Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण) Solutions

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Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण) Solutions

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प्रश्न 1. आवर्त सारणी में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों के परमाणु आकार में क्या परिवर्तन होता है?

आवर्त सारणी में किसी आवर्त (पीरियड) में बायीं ओर से दायीं ओर जाने पर तत्वों का परमाणु आकार (Atomic Size) घटता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक ही आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है, जिससे नाभिक पर धनावेश बढ़ता है। साथ ही, इलेक्ट्रॉन नई कोश में न जाकर उसी कोश में जुड़ते हैं। इससे नाभिक का इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर खींचने का बल (नाभिकीय आकर्षण) बढ़ जाता है और इलेक्ट्रॉन नाभिक के अधिक पास आ जाते हैं, जिससे परमाणु का आकार छोटा हो जाता है।

प्रश्न 2. आवर्त सारणी में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों की धात्विक प्रकृति में क्या परिवर्तन होता है?

आवर्त सारणी में किसी वर्ग (ग्रुप) में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों की धात्विक प्रकृति बढ़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है और बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं। इससे नाभिक का बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर आकर्षण बल कमजोर पड़ जाता है और इलेक्ट्रॉन आसानी से त्यागे जा सकते हैं। इलेक्ट्रॉन त्यागने की यह प्रवृत्ति (धनात्मक आयन बनाने की क्षमता) बढ़ जाती है, जो धातुओं का मुख्य गुण है। इसलिए धात्विक गुण बढ़ जाते हैं।

प्रश्न 3. आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण के लिए किस गुण को सर्वाधिक उपयुक्त माना गया है और क्यों?

आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण के लिए परमाणु क्रमांक (Atomic Number) को सर्वाधिक उपयुक्त माना गया है। मेन्डेलीफ के समय परमाणु क्रमांक की जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने परमाणु भार के आधार पर वर्गीकरण किया था। लेकिन बाद में मोसले ने सिद्ध किया कि तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु क्रमांक के आवर्त फलन होते हैं, न कि परमाणु भार के। परमाणु क्रमांक ही किसी तत्व की पहचान निर्धारित करता है और यह नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होता है, जो कि एक स्थिर मान है। इसलिए आधुनिक आवर्त सारणी तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के क्रम में व्यवस्थित करती है।

प्रश्न 4. आधुनिक आवर्त सारणी में कितने आवर्त और कितने वर्ग हैं?

आवर्त (Periods) वर्ग (Groups)
आधुनिक आवर्त सारणी में 7 आवर्त (क्षैतिज पंक्तियाँ) हैं। आधुनिक आवर्त सारणी में 18 वर्ग (ऊर्ध्वाधर स्तंभ) हैं।

पहले तीन आवर्त छोटे होते हैं, जबकि चौथा, पाँचवाँ और छठा आवर्त लंबे होते हैं। सातवाँ आवर्त अभी भी अपूर्ण है। 18 वर्गों को 1 से 18 तक की संख्याओं से दर्शाया जाता है।

प्रश्न 5. आवर्त सारणी में हैलोजन को किस वर्ग में रखा गया है?

आवर्त सारणी में हैलोजन तत्वों को वर्ग 17 (Group 17) में रखा गया है। यह वर्ग आवर्त सारणी के दायीं ओर स्थित है। हैलोजन अधातुएँ होती हैं और इनमें फ्लोरीन (F), क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I) और एस्टेटीन (At) शामिल हैं। इन सभी के बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए ये एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके स्थिर अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त करने की प्रबल प्रवृत्ति रखते हैं।

प्रश्न 6. आवर्त सारणी में एक ही वर्ग के तत्वों के गुण समान क्यों होते हैं?

