Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय) Solutions

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Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय) Solutions

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प्रश्न 1.

प्रतिवर्ती क्रिया तथा ठहलने के बीच क्या अंतर है?


उत्तर:
प्रतिवर्ती क्रिया एक अनैच्छिक, तीव्र और स्वचालित प्रतिक्रिया है जो मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है, जैसे गर्म वस्तु को छूते ही हाथ सिकोड़ लेना। इसमें मस्तिष्क की सोचने की प्रक्रिया शामिल नहीं होती। दूसरी ओर, ठहलना एक ऐच्छिक क्रिया है जो मस्तिष्क के निर्देश पर होती है, जैसे चलना, दौड़ना या बोलना। इसमें हमारी इच्छा और सोच शामिल होती है।


प्रश्न 2.

दो तंत्रिका कोशिकाओं (ब्यूरॉन) के मध्य अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) में क्या होता है?


उत्तर:
सिनेप्स वह सूक्ष्म अंतराल है जहाँ दो तंत्रिका कोशिकाएँ मिलती हैं। जब एक तंत्रिका कोशिका से विद्युत आवेग (सिग्नल) सिनेप्स तक पहुँचता है, तो वहाँ से कुछ विशेष रासायनिक पदार्थ (न्यूरोट्रांसमीटर) छोड़े जाते हैं। ये रसायन सिनेप्स के अंतराल को पार करके अगली तंत्रिका कोशिका को उत्तेजित करते हैं और आवेग को आगे बढ़ाते हैं। इस प्रकार सूचना का संचार जारी रहता है।


प्रश्न 3.

मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है? (2011)


उत्तर:
मस्तिष्क का अनुमस्तिष्क (Cerebellum) भाग शरीर की स्थिति, संतुलन और पेशीय समन्वय का अनुरक्षण (रखरखाव) करता है। यह हमें सीधा खड़े रहने, चलने, दौड़ने और अन्य सभी सुसंगत गतिविधियों को सही ढंग से करने में मदद करता है।


प्रश्न 4.

हम एक अगरबत्ती की गंध का पता कैसे लगाते हैं?


उत्तर:
हम अगरबत्ती की गंध का पता अपनी नाक में स्थित घ्राण ग्राही कोशिकाओं द्वारा लगाते हैं। जब अगरबत्ती के सुगंधित अणु हवा के साथ हमारी नाक में पहुँचते हैं, तो ये ग्राही उत्तेजित हो जाते हैं और तंत्रिकाओं के माध्यम से संकेत हमारे मस्तिष्क के घ्राण केन्द्र तक पहुँचाते हैं। मस्तिष्क इस संकेत की व्याख्या करके हमें गंध का पता चलाता है और उसे पहचानता है।


प्रश्न 5.

प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्‍या भूमिका है?


उत्तर:
प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती है। ये क्रियाएँ मेरुरज्जु (स्पाइनल कॉर्ड) द्वारा नियंत्रित होती हैं ताकि प्रतिक्रिया त्वरित और स्वचालित हो सके, जैसे काँटा चुभने पर पैर हटाना। हालाँकि, प्रतिवर्ती क्रिया होने के बाद, मेरुरज्जु से सूचना मस्तिष्क तक पहुँचती है, जिससे हमें उस घटना का बोध होता है कि क्या हुआ था।


अनुच्छेद 7.2 पर आधारित


प्रश्न 1.

पादप हॉमोंन क्‍या हैं?


उत्तर:
पादप हॉर्मोन पौधों के विशिष्ट ऊतकों द्वारा उत्पादित रासायनिक पदार्थ हैं जो बहुत कम मात्रा में पौधों की वृद्धि, विकास और विभिन्न क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं। इन्हें फाइटोहॉर्मोन भी कहते हैं।
उदाहरण: ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एब्सिसिक अम्ल आदि।


प्रश्न 2,

छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है?


उत्तर:
छुई-मुई की पत्तियों की गति एक अनुवर्तन नहीं है, बल्कि यह एक स्पर्शानुकूली गति (सिस्मोनैस्टी) है। यह गति स्पर्श उद्दीपन के प्रति होती है और इसकी दिशा उद्दीपन की दिशा पर निर्भर नहीं करती।
जबकि, प्रकाश की ओर प्ररोह (तने) की गति एक अनुवर्तन (प्रकाशानुवर्तन) है। यह गति प्रकाश उद्दीपन के प्रति होती है और इसकी दिशा निश्चित होती है, अर्थात प्ररोह प्रकाश स्रोत की ओर बढ़ता है।


प्रश्न 3.

एक पादप हॉर्मोन का उदाहरण दीजिए जो वृद्धि को बढ़ाता है।


उत्तर:
जिबरेलिन (Gibberellin) एक पादप हॉर्मोन है जो तने की लंबाई बढ़ाकर वृद्धि को बढ़ाता है। यह फलों के आकार को बढ़ाने और बीज के अंकुरण में भी सहायक होता है।


Wa 4.

किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार सहायक है?


उत्तर:
जब एक प्रतान (क्लाइम्बिंग स्टेम, जैसे मटर का तना) किसी सहारे को छूता है, तो स्पर्श वाला भाग ऑक्सिन हॉर्मोन के प्रति संवेदनशील हो जाता है। ऑक्सिन सहारे वाले हिस्से से दूर, प्रतान के विपरीत भाग में एकत्रित हो जाता है। इस एकत्रित ऑक्सिन के कारण विपरीत भाग की कोशिकाओं का तेजी से विभाजन और दीर्घीकरण होता है। परिणामस्वरूप, प्रतान सहारे से दूर हटकर तेजी से बढ़ता है और गोलाकार घूमते हुए सहारे के चारों ओर लिपट जाता है।


प्रश्न 5.

जलानुवर्तन दर्शाने के लिए एक प्रयोग की अभिकल्पना कीजिए।


उत्तर:
जलानुवर्तन (हाइड्रोट्रोपिज़्म) दर्शाने के लिए निम्नलिखित प्रयोग किया जा सकता है:
सामग्री: एक बड़ा बीकर, मृदा, पानी, एक प्लास्टिक शीट या पतली प्लेट, और मटर या मूंग के बीज।
विधि:

  1. बीकर में मृदा भर लें।
  2. प्लास्टिक शीट की सहायता से मृदा को बीच में से दो बराबर भागों में अलग कर दें।
  3. एक भाग की मृदा को नम (गीला) रखें और दूसरे भाग को सूखा रहने दें।
  4. दोनों भागों में समान रूप से कुछ बीज बो दें।
  5. बीकर को उचित प्रकाश और तापमान पर रख दें।
  6. कुछ दिनों बाद जब बीज अंकुरित होकर पौधे बन जाएँ, तो अवलोकन करें।
प्रेक्षण: हम देखेंगे कि पौधों की जड़ें नम मृदा वाले भाग की ओर मुड़कर बढ़ती हैं, जबकि सूखी मृदा वाले भाग से दूर रहती हैं।
निष्कर्ष: यह प्रयोग दर्शाता है कि जड़ें जल (नमी) की ओर अनुवर्तन करती हैं, अर्थात वे जलानुवर्ती होती हैं।

[चित्र: जलानुवर्तन प्रयोग]
बीकर
सूखी मृदा | नम मृदा
प्लास्टिक शीट
(जड़ें नम मृदा की ओर मुड़ती हुई दिखाई देंगी)


अनुच्छेद 7.3 पर आधारित


प्रश्न 1.

जंतुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?


उत्तर:
जंतुओं में रासायनिक समन्वय हॉर्मोन नामक रासायनिक दूतों के द्वारा होता है। ये हॉर्मोन शरीर की विभिन्न अंतःस्रावी ग्रंथियों (जैसे पीयूष ग्रंथि, थायरॉइड, अग्न्याशय आदि) द्वारा स्रावित होते हैं और सीधे रुधिर में मिल जाते हैं। रुधिर के प्रवाह के साथ ये हॉर्मोन शरीर के विशिष्ट लक्ष्य अंगों या ऊतकों तक पहुँचते हैं और उनकी क्रियाओं को नियंत्रित व समन्वित करते हैं।


प्रश्न 2.

आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्‍यों दी जाती है?


उत्तर:
आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि आयोडीन थायरॉक्सिन हॉर्मोन के संश्लेषण के लिए एक आवश्यक खनिज है। थायरॉक्सिन हॉर्मोन थायरॉइड ग्रंथि द्वारा बनाया जाता है और यह शरीर के उपापचय (मेटाबॉलिज्म), वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है। यदि भोजन में आयोडीन की कमी होगी, तो थायरॉक्सिन का निर्माण कम होगा, जिससे घेघा (Goitre) नामक रोग हो सकता है। आयोडीन युक्त नमक इस कमी को पूरा करने का एक सरल और सस्ता उपाय है।


प्रश्न 3.

जब एडीनलीन रुधिर में स्नावित होता है तो हमारे शरीर में क्‍या अनुक्रिया होती है?


उत्तर:
एड्रीनलीन एक "लड़ो या भागो" (Fight or Flight) हॉर्मोन है। जब यह तनाव, भय या उत्तेजना की स्थिति में अधिवृक्क ग्रंथियों से रुधिर में स्रावित होता है, तो हमारे शरीर में निम्नलिखित अनुक्रियाएँ होती हैं:

  • हृदय गति तेज हो जाती है ताकि मांसपेशियों को अधिक ऑक्सीजन और ग्लूकोज की आपूर्ति हो सके।
  • श्वसन दर बढ़ जाती है।
  • पाचन तंत्र और त्वचा की ओर जाने वाले रुधिर की मात्रा कम हो जाती है, ताकि मुख्य रक्त प्रवाह मांसपेशियों और मस्तिष्क की ओर केंद्रित रहे।
  • रुधिर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है ताकि तत्काल ऊर्जा मिल सके।
इन सभी परिवर्तनों से शरीर किसी आपात स्थिति या चुनौती का सामना करने के लिए तत्काल तैयार हो जाता है।


प्रश्न 4.

मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की जाती है?


उत्तर:
मधुमेह (डायबिटीज) के कुछ रोगियों, विशेषकर टाइप-1 डायबिटीज वाले रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर इसलिए की जाती है क्योंकि उनके अग्न्याशय में स्थित लैंगरहैंस की द्वीपिकाएँ पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन हॉर्मोन का निर्माण नहीं कर पातीं। इंसुलिन का कार्य रुधिर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करना है; यह कोशिकाओं को ग्लूकोज ग्रहण करने के लिए प्रेरित करता है। इंसुलिन की कमी से रुधिर में शर्करा का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है। बाहर से इंजेक्शन द्वारा इंसुलिन देकर इस कमी को पूरा किया जाता है और रुधिर शर्करा को सामान्य स्तर पर लाया जाता है।


Bihar Board Class 10 Science नियंत्रण एवं समन्वय


प्रश्न 1.

निम्नलिखित में से कौन-सा पादप हॉर्मोन है?
(9) इंसुलिन
(७) थायरॉक्सिंन
(८) एस्ट्रोजन
(०) साइटोकाइनिन


उत्तर: (०) साइटोकाइनिन
व्याख्या: साइटोकाइनिन एक पादप हॉर्मोन है जो कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है। इंसुलिन और थायरॉक्सिन जंतु हॉर्मोन हैं, जबकि एस्ट्रोजन एक मानव सेक्स हॉर्मोन है।


प्रश्न 2.

दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को कहते हैं -
(9) द्रुमिका
(७) सिनेप्स
(८) एक्सॉन
(१) आवेग


उत्तर: (७) सिनेप्स
व्याख्या: सिनेप्स दो न्यूरॉन्स के बीच का अत्यंत सूक्ष्म अंतराल होता है जहाँ रासायनिक संचार होता है। द्रुमिका (डेंड्राइट) संकेत ग्रहण करती है, एक्सॉन (एक्सॉन) संकेत संचारित करता है और आवेग (इम्पल्स) विद्युत-रासायनिक संकेत को कहते हैं।


प्रश्न 3.

मस्तिष्क उत्तरदायी है -
(9) सोचने के लिए
(०) हृदय स्पंदन के लिए
(८) शरीर का संतुलन बनाने के लिए
(०) उपरोक्त सभी


उत्तर: (०) उपरोक्त सभी
व्याख्या: मस्तिष्क शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र है। प्रमस्तिष्क (सेरेब्रम) सोच, सीखने और स्मृति के लिए जिम्मेदार है। मेडुला ऑब्लोंगेटा अनैच्छिक क्रियाएँ जैसे हृदय स्पंदन और श्वसन नियंत्रित करता है। अनुमस्तिष्क (सेरेबेलम) शरीर का संतुलन और पेशीय समन्वय बनाए रखता है।


प्रश्न 4.

हमारे शरीर में ग्राही का क्‍या कार्य है? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों। क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?


उत्तर:
ग्राहियों का कार्य: ग्राही हमारी ज्ञानेंद्रियों और शरीर के विभिन्न भागों में स्थित विशेष कोशिकाएँ हैं। इनका मुख्य कार्य बाहरी वातावरण (जैसे प्रकाश, ध्वनि, गंध, स्वाद, स्पर्श) या शरीर के आंतरिक परिवर्तनों (जैसे तापमान, रुधिर दाब) से उद्दीपनों (स्टिमुलाई) को ग्रहण करना और उन्हें तंत्रिकीय आवेगों (इम्पल्स) में बदलकर तंत्रिका तंत्र या मस्तिष्क तक पहुँचाना है।

ग्राहियों के ठीक से कार्य न करने पर समस्याएँ: यदि ग्राही ठीक से कार्य नहीं करेंगे, तो हमारा शरीर वातावरण के साथ प्रभावी ढंग से अनुक्रिया नहीं कर पाएगा, जिससे गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। उदाहरण के लिए:

  • दृष्टि ग्राही (रेटिना) क्षतिग्रस्त होने पर: दृष्टि हानि या अंधापन हो सकता है।
  • श्रवण ग्राही (कॉक्लिया में) क्षतिग्रस्त होने पर: सुनने में कठिनाई या बहरापन हो सकता है।
  • स्वाद या घ्राण ग्राही काम न करने पर: भोजन का स्वाद या गंध नहीं आएगी, जिससे भूख कम लगेगी और पोषण की कमी हो सकती है।
  • त्वचा के स्पर्श या दर्द ग्राही काम न करने पर: गर्म वस्तु से जलने या चोट लगने का पता नहीं चलेगा, जिससे गंभीर क्षति हो सकती है।
  • शरीर की आंतरिक स्थिति के ग्राही काम न करने पर: रुधिर दाब या शर्करा स्तर में असंतुलन का पता नहीं चलेगा, जो जानलेवा हो सकता है।
इस प्रकार, ग्राही हमारे शरीर और पर्यावरण के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं और इनके सुचारु कार्य के बिना सुरक्षित एवं स्वस्थ जीवन संभव नहीं है।


[चित्र: तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) का आरेख]
वृक्षिका (द्रुमिका)
कोशिकाकाय | केन्द्रक | एक्सॉन आच्छद
मायलिन आच्छद | तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन)
अंत:स्थिति | तंत्रिका पेशी युग्मानुबन्ध
वृक्षिकान्त

1. पादप हॉर्मोन क्या है ?

