालिक उपयोग क्या है? यह दीर्घकालिक विकास से किस प्रकार भिन्न है?
संसाधनों का दीर्घकालिक उपयोग का अर्थ है प्राकृतिक संसाधनों का इस प्रकार उपयोग करना कि वे वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता भी बनाए रखें। इसमें संसाधनों का संरक्षण, पुनर्चक्रण और विवेकपूर्ण उपयोग शामिल है।
दीर्घकालिक विकास एक व्यापक अवधारणा है जिसमें आर्थिक विकास, सामाजिक समानता और पर्यावरणीय संरक्षण तीनों का संतुलन शामिल है। यह विकास का वह तरीका है जो भविष्य को नुकसान पहुँचाए बिना वर्तमान की जरूरतों को पूरा करता है।
भिन्नता: संसाधनों का दीर्घकालिक उपयोग दीर्घकालिक विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा या घटक है। दीर्घकालिक विकास प्राप्त करने के लिए संसाधनों का दीर्घकालिक उपयोग अनिवार्य शर्त है।
3. आपके विद्यालय में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु क्या-क्या कदम उठाए गए हैं?
विद्यालयों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
- जल संरक्षण: हैंडपंप और नलों की नियमित मरम्मत, वर्षा जल संचयन प्रणाली की स्थापना, और 'पानी बचाओ' अभियान चलाना।
- ऊर्जा संरक्षण: कक्षाओं में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी का प्रबंध, सभी बल्बों को LED बल्बों से बदलना, और 'स्विच ऑफ' अभियान द्वारा अनावश्यक बिजली बचाना।
- हरित आवरण: विद्यालय परिसर में अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाना और छात्रों को पौधारोपण के लिए प्रोत्साहित करना।
- कचरा प्रबंधन: परिसर में अलग-अलग रंग के कूड़ेदान (जैविक और अजैविक) रखना, कागज के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना, और प्लास्टिक-मुक्त परिसर बनाना।
- जागरूकता: पर्यावरण दिवस, वन महोत्सव आदि मनाकर और निबंध, पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित करके छात्रों में जागरूकता फैलाना।
4. संपोषित प्रबंधन के लिए 5R के सिद्धांत कौन-कौन से हैं?
संपोषित प्रबंधन के लिए 5R के सिद्धांत निम्नलिखित हैं:
- रिड्यूस (Reduce - कम करना): संसाधनों और वस्तुओं का उपयोग कम से कम करना, जैसे- बिजली, पानी, कागज, प्लास्टिक की बचत करना।
- रीयूज (Reuse - पुन: उपयोग): वस्तुओं को फेंकने के बजाय बार-बार उपयोग में लाना, जैसे- शॉपिंग बैग, जार, बोतलों का दोबारा इस्तेमाल करना।
- रिसाइकिल (Recycle - पुनर्चक्रण): उपयोग की गई वस्तुओं (कागज, प्लास्टिक, कांच, धातु) को कच्चे माल के रूप में प्रयोग कर नई वस्तुएं बनाना।
- रिप्लेस (Replace - प्रतिस्थापन): हानिकारक या कम टिकाऊ वस्तुओं को पर्यावरण-मित्र वस्तुओं से बदलना, जैसे- प्लास्टिक की थैली की जगह कपड़े की थैली का उपयोग।
- रिफ्यूज (Refuse - इनकार करना): ऐसी वस्तुओं का उपयोग करने से इनकार करना जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं, जैसे- एक बार उपयोग होने वाली प्लास्टिक की वस्तुएं।
5. निम्नलिखित में से कौन ग्लोबल वार्मिंग में सहायक नहीं है?
A. CO2
B. CH4
C. CO
D. NO2
उत्तर: C. CO
व्याख्या: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) एक जहरीली गैस है, लेकिन यह एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस नहीं है। यह वायुमंडल में लंबे समय तक नहीं रहती और ग्लोबल वार्मिंग में इसका योगदान CO2, CH4 या NO2 की तुलना में नगण्य है। अन्य तीनों गैसें शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं जो सूर्य की गर्मी को वायुमंडल में रोककर पृथ्वी के तापमान में वृद्धि करती हैं।
6. निम्नलिखित में से कौन जल के अवक्षेपण का रूप नहीं है?