एक ही वर्ग (ग्रुप) के तत्वों के गुण समान होते हैं क्योंकि उनके बाहरी कोश (वैलेंस शेल) में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। किसी तत्व के रासायनिक गुण मुख्य रूप से उसके बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉनों की संख्या और व्यवस्था पर निर्भर करते हैं। चूंकि एक वर्ग के सभी तत्वों के बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बराबर होती है, इसलिए वे रासायनिक अभिक्रियाओं में समान प्रकार का व्यवहार दिखाते हैं और उनके गुणधर्म भी मिलते-जुलते होते हैं। उदाहरण के लिए, वर्ग 1 के सभी तत्व (क्षार धातुएँ) के बाहरी कोश में 1 इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए वे सभी अत्यंत क्रियाशील होते हैं और पानी के साथ अभिक्रिया कर क्षारीय हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं।

प्रश्न 7. आवर्त सारणी के इतिहास में मेन्डेलीफ का मुख्य योगदान क्या था?

आवर्त सारणी के इतिहास में डिमिट्री इवानोविच मेन्डेलीफ का मुख्य योगदान यह था कि उन्होंने सन् 1869 में तत्वों की आवर्त सारणी प्रस्तुत की। उन्होंने तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु भार के क्रम में व्यवस्थित किया और देखा कि समान गुण वाले तत्व नियमित अंतराल के बाद आते हैं। उनकी सारणी की प्रमुख विशेषताएँ थीं:

  1. उन्होंने कुछ तत्वों के परमाणु भार को उनके गुणों के अनुरूप ठीक किया।
  2. उन्होंने अपनी सारणी में रिक्त स्थान छोड़े और भविष्यवाणी की कि ये स्थान अभी तक खोजे न गए तत्वों से भरे जाएँगे। उन्होंने इन अज्ञात तत्वों के गुणों का भी सफलतापूर्वक अनुमान लगाया।
  3. उनकी सारणी ने नए तत्वों की खोज के लिए मार्गदर्शन दिया।
हालाँकि मेन्डेलीफ की सारणी में कुछ सीमाएँ थीं, लेकिन इसने आधुनिक आवर्त सारणी की नींव रखी।

प्रश्न 8. उच्च आवेश घनत्व का क्या अर्थ है?

उच्च आवेश घनत्व (High Charge Density) का अर्थ है किसी आयन या परमाणु पर आवेश की मात्रा का उसके आकार के अनुपात में अधिक होना। सरल शब्दों में, यदि कोई आयन छोटा है और उस पर आवेश अधिक है, तो उसका आवेश घनत्व उच्च होगा। उदाहरण के लिए, Li⁺ आयन का आकार Na⁺ आयन से छोटा होता है, और दोनों पर +1 आवेश होता है। इसलिए Li⁺ का आवेश घनत्व Na⁺ से अधिक होगा। उच्च आवेश घनत्व वाले आयन दूसरे आयनों या अणुओं को अधिक प्रबलता से आकर्षित करते हैं, जिससे उनकी जलयोजन ऊर्जा (Hydration Energy) अधिक होती है और वे अभिक्रियाओं में अधिक सक्रिय हो सकते हैं।

प्रश्न 9. आवर्त सारणी के प्रथम आवर्त में केवल दो तत्व क्यों हैं?

आवर्त सारणी के प्रथम आवर्त में केवल दो तत्व (हाइड्रोजन और हीलियम) हैं क्योंकि पहला कोश (K-शेल) केवल अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन ही धारण कर सकता है। किसी आवर्त में तत्वों की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि उस आवर्त में नए इलेक्ट्रॉन किस कोश में भरते हैं। पहला आवर्त सबसे पहले कोश (n=1) के भरने से संबंधित है, जिसमें केवल एक 's' उपकोश होता है और यह अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन रख सकता है। इसलिए, जब पहला कोश इलेक्ट्रॉनों से भर जाता है, तो आवर्त समाप्त हो जाता है। हाइड्रोजन में 1 इलेक्ट्रॉन और हीलियम में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो पहले कोश की क्षमता को पूरा कर देते हैं।

प्रश्न 10. आवर्त सारणी के द्वितीय आवर्त में 8 तत्व क्यों हैं?