पादप हॉर्मोन वे रासायनिक पदार्थ हैं जो पौधों के विशिष्ट कोशिकाओं द्वारा उत्पन्न होते हैं और पौधे के विभिन्न भागों में स्थानांतरित होकर विशिष्ट कार्यों का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं। ये वृद्धि, विकास, परिपक्वता और पर्यावरण के प्रति प्रतिक्रिया जैसी जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के लिए, ऑक्सिन कोशिका विस्तार को बढ़ावा देता है, जिबरेलिन तने की लंबाई बढ़ाता है, और साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है।

2. एक तने की प्रकाशानुवर्तन गति दर्शाने के लिए एक क्रियाकलाप का वर्णन करें।

क्रियाकलाप: तने की प्रकाशानुवर्तन गति का प्रदर्शन

सामग्री: एक स्वस्थ पौधा (जैसे गेहूं या चने का), एक कार्डबोर्ड बॉक्स जिसकी एक साइड में एक छोटा सा छेद हो, और एक खिड़की या प्रकाश स्रोत।

विधि:
  1. पौधे को एक कमरे में रखें जहाँ प्रकाश केवल एक दिशा से आ रहा हो।
  2. कार्डबोर्ड बॉक्स को पौधे पर इस तरह से रखें कि बॉक्स का छेद प्रकाश स्रोत की विपरीत दिशा में हो।
  3. कुछ दिनों तक नियमित रूप से पौधे को पानी देते रहें और उसकी स्थिति का अवलोकन करें।
प्रेक्षण: आप देखेंगे कि पौधे का तना धीरे-धीरे मुड़कर बॉक्स के छेद की ओर बढ़ने लगता है, जहाँ से प्रकाश आ रहा है।

निष्कर्ष: यह प्रयोग दर्शाता है कि पौधे का तना प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) प्रदर्शित करता है, अर्थात वह प्रकाश की दिशा की ओर वृद्धि करता है। यह प्रक्रिया ऑक्सिन हॉर्मोन के असमान वितरण के कारण होती है।

3. प्रतिवर्ती क्रिया और टहलने के बीच क्या अंतर है ?

प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) टहलना (Walking)
यह एक अनैच्छिक, तीव्र एवं स्वचालित प्रतिक्रिया है जो किसी उद्दीपन के प्रति होती है। यह एक स्वैच्छिक, नियंत्रित एवं जानबूझकर की जाने वाली गति है।
इसमें मस्तिष्क की भागीदारी नहीं होती; यह मेरुरज्जु (Spinal Cord) द्वारा नियंत्रित होती है। इसमें मस्तिष्क की सक्रिय भागीदारी होती है, जो गति का नियोजन और नियंत्रण करता है।
उदाहरण: गर्म वस्तु को छूते ही हाथ का सिकुड़ जाना, आँख में कुछ गिरते ही पलकों का झपकना। उदाहरण: स्कूल जाना, पार्क में घूमना, किसी वस्तु की ओर जाना।
यह शरीर को अचानक खतरे से बचाती है। यह दैनिक कार्यों को करने में सहायक है।

4. अंत:स्रावी ग्रंथि द्वारा स्रावित हॉर्मोन का क्या कार्य है ?

अंत:स्रावी ग्रंथियाँ रक्त में हॉर्मोन स्रावित करती हैं। इन हॉर्मोनों के प्रमुख कार्य हैं:
  • शारीरिक प्रक्रियाओं का नियमन: वृद्धि, विकास, चयापचय (मेटाबॉलिज्म), प्रजनन आदि को नियंत्रित करना।
  • रासायनिक समन्वय: शरीर के विभिन्न अंगों और ऊतकों के बीच संचार स्थापित करना ताकि वे समन्वित रूप से कार्य कर सकें।
  • होमियोस्टेसिस: शरीर के आंतरिक वातावरण (जैसे रक्त शर्करा, तापमान, जल संतुलन) को स्थिर बनाए रखना।
  • तनाव प्रतिक्रिया: आपात स्थितियों में शरीर को तैयार करना (जैसे एड्रेनलीन हॉर्मोन द्वारा)।
उदाहरण के लिए, थायरॉक्सिन हॉर्मोन चयापचय दर को नियंत्रित करता है, जबकि इंसुलिन रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।

5. न्यूरॉन की संरचना एवं कार्य का वर्णन करें।

न्यूरॉन की संरचना
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की मूलभूत संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है।

संरचना:
  • कोशिका काय (Cell Body): इसमें केंद्रक और कोशिकाद्रव्य होता है।
  • डेंड्राइट (Dendrites): ये छोटे, शाखान्वित प्रवर्ध होते हैं जो संवेदनाओं को ग्रहण करके कोशिका काय की ओर ले जाते हैं।
  • एक्सॉन (Axon): यह एक लंबा, तार जैसा प्रवर्ध है जो संदेश को कोशिका काय से दूर ले जाता है
  • सिनेप्स (Synapse): यह दो न्यूरॉन्स के बीच का अंतराल है जहाँ रासायनिक संकेतों का आदान-प्रदान होता है।
कार्य: न्यूरॉन का मुख्य कार्य तंत्रिका आवेगों (Nerve Impulses) के रूप में सूचना का संवहन करना है। यह संवेदी अंगों से मस्तिष्क और मेरुरज्जु तक संकेत पहुँचाता है तथा मस्तिष्क और मेरुरज्जु से प्रेरक अंगों (जैसे मांसपेशियाँ) तक आदेश पहुँचाता है।

6. पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है ?

पादप में प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) पौधे के अंगों का प्रकाश की दिशा की ओर (धनात्मक) या प्रकाश से दूर (ऋणात्मक) वृद्धि करने की प्रक्रिया है।

तंत्र:
  1. जब प्रकाश एक तरफ से आता है, तो पौधे के शीर्ष पर उपस्थित ऑक्सिन हॉर्मोन प्रकाश से दूर वाले हिस्से में एकत्रित हो जाता है।
  2. ऑक्सिन कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाने को प्रेरित करता है।
  3. चूंकि प्रकाश से दूर वाले हिस्से में ऑक्सिन की सांद्रता अधिक होती है, वहाँ की कोशिकाएँ अधिक लंबी हो जाती हैं।
  4. इस असमान वृद्धि के कारण तना प्रकाश की ओर मुड़ जाता है (धनात्मक प्रकाशानुवर्तन)।
उदाहरण: सूरजमुखी का फूल सूर्य की दिशा में मुड़ता है। इसके विपरीत, जड़ें प्रकाश से दूर वृद्धि करती हैं (ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन)।

7. मस्तिष्क के कौन-से भाग शरीर की गतिविधियों के समन्वय में सहायक हैं ?

मस्तिष्क के निम्नलिखित प्रमुख भाग शरीर की गतिविधियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:
  • सेरेब्रम (अग्रमस्तिष्क): यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है। यह स्वैच्छिक क्रियाएँ, सोच, तर्क, सीखना, भावनाएँ और संवेदी आवेगों का विश्लेषण करने का कार्य करता है।
  • सेरेबेलम (पश्चमस्तिष्क): यह शारीरिक संतुलन, मुद्रा और पेशीय क्रियाओं के सुचारू समन्वय के लिए उत्तरदायी है। यह सुनिश्चित करता है कि हमारी गतियाँ सहज और नियंत्रित रहें।
  • मेडुला ऑब्लोंगेटा (मस्तिष्क स्तंभ): यह मस्तिष्क और मेरुरज्जु को जोड़ता है तथा अनैच्छिक क्रियाएँ जैसे हृदय स्पंदन, श्वसन, रक्तचाप, छींकना, उल्टी आदि को नियंत्रित करता है।
इन सभी भागों का समन्वित कार्य ही हमें जटिल गतिविधियाँ करने और पर्यावरण के प्रति उचित प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है।

8. निम्नलिखित में से कौन पादप हॉर्मोन है ?
(A) इंसुलिन
(B) थायरॉक्सिन
(C) एस्ट्रोजन
(D) साइटोकाइनिन

(A) इंसुलिन - यह एक जंतु हॉर्मोन है जो अग्न्याशय द्वारा स्रावित होता है।
(B) थायरॉक्सिन - यह एक जंतु हॉर्मोन है जो थायरॉयड ग्रंथि द्वारा स्रावित होता है।
(C) एस्ट्रोजन - यह एक जंतु हॉर्मोन है जो अंडाशय द्वारा स्रावित होता है।
(D) साइटोकाइनिन - यह सही उत्तर है। साइटोकाइनिन एक पादप हॉर्मोन है जो कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है और पौधे की वृद्धि में सहायक होता है।

9. दो तंत्रिका कोशिका के मध्य अंतराल को कहते हैं-
(A) द्रुमिका
(B) सिनेप्स
(C) एक्सॉन
(D) आवेग

(A) द्रुमिका - यह न्यूरॉन की शाखाएँ (डेंड्राइट) हैं, जो संकेत ग्रहण करती हैं।
(B) सिनेप्स - यह सही उत्तर है। सिनेप्स दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) के बीच का अंतराल या संधि स्थल है, जहाँ रासायनिक संकेतों का आदान-प्रदान होता है।
(C) एक्सॉन - यह न्यूरॉन का लंबा प्रवर्ध है जो संकेत को दूर ले जाता है।
(D) आवेग - यह न्यूरॉन में प्रवाहित होने वाला विद्युत रासायनिक संकेत है।

10. मस्तिष्क उत्तरदायी है-
(A) सोचने के लिए
(B) हृदय स्पंदन के लिए
(C) शरीर का संतुलन बनाने के लिए
(D) उपरोक्त सभी

(A) सोचने के लिए - यह सेरेब्रम द्वारा नियंत्रित होता है।
(B) हृदय स्पंदन के लिए - यह मेडुला ऑब्लोंगेटा द्वारा नियंत्रित होता है।
(C) शरीर का संतुलन बनाने के लिए - यह सेरेबेलम द्वारा नियंत्रित होता है।
(D) उपरोक्त सभी - यह सही उत्तर है। मस्तिष्क के विभिन्न भाग इन सभी कार्यों के लिए उत्तरदायी हैं।

11. हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है ? ऐसी स्थिति पर विचार करें जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों। क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं ?

ग्राही (Receptors) का कार्य: ग्राही विशेष प्रकार की कोशिकाएँ या अंग हैं जो पर्यावरण से उद्दीपन (Stimuli) जैसे प्रकाश, ध्वनि, गर्मी, दबाव, रसायन आदि को ग्रहण करते हैं और उन्हें तंत्रिका आवेगों में परिवर्तित करते हैं ताकि तंत्रिका तंत्र उनका विश्लेषण कर सके।

ग्राही के ठीक से कार्य न करने पर उत्पन्न समस्याएँ:
  • दृष्टि दोष: यदि आँख के रेटिना में प्रकाश ग्राही (रॉड्स और कोन्स) क्षतिग्रस्त हों, तो व्यक्ति को दिखाई देना कम हो सकता है या अंधापन हो सकता है।
  • श्रवण हानि: यदि कान के कोक्लिया में ध्वनि ग्राही कार्य न करें, तो व्यक्ति को सुनने में कठिनाई या बहरापन हो सकता है।
  • स्पर्श संवेदनहीनता: त्वचा के स्पर्श ग्राही काम न करने पर व्यक्ति को गर्मी, सर्दी, दर्द या दबाव का पता नहीं चलेगा, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
  • संतुलन बिगड़ना: कान के अंदर स्थित संतुलन ग्राही के कार्य न करने पर चक्कर आना और शारीरिक संतुलन खोना जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
  • जीवन के लिए खतरा: गंध या स्वाद ग्राही काम न करने पर व्यक्ति खराब भोजन या जहरीली गैस का पता नहीं लगा पाएगा, जो खतरनाक साबित हो सकता है।

12. एक जीव में नियंत्रण एवं समन्वय के तंत्र कौन-कौन से हैं ?

एक जीव (विशेषकर मनुष्य) में नियंत्रण एवं समन्वय के प्रमुखतः दो तंत्र होते हैं:
  1. तंत्रिका तंत्र (Nervous System):
    • यह विद्युत रासायनिक आवेगों के माध्यम से कार्य करता है।
    • यह तेज गति से प्रतिक्रिया देता है (मिलीसेकंड में)।
    • इसकी प्रतिक्रिया अस्थायी होती है।
    • इसके अंतर्गत मस्तिष्क, मेरुरज्जु और तंत्रिकाएँ आती हैं।
    • उदाहरण: हाथ को तेजी से हटाना, दौड़ना, बोलना।
  2. अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System):
    • यह हॉर्मोन नामक रासायनिक दूतों के माध्यम से कार्य करता है।
    • इसकी प्रतिक्रिया धीमी होती है (सेकंड से दिनों तक)।
    • इसकी प्रतिक्रिया दीर्घकालिक होती है।
    • इसके अंतर्गत विभिन्न अंतःस्रावी ग्रंथियाँ जैसे पीयूष ग्रंथि, थायरॉयड, अग्न्याशय आदि आती हैं।
    • उदाहरण: वृद्धि, यौवनारंभ, रक्त शर्करा का नियमन।
ये दोनों तंत्र मिलकर शरीर के सभी अंगों के कार्यों में सामंजस्य स्थापित करते हैं और जीव को पर्यावरण के अनुकूल ढलने में मदद करते हैं।

13. छुई-मुई पादप में गति किस कारण से होती है ?