A. ओस
B. कोहरा
C. वर्षा
D. हिमपात
उत्तर: B. कोहरा
व्याख्या: कोहरा जल के अवक्षेपण का रूप नहीं है, बल्कि संघनन का रूप है। यह हवा में मौजूद जलवाष्प के छोटी-छोटी बूंदों में संघनित होकर हवा में तैरने से बनता है। दूसरी ओर, अवक्षेपण का अर्थ है वायुमंडल से पृथ्वी की सतह पर जल की विभिन्न अवस्थाओं (जैसे बारिश, ओलावृष्टि, हिमपात) का गिरना। ओस, वर्षा और हिमपात सभी अवक्षेपण के विभिन्न रूप हैं।
7. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ओजोन परत के विषय में सही नहीं है?
A. यह ओजोन गैस का बना एक आवरण है
B. यह सूर्य से आने वाली अधिकांश पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेता है
C. यह पृथ्वी से 60 km की ऊँचाई पर स्थित है
D. यह एक हानिकारक गैस है
उत्तर: D. यह एक हानिकारक गैस है
व्याख्या: यह कथन सही नहीं है क्योंकि ओजोन परत स्वयं हानिकारक नहीं है। वास्तव में, यह पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित करके हमें त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद जैसे रोगों से बचाती है। ओजोन गैस (O3) जमीनी स्तर पर प्रदूषक के रूप में हानिकारक हो सकती है, लेकिन समताप मंडल में बनी ओजोन परत एक सुरक्षात्मक कवच का काम करती है।
8. निम्नलिखित में से कौन-सा वन एवं वन्य जीव संरक्षण का तरीका नहीं है?
A. वनों की कटाई को रोकना
B. वनों को जलाना
C. वन्य जीव अभयारण्य बनाना
D. वन महोत्सव मनाना
उत्तर: B. वनों को जलाना
व्याख्या: वनों को जलाना वन संरक्षण का तरीका नहीं, बल्कि विनाश का तरीका है। वनाग्नि से पेड़-पौधे, वन्य जीव और पूरा पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो जाता है। यह वायु प्रदूषण भी फैलाती है और मृदा की उर्वरता को कम करती है। वनों की कटाई रोकना, अभयारण्य बनाना और वन महोत्सव जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पौधारोपण को बढ़ावा देना ही वन एवं वन्य जीव संरक्षण के प्रभावी तरीके हैं।
प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन
प्रश्न 2.
एक एटलस की सहायता से भारत में वर्षा के पैठर्न का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में वर्षा का पैटर्न मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून से निर्धारित होता है। एटलस की सहायता से हम इसका निम्नलिखित वर्णन कर सकते हैं:
1. मानसून का आगमन: जून के प्रथम सप्ताह में मानसून की धाराएँ केरल तट पर पहुँचती हैं, जिससे दक्षिणी प्रायद्वीप में वर्षा प्रारंभ होती है।
2. दो मुख्य शाखाएँ: मानसून दो शाखाओं में आगे बढ़ता है:
- अरब सागर शाखा: यह पश्चिमी घाट से टकराकर भारी वर्षा करती है और लगभग 10 जून तक मुंबई पहुँच जाती है।
- बंगाल की खाड़ी शाखा: यह शाखा तेजी से उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ती है और जून के पहले सप्ताह में असम पहुँचकर मेघालय (चेरापूंजी-मासिनराम क्षेत्र) में विश्व की सर्वाधिक वर्षा कराती है।
3. गंगा के मैदान में प्रवेश: बंगाल की खाड़ी शाखा हिमालय से टकराकर पश्चिम की ओर मुड़ जाती है और गंगा के मैदान में वर्षा करती हुई आगे बढ़ती है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की मानसून शाखाएँ उत्तर-पश्चिम भारत में आपस में मिल जाती हैं।
4. पूरे देश में फैलाव: जून के अंत तक मानसून दिल्ली पहुँच जाता है। जुलाई के प्रथम सप्ताह तक यह पंजाब, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान और जुलाई के मध्य तक शेष भारत (सिवाय कुछ स्थानों के) को आच्छादित कर लेता है।
5. मानसून का लौटना (वापसी): सितंबर के प्रथम सप्ताह से मानसून की वापसी शुरू हो जाती है, जो सबसे पहले उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होती है। अक्टूबर तक यह प्रायद्वीप के उत्तरी भाग से लौट जाता है और दिसंबर की शुरुआत तक पूरे देश से विदा हो जाता है।
6. वर्षा की मात्रा में विविधता: एटलस से स्पष्ट है कि भारत में वर्षा का वितरण असमान है। पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्वी राज्यों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में अधिकतम वर्षा (200 cm से अधिक) होती है, जबकि राजस्थान के पश्चिमी भाग, गुजरात के कच्छ और लद्दाख में यह बहुत कम (50 cm से भी कम) होती है।
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