छुई-मुई (Mimosa pudica) पादप में गति विस्पंदन गति (Seismonastic Movement) के कारण होती है, जो एक प्रकार की अनुवर्तन गति (Nastic Movement) है।

कारण एवं तंत्र:
  1. जब पौधे के पत्तों को छुआ जाता है, तो स्पर्श का उद्दीपन पत्तियों के आधार में स्थित विशेष कोशिकाओं तक तंत्रिका जैसे ऊतकों द्वारा पहुँचता है।
  2. इन कोशिकाओं में पानी का दबाव (टर्गर प्रेशर) अचानक कम हो जाता है क्योंकि पानी कोशिकाओं से बाहर निकल जाता है।
  3. पानी के दबाव में कमी के कारण कोशिकाएँ सिकुड़ जाती हैं, जिससे पत्तियों का आधार कमजोर पड़ जाता है।
  4. इसके परिणामस्वरूप पत्तियाँ नीचे की ओर झुक जाती हैं और पूरी शाखा मुरझा सी जाती है।
  5. कुछ समय बाद, जब उद्दीपन समाप्त हो जाता है, तो कोशिकाएँ पुनः पानी अवशोषित कर लेती हैं, टर्गर प्रेशर बहाल होता है और पत्तियाँ अपनी मूल अवस्था में वापस आ जाती हैं।
यह गति पौधे को कीटों या अन्य शाकाहारियों से बचाने के लिए एक सुरक्षा तंत्र के रूप में कार्य करती है।

14. जंतु हॉर्मोन क्या है ? यह किस प्रकार से कार्य करता है ?

जंतु हॉर्मोन: जंतु हॉर्मोन रासायनिक दूत पदार्थ हैं जो शरीर की विशिष्ट अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित होते हैं और सीधे रक्त में मिलकर शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचते हैं। ये शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं का नियमन करते हैं।

कार्य करने का तरीका:
  1. स्रावण: एक विशिष्ट ग्रंथि (जैसे थायरॉयड, अग्न्याशय) उत्तेजना मिलने पर हॉर्मोन का स्राव करती है।
  2. परिवहन: हॉर्मोन रक्त प्रवाह द्वारा शरीर के सभी भागों में पहुँचाए जाते हैं।
  3. लक्ष्य अंग पर प्रभाव: प्रत्येक हॉर्मोन केवल विशिष्ट लक्ष्य अंगों या ऊतकों की कोशिकाओं पर ही कार्य करता है, जिनकी कोशिकाओं की झिल्ली पर उस हॉर्मोन के लिए विशेष ग्राही (Receptors) होते हैं।
  4. रासायनिक संकेत: हॉर्मोन ग्राही से जुड़कर कोशिका के अंदर एक रासायनिक संकेत प्रारंभ करता है, जो कोशिका के कार्य में परिवर्तन लाता है।
  5. प्रतिक्रिया: इससे लक्ष्य अंग की क्रिया या तो बढ़ जाती है या कम हो जाती है, जिससे शरीर का संतुलन बना रहता है।
उदाहरण: इंसुलिन हॉर्मोन अग्न्याशय द्वारा स्रावित होता है और यकृत तथा मांसपेशियों की कोशिकाओं को रक्त से ग्लूकोज अवशोषित करने का संकेत देकर रक्त शर्करा का स्तर कम करता है।

बीज रहित फल प्राप्त करने में किया जाता है - (2012, 13) या बीजरहित फलन को प्रोत्साहित करने वाला पादप हॉर्मोन है - (2017)

उत्तर: (स) जिबरेलिन्स


प्रश्न 14. पतझड़ से सम्बन्धित हॉर्मोन होता है - (2015)

उत्तर: (स) एब्सिसिक अम्ल


प्रश्न 15. निम्नलिखित में कौन पादप हॉर्मोन है? (2015)

उत्तर: (ख) जिबरेलिन


प्रश्न16. पुरुष के वृषण द्वारा स्रावित हॉर्मोन्स का नाम है - (2011)

उत्तर: (ग) टेस्टोस्टीरॉन तथा एन्‍्डोस्टीरॉन


प्रश्न 17. नर जनन अंगों से सम्बन्धित ग्रन्थि है. - (2013, 14) या केवल बर में पायी जाने वाली ग्रब्धि है -

उत्तर: (ग) प्रोस्टेट ग्रन्थि


प्रश्न 18. मादा लिंग हॉर्मोन कहलाता है - (2013, 14, 17, 18)

उत्तर: (ग) एस्ट्रोजेन


प्रश्न 19. ऑक्सीटोसिन का स्रावण कहाँ से होता है? (2015)

उत्तर: (ग) पीयूष (पिट्यूटरी)


प्रश्न 20. किस हॉर्मोन की कमी से मधुमेह रोग हो जाता है ? (2011, 12)

उत्तर: (क) इन्सुलिन


प्रश्न 21. थाइरॉक्सीन हॉर्मोन की कमी से होता है (2017)

उत्तर: (क) घेघा रोग


प्रश्न 22. कैल्सियम तथा फॉस्फोरस के उपापचय के नियन्त्रण हेतु हॉर्मोन स्रावित होता है (2016)

उत्तर: (क) पैराथाइरॉइड


प्रश्न 23, पीयूष ग्रन्थि की पश्चयाली से निकलने वाला हॉर्मोन है -

उत्तर: (ग) वैसोप्रेसिन


प्रश्न 24. TS Hea ATA ग्रब्थि जो मस्तिष्क में पायी जाती है, है - (2010, 16)

उत्तर: (घ) पीयूष ग्रन्थि


प्रश्न 25. मास्टर गन्थि है - (2018)

उत्तर: (घ) पीयूष


प्रश्न 26. मनुष्य में पायी जाने वाली मिश्रित ग्रंथि है - (2018)

उत्तर: (ग) अग्न्याशय ग्रंथि


अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. होम्योस्टैसिस क्‍या है? उदाहरण सहित लिखिए। (2010, 16)

उत्तर: होम्योस्टैसिस (समस्थैतिकता) शरीर के आंतरिक वातावरण (जैसे तापमान, pH, जल की मात्रा, रक्त में ग्लूकोज स्तर आदि) को एक स्थिर और संतुलित अवस्था में बनाए रखने की प्रक्रिया है। यह एक स्वनियामक प्रक्रिया है जो शरीर के विभिन्न तंत्रों के नियमन, नियंत्रण और समन्वय के द्वारा संभव होती है। उदाहरण के लिए, गर्मी में पसीना आकर शरीर का तापमान स्थिर रखना या रक्त में शर्करा का स्तर इंसुलिन द्वारा नियंत्रित होना होम्योस्टैसिस के उदाहरण हैं।


प्रश्न 2, यदि किसी तनब्त्रिका कोशिका के सभी डेन्डॉन्स तथा डेन्डाइट्स काट दिये जायें तो उस जन्तु की दिनचर्या पर क्या प्रभाव पड़ेगा? (2011)

उत्तर: डेंड्राइट्स तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) के वे भाग हैं जो संवेदनाओं को ग्रहण करते हैं। यदि किसी न्यूरॉन के सभी डेंड्राइट्स काट दिए जाएं, तो वह न्यूरॉन बाहरी उद्दीपनों (जैसे स्पर्श, दर्द, गर्मी आदि) को ग्रहण नहीं कर पाएगा। इसका परिणाम यह होगा कि जंतु अपने पर्यावरण से आने वाली संवेदनाओं के प्रति अनुक्रिया नहीं कर पाएगा, जिससे उसकी सामान्य दिनचर्या और सुरक्षा प्रतिक्रियाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी।


प्रश्न 3. मेरुरज्जु (सुषुम्ना)की गुहा तथा उसमें पाये जाने वाले द्रव का नाम बताइए। (2009)

उत्तर: मेरुरज्जु (स्पाइनल कॉर्ड) के बीच में एक नलिकानुमा गुहा होती है, जिसे केन्द्रीय नहर (Central Canal) या न्यूरोसील कहते हैं। इस गुहा में एक विशेष प्रकार का द्रव भरा रहता है, जिसे सेरेब्रोस्पाइनल द्रव (Cerebrospinal Fluid - CSF) कहा जाता है। यह द्रव मस्तिष्क और मेरुरज्जु को आघात से बचाता है तथा पोषण प्रदान करता है।


प्रश्न 4. एक व्यक्ति के हाथ में आलपिन चुभा दी गई। उसने हाथ झटके से तुरन्त हटा लिया। इस कार्य में कौन-सी घटना घटित हुई? (2011)

उत्तर: इस कार्य में प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) घटित हुई। यह एक अनैच्छिक, तीव्र और स्वचालित प्रतिक्रिया है जो मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है। दर्द का संकेत संवेदी न्यूरॉन द्वारा मेरुरज्जु तक पहुँचता है, जहाँ तुरंत प्रेरक न्यूरॉन को आदेश मिलता है और हाथ की मांसपेशियाँ सिकुड़कर हाथ को झटके से हटा लेती हैं।


प्रश्न 5. सरल एवं प्रतिबन्धित प्रतिवर्ती क्रियाओं में अन्तर कीजिए।

उत्तर:
सरल (अननुबन्धित) प्रतिवर्ती क्रिया:

  1. यह जन्मजात होती है, इसे सीखने की आवश्यकता नहीं होती।
  2. यह तीव्र, स्वचालित और मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है।
  3. उदाहरण: गर्म वस्तु को छूते ही हाथ का हटना, आँख में कुछ गिरते ही पलकों का झपकना।
प्रतिबन्धित (अर्जित) प्रतिवर्ती क्रिया:
  1. यह अनुभव, अभ्यास या प्रशिक्षण के द्वारा सीखी जाती है।
  2. इसमें मस्तिष्क का प्रमुख योगदान होता है और यह धीरे-धीरे विकसित होती है।
  3. उदाहरण: साइकिल चलाना, पियानो बजाना, पढ़ते समय शब्दों का उच्चारण।


प्रश्न 6. ऑक्सिन तथा साइटोकाइनिन के मुख्य कार्य लिखिए। (2017)

उत्तर:
ऑक्सिन के मुख्य कार्य:

  1. पौधों के तनों में कोशिकाओं के दीर्घीकरण (लंबाई में बढ़ना) को प्रेरित करना।
  2. जड़ निर्माण को बढ़ावा देना।
  3. पार्श्व कलिकाओं के विकास को रोककर शीर्ष प्रभाविता (एपिकल डॉमिनेंस) बनाए रखना।
  4. फलों के विकास में सहायता करना।
साइटोकाइनिन के मुख्य कार्य:
  1. पौधों में कोशिका विभाजन (साइटोकाइनेसिस) को प्रेरित करना।
  2. पार्श्व कलिकाओं के विकास को प्रोत्साहित करना।
  3. पत्तियों के बूढ़े होने की प्रक्रिया (वृद्धावस्था) को विलंबित करना।
  4. बीज के अंकुरण में सहायता करना।


प्रश्न 7. एथिलीन का पौधों की वृद्धि एवं फल के पकने पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: एथिलीन एक गैसीय पादप हॉर्मोन है जिसका पौधों की वृद्धि और फल पकने पर विशेष प्रभाव पड़ता है।
वृद्धि पर प्रभाव: एथिलीन तने की लंबाई में वृद्धि को रोकने का काम करता है, इसलिए इसे वृद्धि रोधक माना जाता है। यह तने को मोटा करने में सहायक होता है।
फल पकने पर प्रभाव: एथिलीन को 'पकाने वाला हॉर्मोन' कहा जाता है। यह फलों के पकने की प्रक्रिया को तेज करता है। यह फलों में रंग परिवर्तन, मृदुता (नरम होना) और मिठास बढ़ाने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं को प्रारंभ करता है। इसी गुण के कारण कच्चे फलों को एथिलीन गैस के संपर्क में लाकर कृत्रिम रूप से पकाया जाता है।


प्रश्न 8. किस अन्‍्तःस्रावी ग्रब्थि के हॉर्मोन की कमी से घंघा रोग हो जाता है?एक प्रारम्भिक बचाव लिखिए। (2009)

उत्तर: थाइरॉइड ग्रंथि द्वारा स्रावित थाइरॉक्सिन नामक हॉर्मोन की कमी से घेघा (Goitre) रोग हो जाता है। थाइरॉक्सिन के निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक है। आयोडीन की कमी से थाइरॉक्सिन का स्राव कम होता है और थाइरॉइड ग्रंथि आकार में बढ़ जाती है, जिसे घेघा कहते हैं।
प्रारंभिक बचाव: इस रोग से बचने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है आयोडीन युक्त नमक (आयोडाइज्ड साल्ट) का नियमित सेवन करना।


प्रश्न 9. इन्सुलिन का क्या महत्त्व है? यह कहाँ बनता है? (2009, 12, 14)

उत्तर:
इंसुलिन का महत्व: इंसुलिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण हॉर्मोन है जो रक्त में ग्लूकोज (शर्करा) के स्तर को नियंत्रित करता है। इसके मुख्य कार्य हैं:

  1. यह शरीर की कोशिकाओं (विशेषकर मांसपेशियों और यकृत की कोशिकाओं) को रक्त से ग्लूकोज ग्रहण करने के लिए प्रेरित करता है।
  2. यह अतिरिक्त ग्लूकोज को यकृत और मांसपेशियों में ग्लाइकोजन के रूप में संचित करने की प्रक्रिया (ग्लाइकोजेनेसिस) को बढ़ावा देता है।
  3. इस प्रकार यह रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य सीमा में बनाए रखता है। इंसुलिन की कमी से मधुमेह (डायबिटीज) रोग हो जाता है।
निर्माण स्थल: इंसुलिन अग्न्याशय (Pancreas) में स्थित विशेष कोशिकाओं के समूहों, लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) की 'बीटा (β)' कोशिकाओं द्वारा बनाया और स्रावित किया जाता है।


प्रश्न 10. मनुष्य में उपापचयी रोग विकार का संक्षेप में वर्णन कीजिए। (2013)

उत्तर: यहाँ उपापचयी रोग विकार से तात्पर्य मधुमेह (डायबिटीज मेलिटस) से है। यह एक चयापचय संबंधी विकार है जो अग्न्याशय द्वारा पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन हॉर्मोन न बन पाने के कारण होता है। इंसुलिन की कमी से शरीर की कोशिकाएं रक्त से ग्लूकोज को ऊर्जा के लिए उपयोग नहीं कर पातीं। साथ ही, यकृत और मांसपेशियों में ग्लूकोज का ग्लाइकोजन में परिवर्तन भी कम हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप रक्त में ग्लूकोज का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इस स्थिति को हाइपरग्लाइसीमिया कहते हैं। इसके लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, वजन कम होना और थकान शामिल हैं।


प्रश्न 11. इन्सुलिन के अल्पस्राव से रुधिर में ग्लूकोज की प्रतिशत मात्रा बढ़ जाने वाले रोग का नाम लिखिए। (201)

उत्तर: मधुमेह या डायबिटीज मेलिटस (Diabetes Mellitus)।


लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. after det feos Hed हैं तथा यह कितने प्रकार का होता है? (2017)

उत्तर: प्रश्न पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं है, लेकिन संदर्भ के आधार पर लगता है कि यह तंत्रिका तंत्र के बारे में पूछा गया है। मनुष्य सहित सभी कशेरुकी जंतुओं में तंत्रिका तंत्र एक अत्यंत जटिल और संगठित तंत्र है जो विशेष प्रकार के ऊतक, तंत्रिका ऊतक से बना होता है। इस ऊतक की मूल इकाई तंत्रिका कोशिका या न्यूरॉन है। तंत्रिका तंत्र को मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा गया है:

  1. केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System - CNS): इसमें मस्तिष्क (Brain) और मेरुरज्जु (Spinal Cord) आते हैं। यह सूचनाओं का एकीकरण और नियंत्रण केंद्र है।
  2. परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System - PNS): इसमें मस्तिष्क और मेरुरज्जु से निकलने वाली सभी तंत्रिकाएँ (नसें) शामिल हैं। यह केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को शरीर के विभिन्न अंगों से जोड़ता है।
  3. स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System - ANS): यह परिधीय तंत्रिका तंत्र का ही एक भाग है जो अनैच्छिक क्रियाओं (जैसे हृदय की धड़कन, पाचन, साँस लेना) को नियंत्रित करता है। इसे आगे सहानुभूति (Sympathetic) और परानुभूति (Parasympathetic) तंत्र में बाँटा जाता है।


प्रश्न 2. मेरुरज्जु (AYA) की अनुप्रस्थ काट का नामांकित चित्र बनाइए। (2017) या सुषुम्रा की संरचना का वर्णन नामांकित चित्र बनाकर कीजिए। (2013, 15) या मेरुरज्जु किसे कहते हैं? इसके प्रमुख कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:
मेरुरज्जु (Spinal Cord): मेरुरज्जु मस्तिष्क का पिछला भाग है जो खोपड़ी के आधार से निकलकर रीढ़ की हड्डी (Vertebral Column) के अंदर सुरक्षित एक लंबी, बेलनाकार रचना के रूप में फैली रहती है। यह लगभग 45 सेमी लंबी होती है।
प्रमुख कार्य:

  1. प्रतिवर्ती क्रियाओं का केंद्र: यह सरल प्रतिवर्ती क्रियाओं (जैसे हाथ हटाना, घुटने की प्रतिवर्ती क्रिया) का केंद्र है।
  2. संवहनी मार्ग: यह मस्तिष्क और शरीर के विभिन्न अंगों के बीच संवेदी और प्रेरक संकेतों के आदान-प्रदान का मुख्य मार्ग है।
  3. सुरक्षात्मक भूमिका: यह रीढ़ की हड्डी में सुरक्षित रहती है और सेरेब्रोस्पाइनल द्रव से घिरी रहती है, जो आघात से बचाता है।
संरचना (अनुप्रस्थ काट में): मेरुरज्जु की अनुप्रस्थ काट में इसकी आंतरिक संरचना स्पष्ट दिखाई देती है।
मेरुरज्जु की अनुप्रस्थ काट का सचित्र वर्णन
(कल्पित चित्र - नामांकन के लिए)
  1. केन्द्रीय नहर (Central Canal): बीच में एक छोटी नलिका जिसमें सेरेब्रोस्पाइनल द्रव भरा रहता है।
  2. धूसर द्रव्य (Grey Matter): केन्द्रीय नहर के चारों ओर 'H' या तितली के आकार का गहरे रंग का क्षेत्र। इसमें न्यूरॉन के काय (सोमा) होते हैं।
  3. श्वेत द्रव्य (White Matter): धूसर द्रव्य के चारों ओर का हल्के रंग का क्षेत्र। इसमें तंत्रिका तंतुओं (एक्सॉन) के बंडल होते हैं जो माइलिन आवरण के कारण सफेद दिखते हैं।
  4. डॉर्सल हॉर्न (पश्च शिंग): धूसर द्रव्य के पीछे की ओर उभरे दो सींग। इनमें संवेदी न्यूरॉन के काय होते हैं जो संवेदी संकेत ग्रहण करते हैं।
  5. वेंट्रल हॉर्न (अग्र शिंग): धूसर द्रव्य के आगे की ओर उभरे दो सींग। इनमें प्रेरक न्यूरॉन के काय होते हैं जो प्रेरक संकेत भेजते हैं।
  6. मेरुदण्ड (Spinal Nerve): प्रत्येक खंड से एक जोड़ी मिश्रित तंत्रिका (संवेदी और प्रेरक दोनों तंतुओं वाली) निकलती है।
  7. डॉर्सल रूट (पश्च मूल): मेरुदण्ड का वह भाग जिसमें संवेदी तंतु होते हैं।
  8. वेंट्रल रूट (अग्र मूल): मेरुदण्ड का वह भाग जिसमें प्रेरक तंतु होते हैं।
  9. डॉर्सल रूट गैंग्लियन: डॉर्सल रूट पर स्थित गुच्छा जहाँ संवेदी न्यूरॉन के काय स्थित होते हैं।

1. पादप हॉर्मोन क्या है?

पादप हॉर्मोन वे रासायनिक पदार्थ हैं जो पौधों के विशिष्ट कोशिकाओं या ऊतकों में संश्लेषित होते हैं और बहुत कम मात्रा में पौधे की वृद्धि, विकास और विभिन्न क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं। ये हॉर्मोन पौधे के एक भाग से दूसरे भाग में स्थानांतरित होकर कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए, ऑक्सिन कोशिका विभाजन और वृद्धि को प्रेरित करता है, जबकि जिबरेलिन तने की लंबाई बढ़ाने और बीज अंकुरण में सहायक होता है।

2. एक तने की कलम मुड़कर प्रकाश की ओर झुक जाती है। इस घटना को क्या कहते हैं?

इस घटना को प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) कहते हैं। यह पौधों की एक प्रकार की दिशात्मक वृद्धि है जिसमें प्रकाश उद्दीपन के कारण तना प्रकाश स्रोत की ओर मुड़ जाता है। यह ऑक्सिन हॉर्मोन के असमान वितरण के कारण होता है। प्रकाश से दूर वाले भाग में ऑक्सिन की सांद्रता अधिक हो जाती है, जिससे उस भाग की कोशिकाओं की लंबाई तेजी से बढ़ती है और तना प्रकाश की ओर झुक जाता है।

3. मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है?

शरीर की स्थिति, संतुलन और समन्वित गतियों का अनुरक्षण सेरिबैलम (अनुमस्तिष्क) द्वारा किया जाता है। यह मस्तिष्क के पिछले भाग में स्थित होता है। सेरिबैलम संवेदी तंत्र से प्राप्त जानकारी को एकत्रित करता है और मांसपेशियों को सही आदेश भेजकर शरीर का संतुलन बनाए रखता है, जिससे हम चलने, दौड़ने या कोई भी सटीक गति कर पाते हैं।

4. हमारे शरीर में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है?

हमारे शरीर में रासायनिक समन्वय हॉर्मोन द्वारा होता है। हॉर्मोन अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित विशेष रासायनिक दूत होते हैं जो सीधे रक्त में मिल जाते हैं। रक्त के माध्यम से ये शरीर के विभिन्न लक्षित अंगों या ऊतकों तक पहुँचते हैं और उनकी क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के लिए, इंसुलिन हॉर्मोन रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है, और थायरॉक्सिन हॉर्मोन शरीर की चयापचय दर को नियंत्रित करता है।

5. निम्नलिखित में से कौन पादप हॉर्मोन है?
(a) इंसुलिन
(b) थायरॉक्सिन
(c) एस्ट्रोजन
(d) साइटोकाइनिन

(d) साइटोकाइनिन

स्पष्टीकरण: साइटोकाइनिन एक पादप हॉर्मोन है जो कोशिका विभाजन (साइटोकाइनेसिस) को प्रेरित करता है और पौधों की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विकल्प (a) इंसुलिन, (b) थायरॉक्सिन और (c) एस्ट्रोजन सभी मानव या जंतु हॉर्मोन हैं।

6. दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को कहते हैं-
(a) द्रुमिका
(b) सिनेप्स
(c) एक्सॉन
(d) आवेग

(b) सिनेप्स

स्पष्टीकरण: सिनेप्स दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) के बीच का अत्यंत सूक्ष्म अंतराल या खाली स्थान होता है, जहाँ एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक रासायनिक दूत (न्यूरोट्रांसमीटर) के माध्यम से तंत्रिका आवेग का संचरण होता है।

7. मस्तिष्क उत्तरदायी है-
(a) सोचने के लिए
(b) हृदय स्पंदन के लिए
(c) शरीर का संतुलन बनाने के लिए
(d) उपरोक्त सभी

(d) उपरोक्त सभी

स्पष्टीकरण: मस्तिष्क हमारे शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र है। यह सोचने, याद रखने, तर्क करने जैसे उच्च कार्यों के लिए (सेरिब्रम), अनैच्छिक कार्यों जैसे हृदय स्पंदन और श्वास के लिए (मेडुला), और शरीर का संतुलन व समन्वित गति के लिए (सेरिबैलम) उत्तरदायी है। इसलिए दिए गए सभी विकल्प सही हैं।

8. हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जब ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों। क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?

ग्राही (Receptors) का कार्य: ग्राही विशेष कोशिकाएँ या ऊतक होते हैं जो बाहरी या आंतरिक वातावरण से उद्दीपन (जैसे प्रकाश, ध्वनि, गर्मी, स्पर्श, रसायन आदि) को ग्रहण करते हैं और उन्हें तंत्रिकीय आवेगों में परिवर्तित करते हैं। ये आवेग तंत्रिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क या स्पाइनल कॉर्ड तक पहुँचते हैं, जहाँ उनकी व्याख्या की जाती है और उचित प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है।

ग्राही के ठीक से कार्य न करने पर समस्याएँ: यदि ग्राही ठीक से कार्य नहीं करते, तो शरीर बाहरी उद्दीपनों को सही ढंग से ग्रहण या व्याख्या नहीं कर पाएगा, जिससे गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। उदाहरण के लिए:
  • दृष्टि समस्या: यदि आँख के रेटिना में प्रकाश ग्राही क्षतिग्रस्त हैं, तो दिखाई देना कम हो सकता है या अंधापन हो सकता है।
  • श्रवण हानि: कान के कोक्लिया में ध्वनि ग्राही के कार्य न करने पर बहरापन हो सकता है।
  • संवेदनहीनता: त्वचा के स्पर्श ग्राही काम न करने पर गर्मी, सर्दी, दर्द या स्पर्श का पता नहीं चलेगा, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
  • संतुलन बिगड़ना: कान में स्थित संतुलन ग्राही के कार्य न करने पर चक्कर आना और संतुलन खोना जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
इस प्रकार, ग्राही हमारे पर्यावरण के साथ सही अंत:क्रिया के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

9. एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए।

(छात्रों से अनुरोध है कि वे अपनी नोटबुक में एक स्पष्ट तंत्रिका कोशिका का चित्र बनाएँ। नीचे इसके मुख्य भागों का वर्णन किया गया है।)

तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना के मुख्य भाग:
  1. कोशिका काय (सोमा): यह न्यूरॉन का मुख्य भाग होता है जिसमें केंद्रक और अधिकांश कोशिकांग पाए जाते हैं।
  2. द्रुमिकाएँ (डेंड्राइट्स): कोशिका काय से निकलने वाली छोटी, शाखित संरचनाएँ होती हैं। इनका कार्य आवेगों को ग्रहण करके कोशिका काय की ओर ले जाना है।
  3. एक्सॉन (तंत्रिकाक्ष): कोशिका काय से निकलने वाली लंबी, पतली तथा एकल प्रवर्ध होती है। इसके अंत में शाखाएँ होती हैं। इसका कार्य कोशिका काय से आवेगों को दूर ले जाना है।
  4. सिनेप्टिक बल्ब/अंतस्थल: एक्सॉन के अंतिम सिरे पर स्थित फैली हुई संरचना होती है जहाँ से रासायनिक दूत (न्यूरोट्रांसमीटर) स्रावित होते हैं।
  5. माइलिन आवरण: कुछ न्यूरॉन के एक्सॉन के चारों ओर एक चर्बीयुक्त आवरण होता है जो आवेग के संचरण की गति बढ़ाता है और इन्सुलेशन प्रदान करता है।
तंत्रिका कोशिका के कार्य: न्यूरॉन का मुख्य कार्य तंत्रिकीय आवेगों (इलेक्ट्रोकेमिकल संकेतों) को ग्रहण करना, संचालित करना और संचारित करना है। यह सूचना का मूलभूत इकाई के रूप में कार्य करता है। डेंड्राइट्स उद्दीपन को ग्रहण करते हैं, कोशिका काय उसकी प्रक्रिया करता है, और एक्सॉन उस प्रक्रियित आवेग को अगले न्यूरॉन या प्रभावी अंग (जैसे मांसपेशी या ग्रंथि) तक पहुँचाता है।

10. मस्तिष्क के विभिन्न भागों के कार्यों को सारणीबद्ध कीजिए।

मस्तिष्क का भाग
मुख्य कार्य
सेरिब्रम (अग्रमस्तिष्क) सोचने, तर्क करने, याद रखने, इच्छाशक्ति, बुद्धि, भावनाओं, स्वैच्छिक गतियों एवं संवेदी अनुभूतियों (देखना, सुनना, सूंघना आदि) का नियंत्रण।
सेरिबैलम (अनुमस्तिष्क) शरीर की मांसपेशियों की गतियों में समन्वय, शरीर का संतुलन बनाए रखना और मुद्रा का नियंत्रण।
मेडुला ऑब्लोंगेटा (प्रमस्तिष्क) अनैच्छिक क्रियाओं जैसे हृदय स्पंदन, श्वसन, रक्तचाप, पाचन क्रिया, छींकना, उल्टी करना, निगलना आदि का नियंत्रण।
थैलेमस संवेदी आवेगों (दर्द, तापमान, स्पर्श आदि को छोड़कर) के लिए रिले स्टेशन का कार्य करना। यह सेरिब्रम तक पहुँचने से पहले इन आवेगों को प्रसंस्कृत करता है।
हाइपोथैलेमस शरीर का तापमान, भूख-प्यास, थकान, नींद और भावनात्मक व्यवहार का नियंत्रण। यह पिट्यूटरी ग्रंथि के माध्यम से हॉर्मोन स्राव को भी नियंत्रित करता है।

11. प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच क्या अंतर है? इनके नियंत्रण के लिए उत्तरदायी तंत्रिका तंत्र के भागों के नाम लिखिए।

प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)
टहलना (Walking)
  • यह एक अनैच्छिक, तीव्र एवं स्वचालित प्रतिक्रिया है।
  • इसमें मस्तिष्क की भागीदारी नहीं होती।
  • यह स्पाइनल कॉर्ड (मेरुरज्जु) द्वारा नियंत्रित होती है।
  • उदाहरण: गर्म वस्तु को छूते ही हाथ का पीछे हटना, धूप में आँख की पुतली का सिकुड़ना।
  • इसका उद्देश्य शरीर को अचानक खतरे से बचाना है।
  • यह एक स्वैच्छिक, नियंत्रित एवं सीखी हुई क्रिया है।
  • इसमें मस्तिष्क की सक्रिय भागीदारी होती है।
  • यह सेरिब्रम (अग्रमस्तिष्क) द्वारा प्रारंभ और सेरिबैलम (अनुमस्तिष्क) द्वारा समन्वित की जाती है।
  • उदाहरण: सामान्य रूप से चलना, दौड़ना।
  • इसका उद्देश्य एक जानबूझकर की गई गति करना है।

नियंत्रण के लिए उत्तरदायी तंत्रिका तंत्र के भाग:
  • प्रतिवर्ती क्रिया के लिए: मुख्य रूप से स्पाइनल कॉर्ड (मेरुरज्जु) और प्रतिवर्त चाप में शामिल संवेदी तथा प्रेरक न्यूरॉन।
  • टहलने के लिए: सेरिब्रम (स्वैच्छिक आदेश), सेरिबैलम (संतुलन व समन्वय) और मेडुला (श्वास, हृदय गति आदि का नियंत्रण)।

12. पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?

पादप में प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) पादप हॉर्मोन ऑक्सिन के कारण होता है। यह प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में घटित होती है:
  1. जब पौधे का तना एकतरफा प्रकाश (जैसे खिड़की से आने वाला सूर्य का प्रकाश) के संपर्क में आता है, तो प्रकाश तने के शीर्ष भाग (वृद्धि बिंदु) पर पड़ता है।
  2. प्रकाश की उपस्थिति में, ऑक्सिन हॉर्मोन प्रकाश वाली ओर की तुलना में प्रकाश से दूर वाले भाग में अधिक मात्रा में एकत्रित हो जाता है।
  3. ऑक्सिन कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाने का कार्य करता है। चूंकि प्रकाश से दूर वाले भाग में ऑक्सिन की सांद्रता अधिक है, वहाँ की कोशिकाएँ तेजी से लंबी होने लगती हैं।
  4. प्रकाश वाली ओर की कोशिकाओं की वृद्धि धीमी रहती है।
  5. इस असमान वृद्धि के कारण तना प्रकाश स्रोत की ओर मुड़ जाता है। इसी को धनात्मक प्रकाशानुवर्तन कहते हैं।
ध्यान दें: जड़ें प्रकाश से दूर मुड़ती हैं, जिसे ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन कहते हैं, क्योंकि जड़ों पर ऑक्सिन का प्रभाव विपरीत होता है – अधिक ऑक्सिन जड़ों की वृद्धि को रोकता है।

13. अनैच्छिक क्रियाओं तथा प्रतिवर्ती क्रियाओं में क्या अंतर है?

अनैच्छिक क्रियाएँ (Involuntary Actions)
प्रतिवर्ती क्रियाएँ (Reflex Actions)
  • ये क्रियाएँ स्वचालित और निरंतर चलती रहती हैं, जिन पर हमारा सीधा नियंत्रण नहीं होता।
  • इन्हें मध्यमस्तिष्क या मेडुला द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
  • ये क्रियाएँ धीमी गति से होने वाली और लंबे समय तक चलने वाली हो सकती हैं।
  • उदाहरण: हृदय का धड़कना, पाचन क्रिया, श्वसन, आँसू आना, लार आना।
  • इनका उद्देश्य शरीर के आंतरिक कार्यों को बनाए रखना है।
  • ये क्रियाएँ किसी अचानक उद्दीपन के प्रति तीव्र और तात्कालिक प्रतिक्रिया होती हैं।
  • इन्हें मुख्य रूप से स्पाइनल कॉर्ड (मेरुरज्जु) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
  • ये क्रियाएँ बहुत तेज गति से (सेकंड के अंश में) होती हैं और अल्पकालिक होती हैं।
  • उदाहरण: गर्म वस्तु छूने पर हाथ झटक कर पीछे हटना, धूप में पुतली का सिकुड़ना, घुटने पर हल्की चोट लगने पर पैर का झटका मारना।
  • इनका उद्देश्य शरीर को तत्काल खतरे या नुकसान से बचाना है।

सामान्य बिंदु: दोनों ही क्रियाएँ अनैच्छिक हैं (हम इच्छा से नहीं रोक सकते), लेकिन उनके नियंत्रण केंद्र, गति और प्रकृति में अंतर है।

14. जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हॉर्मोन क्रिया विधि की तुलना तथा विभेद कीजिए।

तंत्रिका तंत्र (Nervous System)
हॉर्मोन तंत्र (Endocrine System)
संरचना: तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) का जाल।

संचार का माध्यम: तंत्रिकीय आवेग (विद्युत-रासायनिक संकेत)।

संचरण पथ: तंत्रिकाओं के माध्यम से विशिष्ट पथ।

गति: अत्यंत तीव्र (मिलीसेकंड में)।

प्रतिक्रिया की अवधि: अल्पकालिक (तुरंत प्रतिक्रिया, जल्दी समाप्त)।

कार्यक्षेत्र: स्थानीकृत एवं विशिष्ट (जैसे हाथ की मांसपेशी सिकुड़ना)।

उदाहरण: हाथ हटाना, दौड़ना, बोलना।
संरचना: अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (जैसे पिट्यूटरी, थायरॉइड)।

संचार का माध्यम: हॉर्मोन (रासायनिक दूत)।

संचरण पथ: रक्त प्रवाह के माध्यम से पूरे शरीर में।

गति: धीमी (सेकंड, मिनट, घंटे या दिनों में)।

प्रतिक्रिया की अवधि: दीर्घकालिक (धीरे शुरू होकर लंबे समय तक प्रभाव)।

कार्यक्षेत्र: व्यापक एवं सामान्यीकृत (पूरे शरीर पर प्रभाव)।

उदाहरण: वृद्धि, विकास, चयापचय, प्रजनन चक्र।

समन्वय: दोनों तंत्र मिलकर कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए, डर लगने पर तंत्रिका तंत्र तीव्र हृदय गति शुरू करता है, और अधिवृक्क ग्रंथि से एड्रेनालिन हॉर्मोन स्रावित होता है जो इस प्रतिक्रिया को बनाए रखता है।

1. पादप हॉर्मोन क्या है?

पादप हॉर्मोन पौधों द्वारा उत्पादित विशेष रासायनिक पदार्थ हैं जो पौधों की वृद्धि, विकास और विभिन्न क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं। ये बहुत कम मात्रा में काम करते हैं और उत्पादन स्थान से कार्य स्थल तक स्थानांतरित होते हैं। उदाहरण के लिए, ऑक्सिन कोशिका विभाजन और वृद्धि को प्रेरित करता है, जबकि जिबरेलिन तने की लंबाई बढ़ाता है।

2. छुई-मुई पादप में गति तंत्र का वर्णन करें।

छुई-मुई (मिमोसा पुडिका) पादप में गति एक प्रकाशानुवर्तन गति का उदाहरण है। जब इसकी पत्तियों को छुआ जाता है, तो आघात के स्थान से एक विद्युत रासायनिक संकेत उत्पन्न होता है। यह संकेत पत्तियों के आधार में स्थित विशेष कोशिकाओं तक पहुँचता है, जिनमें जल की मात्रा तेजी से कम हो जाती है। इससे कोशिकाओं का दबाव घट जाता है और पत्तियाँ मुरझाकर नीचे की ओर झुक जाती हैं। कुछ समय बाद, कोशिकाएँ पुनः जल भर लेती हैं और पत्तियाँ अपनी मूल अवस्था में वापस आ जाती हैं।

3. दो तंत्रिका कोशिका के मध्य अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) पर संकेत कैसे प्रवाहित होता है?

तंत्रिका कोशिकाओं के मध्य संधि स्थल को सिनेप्स कहते हैं। संकेत प्रवाह इस प्रकार होता है:
  1. विद्युत संकेत (एक्शन पोटेंशियल) पूर्व-सिनेप्टिक न्यूरॉन के अंत तक पहुँचता है।
  2. यह संकेत कोशिका से कुछ रासायनिक दूत (न्यूरोट्रांसमीटर) जैसे एसिटाइलकोलीन के स्राव को उत्तेजित करता है।
  3. ये रसायन सिनेप्टिक विदर (अंतर) को पार करके अगले न्यूरॉन की झिल्ली पर स्थित ग्राही से जुड़ जाते हैं।
  4. इससे अगले न्यूरॉन में एक नया विद्युत संकेत उत्पन्न हो जाता है और संदेश आगे बढ़ता रहता है।
इस प्रकार, सिनेप्स पर संकेत का संचरण विद्युत से रासायनिक और पुनः विद्युत में परिवर्तन के माध्यम से होता है।

4. मस्तिष्क के विभिन्न भागों के नाम लिखें।

मानव मस्तिष्क को मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा गया है:
  • अग्र-मस्तिष्क (Forebrain): यह सबसे विकसित भाग है, जिसमें प्रमस्तिष्क (सेरेब्रम), थैलेमस और हाइपोथैलेमस आते हैं। यह सोचने, सीखने, संवेदनाओं के विश्लेषण और भावनाओं का केंद्र है।
  • मध्य-मस्तिष्क (Midbrain): यह अग्र-मस्तिष्क और पश्च-मस्तिष्क को जोड़ता है। यह श्रवण एवं दृष्टि संबंधी प्रतिवर्त क्रियाओं का नियंत्रण करता है।
  • पश्च-मस्तिष्क (Hindbrain): इसमें अनुमस्तिष्क (सेरेबेलम), पोंस और मेडुला ऑब्लोंगेटा आते हैं। यह श्वसन, हृदय गति, रक्तचाप, संतुलन तथा अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है।

5. मेरुरज्जु आघात से क्या तात्पर्य है?

मेरुरज्जु आघात से तात्पर्य मेरुरज्जु (स्पाइनल कॉर्ड) को किसी दुर्घटना, चोट या रोग के कारण होने वाली क्षति से है। चूंकि मेरुरज्जु शरीर और मस्तिष्क के बीच संदेशों के आदान-प्रदान का मुख्य मार्ग है, इसकी क्षति के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। आघात के स्थान के नीचे के सभी अंगों से संवेदनाएँ मस्तिष्क तक नहीं पहुँच पातीं और मस्तिष्क से उन अंगों तक आदेश भी नहीं जा पाते। इससे लकवा (पैरालिसिस) हो सकता है, जिसमें गति एवं संवेदना का नुकसान होता है।

6. पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?

पादप में प्रकाशानुवर्तन प्रकाश की दिशा में वृद्धि की गति है। यह प्रक्रिया मुख्यतः ऑक्सिन नामक हॉर्मोन द्वारा नियंत्रित होती है।
  • जब पादप का तना एक तरफ से प्रकाश प्राप्त करता है, तो प्रकाश वाली तरफ ऑक्सिन का सांद्रण कम हो जाता है, जबकि छाया वाली तरफ अधिक हो जाता है।
  • चूंकि ऑक्सिन कोशिका विस्तार को बढ़ावा देता है, छाया वाली तरफ की कोशिकाएँ अधिक लंबी हो जाती हैं।
  • इस असमान वृद्धि के कारण तना प्रकाश स्रोत की ओर मुड़ जाता है।
इस प्रकार, पादप अपने प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक प्रकाश को अधिकतम प्राप्त करने के लिए प्रकाश की ओर झुकता है।

7. मानव मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का नियंत्रण करता है?

अनुमस्तिष्क (सेरेबेलम) शरीर की स्थिति, संतुलन और सुचारू, समन्वित गतियों का नियंत्रण करता है। यह पश्च-मस्तिष्क का एक भाग है।

8. हॉर्मोन क्रिया के दो नियंत्रण तंत्र बताएँ।

हॉर्मोन क्रिया के नियंत्रण के लिए मुख्यतः दो तंत्र कार्य करते हैं:
  1. प्रतिक्रिया नियंत्रण तंत्र (Feedback Mechanism): यह सबसे सामान्य तंत्र है। जब शरीर में किसी हॉर्मोन का स्तर एक निश्चित सीमा से ऊपर या नीचे जाता है, तो यह तंत्र स्वतः ही हॉर्मोन के स्राव को कम या बढ़ा देता है। उदाहरण के लिए, रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ने पर इंसुलिन का स्राव बढ़ जाता है और शर्करा का स्तर सामान्य होने पर इंसुलिन स्राव कम हो जाता है।
  2. तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रण: कुछ परिस्थितियों में तंत्रिका तंत्र सीधे अंत:स्रावी ग्रंथियों को संकेत भेजकर हॉर्मोन स्राव को नियंत्रित करता है। जैसे - डर या तनाव की स्थिति में तंत्रिका तंत्र एड्रिनल ग्रंथि को एड्रेनलिन हॉर्मोन छोड़ने का आदेश देता है।

9. निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनें-

(क) आघात प्रतिवर्त में मस्तिष्क की भूमिका होती है
उत्तर: असत्य। आघात प्रतिवर्त एक तीव्र, अनैच्छिक प्रतिक्रिया है जो मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित की जाती है, ताकि समय बचाया जा सके। मस्तिष्क को सूचना बाद में भेजी जाती है।
(ख) पेशीय गति का संचालन मस्तिष्क द्वारा होता है
उत्तर: असत्य। पेशीय गति का संचालन मस्तिष्क और मेरुरज्जु दोनों द्वारा होता है। मस्तिष्क ऐच्छिक गतियों को नियंत्रित करता है, जबकि मेरुरज्जु प्रतिवर्त क्रियाओं को नियंत्रित करती है।
(ग) अनुमस्तिष्क शरीर का संतुलन बनाए रखता है
उत्तर: सत्य। अनुमस्तिष्क (सेरेबेलम) शरीर की मुद्रा, संतुलन और सुचारू गतियों के समन्वय के लिए जिम्मेदार है।
(घ) हमारी पुतली प्रकाश के प्रति अनुक्रिया करती है
उत्तर: सत्य। तेज प्रकाश में पुतली सिकुड़कर छोटी हो जाती है ताकि कम प्रकाश नेत्र में प्रवेश करे, और कम प्रकाश में यह फैलकर बड़ी हो जाती है ताकि अधिक प्रकाश प्रवेश कर सके। यह एक प्रतिवर्त क्रिया है।

1. पादप हॉर्मोन क्या हैं?

पादप हॉर्मोन पौधों के विशिष्ट कोशिकाओं द्वारा उत्पादित रासायनिक पदार्थ हैं जो पौधे के विभिन्न भागों में स्थानांतरित होकर उसके विकास, वृद्धि और अनुक्रियाओं को नियंत्रित एवं समन्वित करते हैं। ये बहुत ही कम मात्रा में कार्य करते हैं। इन्हें वृद्धि नियामक भी कहा जाता है। उदाहरण के लिए, ऑक्सिन कोशिका विस्तार को बढ़ावा देता है, जिबरेलिन तने की लंबाई बढ़ाता है, और एब्सिसिक अम्ल वृद्धि को रोककर पौधे को तनाव से बचाता है।

2. छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति प्रकाश की दिशा से किस प्रकार भिन्न है?

छुई-मुई (मिमोसा पुडिका) की पत्तियों की गति एक अनुकंपी गति है, जो स्पर्श या झटके जैसे बाह्य उद्दीपन के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया है। यह प्रकाश की दिशा पर निर्भर नहीं करती। दूसरी ओर, प्रकाश की दिशा के प्रति पौधों की प्रतिक्रिया (जैसे सूरजमुखी का फूल सूर्य की ओर मुड़ना) एक दिशात्मक गति या प्रकाशानुवर्तन है, जो धीमी और वृद्धि से संबंधित है। छुई-मुई की गति तंत्रिका तंत्र जैसी तीव्रता से होती है, जबकि प्रकाशानुवर्तन हॉर्मोन द्वारा नियंत्रित धीमी प्रक्रिया है।

3. एक प्रकाशानुवर्ती पादप हॉर्मोन का नाम लिखिए।

ऑक्सिन एक प्रमुख प्रकाशानुवर्ती पादप हॉर्मोन है। यह प्रकाश की विपरीत दिशा में कोशिकाओं के विस्तार को बढ़ावा देता है, जिसके कारण पौधा प्रकाश स्रोत की ओर मुड़ जाता है।

4. हमारे शरीर में अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित दो हॉर्मोनों के नाम लिखिए तथा उनके कार्य बताइए।

1. इंसुलिन (अग्न्याशय द्वारा स्रावित):
यह हॉर्मोन रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) के स्तर को नियंत्रित करता है। यह कोशिकाओं को ग्लूकोज ग्रहण करने में मदद करता है और अतिरिक्त ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में यकृत में संग्रहित करवाता है। इंसुलिन की कमी से मधुमेह रोग हो जाता है।

2. थायरॉक्सिन (थायरॉयड ग्रंथि द्वारा स्रावित):
यह हॉर्मोन शरीर की उपापचय दर (मेटाबॉलिक रेट) को नियंत्रित करता है, जिससे भोजन से ऊर्जा मुक्त होती है। यह शारीरिक वृद्धि, विकास और तंत्रिका तंत्र के कार्य के लिए भी आवश्यक है। थायरॉक्सिन के स्राव में असंतुलन से गॉइटर (घेंघा) जैसे रोग हो सकते हैं।

5. मेरुरज्जु (स्पाइनल कॉर्ड) आघात से क्या प्रभावित होता है?

मेरुरज्जु आघात से प्रभावित क्षेत्र के नीचे के सभी अंगों का तंत्रिकीय नियंत्रण और संवेदना प्रभावित हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप:
  • पक्षाघात (Paralysis): प्रभावित अंगों में गति करने की क्षमता समाप्त हो सकती है।
  • संवेदनहीनता: प्रभावित भाग में स्पर्श, दर्द, गर्मी-ठंडक आदि की अनुभूति नहीं होती।
  • मूत्राशय एवं आंत्र नियंत्रण का अभाव: मूत्र एवं मल पर नियंत्रण नहीं रह पाता।
आघात की गंभीरता और स्थान के आधार पर यह प्रभाव अस्थायी या स्थायी हो सकता है।

6. पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?

पादप में प्रकाशानुवर्तन हॉर्मोन ऑक्सिन के असमान वितरण के कारण होता है। जब पौधे का एक तरफ से प्रकाश आता है, तो ऑक्सिन प्रकाश से दूर वाले तने के भाग में एकत्रित हो जाता है। ऑक्सिन कोशिका विस्तार को बढ़ावा देता है। इसलिए, प्रकाश से दूर वाला भाग तेजी से लंबा होने लगता है, जबकि प्रकाश की ओर वाला भाग धीरे-धीरे बढ़ता है। इस असमान वृद्धि के कारण तना प्रकाश स्रोत की ओर मुड़ जाता है। जड़ों में ऑक्सिन का प्रभाव विपरीत होता है, इसलिए वे प्रकाश से दूर मुड़ती हैं।

7. मस्तिष्क का कौन सा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है?

अनुमस्तिष्क (Cerebellum) मस्तिष्क का वह भाग है जो शरीर की मुद्रा (स्थिति), संतुलन और सुचारू, समन्वित गतियों के नियंत्रण के लिए उत्तरदायी है। यह स्वैच्छिक पेशीय क्रियाओं को सही समय पर और सही क्रम में होने का निर्देश देता है, जिससे हम चलते, दौड़ते या साइकिल चलाते समय संतुलन बनाए रख पाते हैं।

8. प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच क्या अंतर है? इनमें से कौन मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है?

प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) टहलना (Walking)
यह एक अनैच्छिक, तीव्र एवं स्वचालित प्रतिक्रिया है। यह एक ऐच्छिक, नियंत्रित एवं जानबूझकर की जाने वाली क्रिया है।
मस्तिष्क की सोच-विचार प्रक्रिया इसमें शामिल नहीं होती। मस्तिष्क द्वारा सोच-समझकर प्रारंभ और नियंत्रित की जाती है।
उदाहरण: गर्म वस्तु को छूते ही हाथ का सिकुड़ जाना। उदाहरण: पार्क में घूमना या स्कूल जाना।
यह मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है। यह मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती है, हालांकि मेरुरज्जु तंत्रिका आवेगों के संचरण में सहायक होती है।

9. अग्न्याशय किस प्रकार रक्त में शर्करा के स्तर का नियमन करता है?

अग्न्याशय दो विपरीत कार्य करने वाले हॉर्मोन स्रावित करके रक्त शर्करा के स्तर को संतुलित रखता है:

1. इंसुलिन (Insulin): जब भोजन के बाद रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है, तो अग्न्याशय की बीटा कोशिकाएं इंसुलिन स्रावित करती हैं। इंसुलिन कोशिकाओं को ग्लूकोज ग्रहण करने के लिए प्रेरित करता है और यकृत तथा मांसपेशियों में अतिरिक्त ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में जमा करवाता है। इससे रक्त शर्करा का स्तर सामान्य हो जाता है।

2. ग्लूकागॉन (Glucagon): जब रक्त शर्करा का स्तर कम हो जाता है (जैसे भोजन के लंबे अंतराल के बाद), तो अग्न्याशय की अल्फा कोशिकाएं ग्लूकागॉन स्रावित करती हैं। यह हॉर्मोन यकृत में संग्रहित ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में तोड़कर रक्त में छोड़ने का संकेत देता है, जिससे शर्करा का स्तर फिर से बढ़ जाता है।

इस प्रकार, इंसुलिन और ग्लूकागॉन का यह निरंतर संतुलन रक्त में शर्करा के स्तर को एक सीमा के भीतर बनाए रखता है।

10. मानव मस्तिष्क के विभिन्न भागों के कार्यों का वर्णन कीजिए।

मानव मस्तिष्क तीन मुख्य भागों में बंटा होता है:

1. अग्रमस्तिष्क (Forebrain):
  • प्रमस्तिष्क (Cerebrum): यह सबसे बड़ा भाग है। यह सोचने, समझने, तर्क करने, सीखने, भाषा, स्मृति और स्वैच्छिक क्रियाओं के नियंत्रण का केंद्र है। इसमें संवेदी अंगों से आने वाली सूचनाओं का विश्लेषण होता है।
  • थैलेमस (Thalamus): यह संवेदी आवेगों के लिए रिले स्टेशन का काम करता है और उन्हें प्रमस्तिष्क के उचित भागों तक पहुँचाता है।
  • हाइपोथैलेमस (Hypothalamus): यह शरीर के तापमान, भोजन-पानी की इच्छा, भावनाओं और अंतःस्रावी तंत्र का नियंत्रण केंद्र है। यह पिट्यूटरी ग्रंथि को नियंत्रित करता है।
2. मध्यमस्तिष्क (Midbrain):
  • यह दृष्टि, श्रवण, नेत्र गति और पुतली के आकार के नियंत्रण में सहायक होता है। यह अग्र एवं पश्च मस्तिष्क के बीच संदेशों के आदान-प्रदान का मार्ग है।
3. पश्चमस्तिष्क (Hindbrain):
  • अनुमस्तिष्क (Cerebellum): शरीर की स्थिति, संतुलन और सुचारू पेशीय समन्वय के लिए उत्तरदायी।
  • मेडुला ऑब्लोंगेटा (Medulla Oblongata): यह अनैच्छिक क्रियाएं जैसे हृदय स्पंदन, श्वसन, रक्तचाप, छींकना, उल्टी करना, लार आदि को नियंत्रित करता है। इसे 'जीवन का केंद्र' कहा जाता है।
  • पॉन्स (Pons): यह मेडुला एवं अनुमस्तिष्क को जोड़ता है और श्वसन को नियंत्रित करने में मदद करता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प चुनिए। प्रश्नों और विकल्पों के क्रम में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।

1. मानव मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है-

(A) प्रमस्तिष्क
(B) अनुमस्तिष्क
(C) मेडुला ऑब्लोंगेटा
(D) मध्यमस्तिष्क

उत्तर: (A) प्रमस्तिष्क
प्रमस्तिष्क मानव मस्तिष्क का सबसे बड़ा और सबसे विकसित भाग है, जो लगभग 80% मस्तिष्क का भाग घेरता है। यह उच्च मानसिक कार्यों जैसे सोच, स्मृति और इंद्रियों के नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है।

2. पादप में प्रकाशानुवर्तन का कारण है-

(A) ऑक्सिन
(B) जिबरेलिन
(C) साइटोकाइनिन
(D) एब्सिसिक अम्ल

उत्तर: (A) ऑक्सिन
ऑक्सिन हॉर्मोन प्रकाश की उपस्थिति में असमान रूप से वितरित हो जाता है, जिससे पौधे के प्रकाश वाले और अंधेरे वाले हिस्सों में अलग-अलग वृद्धि दर होती है। यह अंतर ही पौधे को प्रकाश की ओर मोड़ने का कारण बनता है।

3. मानव शरीर की मास्टर ग्रंथि कहलाती है-

(A) थायरॉयड
(B) पीयूष
(C) अग्न्याशय
(D) अधिवृक्क

उत्तर: (B) पीयूष
पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) को 'मास्टर ग्रंथि' कहा जाता है क्योंकि यह शरीर की कई अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों (जैसे थायरॉयड, अधिवृक्क) के कार्य को नियंत्रित करने वाले हॉर्मोन स्रावित करती है। यह हाइपोथैलेमस के निर्देश पर काम करती है।

4. रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने वाला हॉर्मोन है-

(A) इंसुलिन
(B) थायरॉक्सिन
(C) एड्रीनलिन
(D) वृद्धि हॉर्मोन

उत्तर: (A) इंसुलिन
इंसुलिन अग्न्याशय द्वारा स्रावित होता है और रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करने का कार्य करता है। यह कोशिकाओं को ग्लूकोज ग्रहण करने और यकृत में ग्लाइकोजन के रूप में इसे संग्रहित करने के लिए प्रेरित करता है।

5. प्रतिवर्ती क्रिया का नियंत्रण केंद्र है-

(A) मस्तिष्क
(B) मेरुरज्जु
(C) कपाल तंत्रिकाएँ
(D) परिधीय तंत्रिका तंत्र

उत्तर: (B) मेरुरज्जु
प्रतिवर्ती क्रियाएं तीव्र, स्वचालित और अनैच्छिक प्रतिक्रियाएं हैं जो संवेदी आवेग के प्रति मेरुरज्जु (स्पाइनल कॉर्ड) द्वारा नियंत्रित की जाती हैं। इनमें मस्तिष्क की सोच प्रक्रिया शामिल नहीं होती, जिससे समय बचता है और शरीर को तत्काल खतरे से बचाया जा सकता है।

1. पादप हॉर्मोन क्या है?

पादप हॉर्मोन वे रासायनिक पदार्थ हैं जो पौधों के विशिष्ट कोशिकाओं या ऊतकों द्वारा बनाए जाते हैं। ये हॉर्मोन पौधों के विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं जैसे वृद्धि, विकास, परिपक्वता और पर्यावरण के प्रति प्रतिक्रिया को नियंत्रित एवं समन्वित करते हैं। ये बहुत ही कम मात्रा में कार्य करते हैं और उत्पादन स्थल से दूर अन्य भागों में अपना प्रभाव दिखाते हैं। उदाहरण के लिए, ऑक्सिन कोशिका विस्तार को नियंत्रित करता है, जिबरेलिन तने की लंबाई बढ़ाता है, और एब्सिसिक अम्ल पौधे में जल के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।

2. छुई-मुई पादप की पत्तियाँ स्पर्श करने पर मुरझा क्यों जाती हैं?

छुई-मुई (मिमोसा पुडिका) की पत्तियों में एक विशेष प्रकार की कोशिकाएं होती हैं जिन्हें 'पुल्विनी' कहते हैं। ये कोशिकाएं पानी से भरी होती हैं और पत्तियों को सीधा रखती हैं। जब पत्ती को स्पर्श किया जाता है, तो उस स्थान से एक विद्युत रासायनिक संकेत उत्पन्न होता है। यह संकेत पुल्विनी कोशिकाओं तक पहुँचता है, जिसके कारण वे तेजी से पानी छोड़ देती हैं। पानी के निकल जाने से कोशिकाओं का दबाव (टर्गर प्रेशर) कम हो जाता है और वे सिकुड़ जाती हैं। इसी कारण पत्तियाँ मुरझाकर नीचे की ओर झुक जाती हैं। यह एक सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया है जो पौधे को शाकाहारी जानवरों से बचाने में मदद करती है।

3. निम्नलिखित में कौन पादप हॉर्मोन है?
(a) इंसुलिन
(b) थायरॉक्सिन
(c) एस्ट्रोजन
(d) साइटोकाइनिन

(d) साइटोकाइनिन
व्याख्या: इंसुलिन, थायरॉक्सिन और एस्ट्रोजन जंतु हॉर्मोन हैं, जबकि साइटोकाइनिन एक पादप हॉर्मोन है जो कोशिका विभाजन और पौधे की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

4. दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को कहते हैं-
(a) द्रुमिका
(b) सिनेप्स
(c) एक्सॉन
(d) आवेग

(b) सिनेप्स
व्याख्या: सिनेप्स वह अति सूक्ष्म अंतराल या जंक्शन है जहाँ एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) का अक्षतंतु (एक्सॉन) दूसरी तंत्रिका कोशिका के द्रुमिका (डेंड्राइट) या कोशिका काय के निकट आता है। यहीं से रासायनिक संकेत एक कोशिका से दूसरी कोशिका में पहुँचता है।

5. मस्तिष्क उत्तरदायी है-
(a) सोचने के लिए
(b) हृदय स्पंदन के लिए
(c) शरीर का संतुलन बनाने के लिए
(d) उपरोक्त सभी

(d) उपरोक्त सभी
व्याख्या: मस्तिष्क हमारे शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र है। यह न केवल सोचने, याद रखने और सीखने जैसे उच्च कार्यों के लिए जिम्मेदार है, बल्कि यह हृदय की धड़कन, श्वसन जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को भी नियंत्रित करता है। इसके अलावा, सेरिबैलम नामक भाग शरीर की गति और संतुलन को बनाए रखने का काम करता है।

6. हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों। क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?

ग्राही (रिसेप्टर) का कार्य: ग्राही विशेष प्रकार की कोशिकाएँ या कोशिकाओं के भाग होते हैं जो बाहरी या आंतरिक वातावरण से होने वाले परिवर्तनों (उद्दीपन) को ग्रहण करते हैं। ये उद्दीपन प्रकाश, ताप, ध्वनि, रसायन, स्पर्श, दबाव आदि किसी भी प्रकार के हो सकते हैं। ग्राही इन उद्दीपनों को विद्युत रासायनिक संकेतों में बदलकर तंत्रिका तंत्र या संबंधित अंग तक पहुँचाते हैं, जिससे शरीर उचित प्रतिक्रिया दे पाता है।

ग्राही के ठीक से कार्य न करने पर समस्याएँ: यदि ग्राही ठीक से काम नहीं करें, तो शरीर बाहरी वातावरण के साथ प्रभावी ढंग से समन्वय स्थापित नहीं कर पाएगा। इससे निम्नलिखित समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं:
  • संवेदना की कमी: व्यक्ति को गर्मी, सर्दी, दर्द या स्पर्श का सही अनुभव नहीं होगा, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
  • संतुलन बिगड़ना: आँख और कान में स्थित ग्राही के कार्य न करने पर चक्कर आना और शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है।
  • प्रतिवर्ती क्रियाओं में बाधा: हाथ को अचानक आग से हटाने जैसी त्वरित प्रतिक्रियाएँ नहीं हो पाएँगी।
  • अंगों का नियंत्रण खोना: मांसपेशियों से जुड़े ग्राही के कार्य न करने पर हम अपने अंगों की सही स्थिति का पता नहीं लगा पाएँगे, जिससे चलने-फिरने में दिक्कत होगी।
अतः, शरीर की सुरक्षा और सही कार्यप्रणाली के लिए ग्राही कोशिकाओं का ठीक से कार्य करना अत्यंत आवश्यक है।

7. एक तंत्रिका कोशिका की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए।

तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना:
[यहाँ एक साधारण चित्र बनाया जा सकता है जिसमें निम्नलिखित भाग दिखाए गए हों]
कोशिका काय (साइटॉन): कोशिका का मुख्य भाग जिसमें केंद्रक और कोशिकाद्रव्य होता है।
द्रुमिकाएँ (डेंड्राइट्स): कोशिका काय से निकलने वाली छोटी, शाखित रचनाएँ जो संकेतों को ग्रहण करके कोशिका काय की ओर ले जाती हैं।
अक्षतंतु (एक्सॉन): कोशिका काय से निकलने वाली लंबी, तार जैसी रचना जो संकेतों को कोशिका काय से दूर ले जाती है।
अक्षतंतु आच्छद (माइलिन शीथ): अक्षतंतु के चारों ओर एक वसायुक्त आवरण जो संकेत के संचरण की गति बढ़ाता है और इसे विद्युत रोधी करता है।
सिनेप्स: एक न्यूरॉन के अक्षतंतु और दूसरे न्यूरॉन की द्रुमिका के बीच का अंतराल।
तंत्रिका कोशिका के कार्य:
  1. संवेदना ग्रहण करना: द्रुमिकाएँ अन्य न्यूरॉन या ग्राही कोशिकाओं से विद्युत रासायनिक संकेत प्राप्त करती हैं।
  2. संकेतों का एकीकरण: कोशिका काय प्राप्त सभी संकेतों का विश्लेषण करती है।
  3. संकेतों का संचरण: यदि संकेत पर्याप्त मजबूत होता है, तो कोशिका काय एक नया विद्युत आवेग उत्पन्न करती है। यह आवेग अक्षतंतु के सहारे तेज गति से आगे बढ़ता है।
  4. संकेतों का स्थानांतरण: अक्षतंतु के अंत में यह आवेग सिनेप्स तक पहुँचता है। सिनेप्स पर रासायनिक पदार्थ (न्यूरोट्रांसमीटर) स्रावित होते हैं जो अंतराल को पार करके अगले न्यूरॉन की द्रुमिका तक संकेत पहुँचाते हैं।
इस प्रकार, न्यूरॉन संवेदनाओं, आदेशों और सूचनाओं को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक पहुँचाने का काम करता है।

8. पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?

प्रकाशानुवर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे का कोई अंग (जैसे तना) प्रकाश की दिशा की ओर मुड़कर वृद्धि करता है। यह पादप हॉर्मोन ऑक्सिन के वितरण में अंतर के कारण होता है।

प्रक्रिया:
  1. जब पौधे के तने के शीर्ष पर एकतरफा प्रकाश पड़ता है, तो ऑक्सिन हॉर्मोन प्रकाश से दूर वाले हिस्से में अधिक मात्रा में एकत्रित हो जाता है।
  2. ऑक्सिन कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाने (कोशिका विस्तार) को प्रोत्साहित करता है।
  3. चूंकि प्रकाश से दूर वाले हिस्से में ऑक्सिन अधिक है, वहाँ की कोशिकाएँ तेजी से लंबी होती हैं।
  4. प्रकाश वाले हिस्से की कोशिकाएँ अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ती हैं।
  5. इस असमान वृद्धि के कारण तना प्रकाश की ओर मुड़ जाता है।
ध्यान दें: जड़ें प्रकाश से दूर (ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन) मुड़ती हैं क्योंकि जड़ों के लिए ऑक्सिन की अधिक मात्रा वृद्धि को रोकती है। इसलिए, प्रकाश से दूर वाले हिस्से में ऑक्सिन अधिक होने से वहाँ वृद्धि धीमी हो जाती है और जड़ प्रकाश से दूर मुड़ जाती है।

9. अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?

अनैच्छिक क्रियाएँ प्रतिवर्ती क्रियाएँ
  • ये क्रियाएँ हमारे नियंत्रण से बाहर होती हैं और स्वतः होती रहती हैं।
  • इन पर मस्तिष्क का सीधा नियंत्रण नहीं होता; ये मेरुरज्जु या स्वायत्त तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रित होती हैं।
  • इनमें धीमी प्रतिक्रिया होती है और ये लंबे समय तक चलती रहती हैं।
  • उदाहरण: हृदय का धड़कना, पाचन क्रिया, साँस लेना, पसीना आना।
  • ये क्रियाएँ किसी उद्दीपन (जैसे गर्मी, चुभन) के लिए त्वरित, स्वचालित और अनैच्छिक प्रतिक्रिया होती हैं।
  • ये मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती हैं ताकि शरीर को तुरंत खतरे से बचाया जा सके। मस्तिष्क को बाद में सूचना मिलती है।
  • इनमें अत्यंत तेज प्रतिक्रिया होती है और ये क्षणिक होती हैं।
  • उदाहरण: गर्म वस्तु को छूते ही हाथ का सिकुड़कर पीछे हटना, आँख में कुछ पड़ते ही पलक झपकना, घुटने पर हल्की चोट लगने पर पैर का झटके से उछलना।
मुख्य अंतर: सभी प्रतिवर्ती क्रियाएँ अनैच्छिक होती हैं, लेकिन सभी अनैच्छिक क्रियाएँ प्रतिवर्ती नहीं होतीं। प्रतिवर्ती क्रियाएँ विशेष रूप से तेज, सुरक्षात्मक और मेरुरज्जु द्वारा संचालित होती हैं।

10. जंतु हॉर्मोन क्या है? उदाहरण देकर समझाइए।

जंतु हॉर्मोन विशेष ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक दूत पदार्थ हैं जो रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचते हैं और उनकी कार्यप्रणाली को नियंत्रित एवं समन्वित करते हैं। ये बहुत कम मात्रा में ही प्रभावी होते हैं और शरीर की वृद्धि, विकास, चयापचय, प्रजनन, मनोदशा आदि को प्रभावित करते हैं।

कुछ महत्वपूर्ण जंतु हॉर्मोन और उनके कार्य:
  • इंसुलिन: अग्न्याशय द्वारा स्रावित। रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) के स्तर को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से मधुमेह रोग हो जाता है।
  • थायरॉक्सिन: थायरॉइड ग्रंथि द्वारा स्रावित। शरीर की चयापचय दर (मेटाबॉलिक रेट), वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है। आयोडीन इसके निर्माण के लिए आवश्यक है।
  • एड्रिनलीन (एपिनेफ्रीन): अधिवृक्क ग्रंथि द्वारा स्रावित। आपातकालीन स्थितियों में स्रावित होकर हृदय गति बढ़ाता है, रक्तचाप बढ़ाता है और शरीर को 'लड़ो या भागो' (फाइट ऑर फ्लाइट) की स्थिति के लिए तैयार करता है।
  • वृद्धि हॉर्मोन: पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित। हड्डियों और मांसपेशियों की वृद्धि को नियंत्रित करता है। बचपन में इसकी अधिकता से विशालकायता और कमी से बौनापन हो सकता है।
  • सेक्स हॉर्मोन (टेस्टोस्टेरोन, एस्ट्रोजन): ये क्रमशः वृषण और अंडाशय द्वारा स्रावित होते हैं और यौन लक्षणों के विकास तथा प्रजनन क्रिया के लिए उत्तरदायी होते हैं।

11. मस्तिष्क के विभिन्न भागों के नाम तथा उनके कार्य लिखिए।

मानव मस्तिष्क को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जा सकता है:

1. अग्रमस्तिष्क (फोरब्रेन)
  • प्रमस्तिष्क (सेरेब्रम): यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा और विकसित भाग है।
    • सोचने, तर्क करने, योजना बनाने, सीखने और स्मृति जैसे उच्च कार्यों के लिए जिम्मेदार।
    • इंद्रियों (देखना, सुनना, सूंघना, स्वाद लेना, स्पर्श) से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है।
    • इच्छानुसार गतिविधियों (जैसे बोलना, लिखना, चलना) को नियंत्रित करता है।
  • डायनसेफेलन (अंतर्मस्तिष्क): इसमें थैलेमस और हाइपोथैलेमस आते हैं।
    • थैलेमस: संवेदी आवेगों के लिए रिले स्टेशन का काम करता है (सिवाय घ्राण संवेद के)।
    • हाइपोथैलेमस: शरीर के तापमान, भोजन-पानी का संतुलन, भावनाओं और हॉर्मोन स्राव का नियंत्रण करता है।
2. मध्यमस्तिष्क (मिडब्रेन)
  • यह अग्र और पश्च मस्तिष्क के बीच संबंध स्थापित करता है।
  • आँख और कान से आने वाले संवेदी आवेगों के संचालन में मदद करता है।
  • शरीर की मुद्रा और गति में सहायक होता है।
3. पश्चमस्तिष्क (हिंडब्रेन)
  • मेडुला ऑब्लोंगेटा: मस्तिष्क का सबसे पिछला भाग जो मेरुरज्जु से जुड़ा होता है।
    • अनैच्छिक क्रियाएँ जैसे हृदय स्पंदन, श्वसन, रक्तचाप, छींकना, खाँसना, निगलना आदि को नियंत्रित करता है।
  • सेरिबैलम: मेडुला के ठीक ऊपर स्थित।
    • शरीर का संतुलन बनाए रखने, मांसपेशियों के समन्वय और सुचारू गति के लिए जिम्मेदार।
  • पॉन्स: सेरिबैलम के नीचे स्थित।
    • श्वसन को नियंत्रित करने में मदद करता है और मेडुला को सेरिबैलम से जोड़ता है।

अध्याय 7: नियंत्रण एवं समन्वय

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन एक पादप हार्मोन है?

(a) इन्सुलिन
(b) थाइरॉक्सिन
(c) एस्ट्रोजन
(d) साइटोकाइनिन

उत्तर: (d) साइटोकाइनिन

व्याख्या: साइटोकाइनिन एक पादप हार्मोन है जो कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है और पौधों की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन्सुलिन, थाइरॉक्सिन और एस्ट्रोजन जंतु हार्मोन हैं।


प्रश्न 2. दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को कहते हैं-

(a) द्रुमिका
(b) सिनेप्स
(c) एक्सॉन
(d) आवेग

उत्तर: (b) सिनेप्स

व्याख्या: सिनेप्स वह विशिष्ट रिक्त स्थान या अंतराल है जहाँ एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) का अक्षतंतु (एक्सॉन) दूसरी तंत्रिका कोशिका की द्रुमिका (डेंड्राइट) या कोशिका काय से मिलता है। यहीं पर रासायनिक संकेतों का आदान-प्रदान होता है।


प्रश्न 3. मस्तिष्क उत्तरदायी है-

(a) सोचने के लिए
(b) हृदय स्पंदन के लिए
(c) शरीर का संतुलन बनाने के लिए
(d) उपरोक्त सभी

उत्तर: (d) उपरोक्त सभी

व्याख्या: मस्तिष्क हमारे शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र है। यह न केवल सोचने, याद रखने और निर्णय लेने जैसे जटिल कार्यों के लिए जिम्मेदार है, बल्कि यह हृदय की धड़कन को नियंत्रित करने वाले अनैच्छिक कार्यों और शरीर का संतुलन बनाए रखने का काम भी करता है।


प्रश्न 4. हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है? ऐसे किन्हीं दो ग्राहियों के नाम लिखिए तथा उनके कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

ग्राही (रिसेप्टर) विशेष कोशिकाएँ या अंग हैं जो पर्यावरण से होने वाले परिवर्तनों (उद्दीपनों) को ग्रहण करके तंत्रिका तंत्र को सूचना प्रदान करते हैं।

दो ग्राही एवं उनके कार्य:

  1. नेत्र (आँख) में प्रकाश ग्राही: ये रेटिना में स्थित शंकु (कोन) एवं शलाका (रॉड) कोशिकाएँ होती हैं। ये प्रकाश की उपस्थिति, तीव्रता एवं रंग को ग्रहण करके दृश्य संकेत मस्तिष्क को भेजती हैं।
  2. त्वचा में स्पर्श/ताप ग्राही: ये त्वचा में फैली विशेष तंत्रिका अंत होती हैं। ये स्पर्श, दबाव, दर्द, गर्मी व ठंडक जैसी संवेदनाओं को ग्रहण करती हैं और मस्तिष्क को सचेत करती हैं।

प्रश्न 5. एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) का नामांकित चित्र बनाइए।

उत्तर:

तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) का चित्र

[यहाँ एक स्पष्ट, नामांकित चित्र बनाना है। नीचे दिए गए भागों को दर्शाएँ]

मुख्य भाग:

  1. कोशिका काय (साइटॉन): कोशिका का मुख्य भाग जिसमें केंद्रक होता है।
  2. द्रुमिकाएँ (डेंड्राइट्स): कोशिका काय से निकलने वाली शाखित रचनाएँ जो संकेतों को ग्रहण करती हैं।
  3. अक्षतंतु (एक्सॉन): कोशिका काय से निकलने वाली लंबी, पतली तथा एकल रचना जो संकेतों को दूसरी कोशिका तक ले जाती है।
  4. अक्षतंतु आच्छद (माइलिन शीथ): अक्षतंतु के चारों ओर का वसायुक्त आवरण जो आवेग के संचरण की गति बढ़ाता है।
  5. सिनेप्स: अक्षतंतु के अंतिम सिरे पर स्थित संरचना जहाँ से रासायनिक पदार्थ स्रावित होकर दूसरे न्यूरॉन से संपर्क करते हैं।

(छात्र कृपया उपरोक्त भागों को दर्शाता हुआ एक साफ-सुथरा चित्र अपनी कॉपी में बनाएँ।)


प्रश्न 6. मस्तिष्क के किन्हीं दो भागों के नाम लिखिए तथा उनके कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

मस्तिष्क के दो प्रमुख भाग एवं उनके कार्य:

  1. सेरेब्रम (अग्रमस्तिष्क का बड़ा भाग):
    • यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा एवं विकसित भाग है।
    • इसके कार्य हैं: सोचना, तर्क करना, सीखना, याद रखना, बोलना, इच्छाशक्ति, संवेदनाओं (देखना, सुनना, सूंघना आदि) का विश्लेषण करना।
  2. सेरेबेलम (अनुमस्तिष्क):
    • यह सेरेब्रम के पीछे स्थित होता है।
    • इसके प्रमुख कार्य हैं: शरीर की मांसपेशियों की गतिविधियों में समन्वय स्थापित करना, शरीर का संतुलन बनाए रखना तथा मुद्रा (पॉश्चर) को नियंत्रित करना।

प्रश्न 7. पादप हार्मोन क्या हैं? एक पादप हार्मोन का नाम लिखिए तथा उसके कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर:

पादप हार्मोन: पादप हार्मोन पौधों के विशिष्ट ऊतकों द्वारा स्रावित रासायनिक पदार्थ होते हैं जो बहुत ही कम मात्रा में पौधों की वृद्धि, विकास एवं अन्य क्रियाओं का नियमन एवं समन्वय करते हैं।

एक पादप हार्मोन - ऑक्सिन:

कार्य:

  • कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि (दीर्घीकरण) को प्रेरित करता है।
  • तने के शीर्ष पर स्थित होकर पार्श्व कलिकाओं के विकास को रोकता है (शीर्ष प्रभाविता)।
  • पौधे के प्रकाश की ओर मुड़ने (फोटोट्रॉपिज्म) एवं गुरुत्व की ओर मुड़ने (जियोट्रॉपिज्म) की क्रिया को नियंत्रित करता है।
  • जड़ निर्माण में सहायक होता है।
  • फलों के बिना निषेचन के विकास (पार्थेनोकार्पी) को प्रेरित कर सकता है।

प्रश्न 8. अनैच्छिक क्रियाओं तथा प्रतिवर्ती क्रियाओं में क्या अंतर है?

उत्तर:

अनैच्छिक क्रियाएँ प्रतिवर्ती क्रियाएँ
ये क्रियाएँ मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती हैं। ये क्रियाएँ मेरुरज्जु (स्पाइनल कॉर्ड) द्वारा नियंत्रित होती हैं।
इन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता, जैसे- हृदय स्पंदन, पाचन क्रिया। ये क्रियाएँ अचानक, तीव्र एवं स्वचालित होती हैं, परंतु इनमें मस्तिष्क की भूमिका नगण्य होती है, जैसे- गर्म वस्तु छूने पर हाथ सिकोड़ लेना।
ये धीमी गति से होने वाली निरंतर प्रक्रियाएँ हैं। ये तत्काल होने वाली प्रतिक्रियाएँ हैं जो शरीर को संभावित हानि से बचाती हैं।
इनके लिए उद्दीपन हमेशा बाहरी नहीं होता; अधिकांश आंतरिक होते हैं। इनके लिए उद्दीपन सदैव बाहरी होता है।

प्रश्न 9. जंतु हार्मोन क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

जंतु हार्मोन: जंतु हार्मोन शरीर की विशिष्ट अंत:स्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक दूत पदार्थ हैं। ये सीधे रक्त में मिलकर शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचते हैं और उनकी क्रियाओं का नियमन करते हैं।

उदाहरण:

  • इन्सुलिन: यह अग्न्याशय (पैंक्रियास) द्वारा स्रावित होता है। इसका मुख्य कार्य रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) के स्तर को नियंत्रित करना है। यह कोशिकाओं को ग्लूकोज ग्रहण करने में मदद करता है। इसकी कमी से मधुमेह (डायबिटीज) रोग हो जाता है।
  • थाइरॉक्सिन: यह थाइरॉइड ग्रंथि द्वारा स्रावित होता है। यह शरीर की उपापचय दर (मेटाबॉलिक रेट), शारीरिक वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करता है।

प्रश्न 10. पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?

उत्तर:

पादप में प्रकाशानुवर्तन (फोटोट्रॉपिज्म) पादप हार्मोन ऑक्सिन के असमान वितरण के कारण होता है।

प्रक्रिया:

  1. जब पौधे का तना एक तरफ से प्रकाश प्राप्त करता है, तो ऑक्सिन हार्मोन प्रकाश से दूर वाले हिस्से में एकत्रित हो जाता है।
  2. ऑक्सिन कोशिकाओं के लंबे होने (दीर्घीकरण) को प्रेरित करता है।
  3. चूंकि प्रकाश से दूर वाले हिस्से में ऑक्सिन की सांद्रता अधिक होती है, वहाँ की कोशिकाएँ तेजी से लंबी होती हैं।
  4. प्रकाश वाले हिस्से की कोशिकाएँ धीमी गति से बढ़ती हैं।
  5. इस असमान वृद्धि के कारण तना प्रकाश की ओर मुड़ जाता है। इसे धनात्मक प्रकाशानुवर्तन कहते हैं।
  6. इसी प्रकार, जड़ें प्रकाश से दूर मुड़ती हैं (ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन), क्योंकि जड़ों पर ऑक्सिन का प्रभाव विपरीत होता है।

प्रश्न 11. मानव मस्तिष्क के विभिन्न भागों के नाम एवं कार्य लिखिए।

उत्तर:

मस्तिष्क का भाग प्रमुख कार्य
सेरेब्रम (अग्रमस्तिष्क) सोचना, तर्क करना, सीखना, स्मृति, बोलना, इंद्रियों से प्राप्त संवेदनाओं का विश्लेषण, स्वैच्छिक गतियों का नियंत्रण।
सेरेबेलम (अनुमस्तिष्क) शरीर का संतुलन बनाए रखना, मांसपेशियों की गतिविधियों में समन्वय स्थापित करना, मुद्रा नियंत्रण।
मेडुला ऑब्लोंगेटा (प्रमस्तिष्क) अनैच्छिक क्रियाओं जैसे हृदय स्पंदन, श्वसन, रक्तदाब, छींक, खाँसी, उल्टी, लार आदि का नियंत्रण।
हाइपोथैलेमस शरीर का तापमान, भूख-प्यास, भावनाओं तथा नींद-जागने के चक्र का नियमन।
पिट्यूटरी ग्रंथि मास्टर ग्रंथि; अन्य अंत:स्रावी ग्रंथियों के स्राव को नियंत्रित करती है, वृद्धि हार्मोन स्रावित करती है।

प्रश्न 12. पादप में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है?

उत्तर:

पादपों में रासायनिक समन्वय पादप हार्मोन (फाइटोहोर्मोन) के द्वारा होता है।

  • पादप हार्मोन पौधों के विशिष्ट ऊतकों (जैसे प्ररोह शीर्ष, मूल शीर्ष, युवा पत्तियाँ) में बनते हैं।
  • ये हार्मोन विसरण द्वारा पौधे के अन्य भागों में पहुँचते हैं।
  • ये बहुत कम मात्रा में ही विभिन्न क्रियाओं को प्रेरित या नियंत्रित करते हैं।

उदाहरण:

  • ऑक्सिन तने की वृद्धि एवं प्रकाशानुवर्तन को नियंत्रित करता है।
  • जिबरेलिन तने की लंबाई बढ़ाने, बीज के अंकुरण को प्रेरित करने में सहायक होता है।
  • साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है और पत्तियों की जीर्णता (बूढ़ा होना) को रोकता है।
  • एब्सिसिक अम्ल (ABA) एक अवरोधक हार्मोन है जो वृद्धि को रोकता है, पत्तियों के गिरने (पर्णपात) एवं कलिकाओं की निष्क्रियता को नियंत्रित करता है।

इस प्रकार, विभिन्न हार्मोनों का सामूहिक एवं समन्वित प्रभाव पौधे के सम्पूर्ण विकास को नियंत्रित करता है।

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