आवर्त सारणी के द्वितीय आवर्त में 8 तत्व हैं क्योंकि यह आवर्त दूसरे कोश (n=2) के इलेक्ट्रॉनों से भरने से संबंधित है। दूसरे कोश में दो उपकोश होते हैं: '2s' (जो 2 इलेक्ट्रॉन रख सकता है) और '2p' (जो 6 इलेक्ट्रॉन रख सकता है)। इस प्रकार, दूसरे कोश में कुल इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 2 + 6 = 8 होती है। द्वितीय आवर्त के तत्व लिथियम (Li) से शुरू होकर नियॉन (Ne) पर समाप्त होते हैं, जिसमें क्रमशः 3 से 10 तक परमाणु क्रमांक वाले तत्व शामिल हैं। प्रत्येक नया तत्व एक नया इलेक्ट्रॉन जोड़ता है, जब तक कि कोश पूर्ण नहीं हो जाता। इसलिए इस आवर्त में कुल 8 तत्व होते हैं।

प्रश्न 11. आवर्त सारणी में धातु, अधातु एवं उपधातु को किस प्रकार विभेदित करते हैं?

धातु (Metals) अधातु (Non-Metals) उपधातु (Metalloids)
आवर्त सारणी के बायीं ओर और मध्य में स्थित (वर्ग 1, 2 और संक्रमण तत्व)। आवर्त सारणी के दायीं ओर स्थित (वर्ग 14 से 17 के ऊपरी भाग)। धातु और अधातु के बीच की रेखा के साथ स्थित (जैसे B, Si, Ge, As, Sb, Te)।
चमकदार, आघातवर्ध्य, तन्य, ऊष्मा व विद्युत की सुचालक होती हैं। चमकहीन, भंगुर, ऊष्मा व विद्युत की कुचालक होती हैं (ग्रेफाइट को छोड़कर)। धातु और अधातु दोनों के मध्यवर्ती गुण दिखाते हैं।
इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं। इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं। परिस्थिति के अनुसार धातु या अधातु जैसा व्यवहार कर सकते हैं।

प्रश्न 12. आवर्त सारणी में तत्वों का वर्गीकरण किस आधार पर किया गया है?

आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों का वर्गीकरण निम्नलिखित आधारों पर किया गया है:

  1. परमाणु क्रमांक (Atomic Number): तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के क्रम में व्यवस्थित किया गया है।
  2. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration): तत्वों को उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्तों (क्षैतिज पंक्तियों) और वर्गों (ऊर्ध्वाधर स्तंभों) में रखा गया है। एक ही आवर्त के तत्वों के बाहरी कोश समान होते हैं, जबकि एक ही वर्ग के तत्वों के बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।
  3. रासायनिक गुणधर्म (Chemical Properties): समान रासायनिक गुण रखने वाले तत्वों को एक ही वर्ग में रखा गया है।
इस प्रकार, आवर्त सारणी तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और उनके गुणों के बीच एक व्यवस्थित संबंध दर्शाती है।

प्रश्न 13. आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बायीं ओर से दायीं ओर जाने पर तत्वों के गुणों में क्या परिवर्तन होता है?

किसी आवर्त में बायीं ओर से दायीं ओर जाने पर तत्वों के गुणों में निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं:

  1. धात्विक गुण (Metallic Character): धात्विक गुण कम होते जाते हैं और अधात्विक गुण बढ़ते जाते हैं। बायीं ओर के तत्व स्पष्ट धातुएँ होती हैं, जबकि दायीं ओर के तत्व स्पष्ट अधातुएँ होती हैं।
  2. परमाणु आकार (Atomic Size): परमाणु आकार घटता जाता है क्योंकि नाभिकीय आकर्षण बढ़ जाता है।
  3. इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति (Electronegativity): बढ़ती जाती है।
  4. इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति (Electropositivity): घटती जाती है।
  5. ऑक्साइडों की प्रकृति (Nature of Oxides): बायीं ओर के तत्वों के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं, जो दायीं ओर जाने पर अम्लीय हो जाते हैं। मध्य में उभयधर्मी ऑक्साइड पाए जाते हैं।
इन परिवर्तनों का कारण एक ही कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ नाभिकीय आकर्षण में वृद्धि होना है।

प्रश्न 14. आवर्त सारणी में किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों के गुणों में क्या परिवर्तन होता है?

किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों के गुणों में निम्नलिखित परिवर्तन होते हैं:

  1. धात्विक गुण (Metallic Character): धात्विक गुण बढ़ते जाते हैं। ऊपर के तत्व अधात्विक प्रकृति के हो सकते हैं, लेकिन नीचे जाने पर वे धात्विक हो जाते हैं।
  2. परमाणु आकार (Atomic Size): परमाणु आकार बढ़ता जाता है क्योंकि नए कोश जुड़ते जाते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं।
  3. इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति (Electronegativity): घटती जाती है।
  4. इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति (Electropositivity): बढ़ती जाती है।
  5. तत्वों की क्रियाशीलता (Reactivity): धातुओं के वर्ग में क्रियाशीलता बढ़ती है, जबकि अधातुओं के वर्ग (जैसे हैलोजन) में क्रियाशीलता घटती है।
इन परिवर्तनों का मुख्य कारण परमाणु आकार में वृद्धि और नाभिक से बाहरी इलेक्ट्रॉनों की दूरी बढ़ना है, जिससे नाभिकीय आकर्षण कमजोर पड़ जाता है।

प्रश्न 15. आवर्त सारणी के वर्ग 1 के तत्वों को क्षार धातु क्यों कहते हैं?

आवर्त सारणी के वर्ग 1 के तत्वों (लिथियम, सोडियम, पोटैशियम, रुबिडियम, सीज़ियम, फ्रान्सियम) को क्षार धातु (Alkali Metals) कहते हैं, क्योंकि:

  1. ये धातुएँ पानी के साथ अभिक्रिया करके प्रबल क्षारीय हाइड्रॉक्साइड बनाती हैं। उदाहरण: 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂।
  2. इनके हाइड्रॉक्साइड जल में घुलकर क्षारीय विलयन देते हैं, जो लिटमस पेपर को नीला कर देते हैं।
  3. ये अत्यंत क्रियाशील होती हैं और प्रकृति में शुद्ध अवस्था में नहीं पाई जातीं, बल्कि यौगिकों (जैसे NaCl, KCl) के रूप में मिलती हैं।
  4. इन सभी के बाहरी कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है, जिसे वे आसानी से त्यागकर +1 आवेश वाला आयन बनाती हैं।
"क्षार" शब्द अरबी भाषा के शब्द "अल-कली" से आया है, जिसका अर्थ है पौधों की राख, क्योंकि प्रारंभ में इन तत्वों के यौगिक पौधों की राख से प्राप्त किए गए थे।

प्रश्न 1. आवर्त सारणी में बायें से दायें जाने पर तत्वों के परमाणु आकार किस प्रकार परिवर्तित होते हैं ?

आवर्त सारणी में किसी आवर्त (पीरियड) में बायें से दायें जाने पर परमाणु का आकार (परमाणु त्रिज्या) घटता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बायें से दायें जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है, जिससे नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या और नाभिकीय आवेश बढ़ता है। इस बढ़े हुए आवेश के कारण इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर अधिक मजबूती से खींचा जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉन बादल सिकुड़ जाता है और परमाणु का आकार घट जाता है।

प्रश्न 2. आवर्त सारणी में समूह में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों की धात्विक प्रवृत्ति किस प्रकार परिवर्तित होती है ?

आवर्त सारणी में किसी समूह (ग्रुप) में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों की धात्विक प्रवृत्ति बढ़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है और बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते जाते हैं। इससे नाभिक का बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर आकर्षण बल कमजोर पड़ जाता है और इलेक्ट्रॉनों को त्यागना (जिससे धनायन बनते हैं) आसान हो जाता है, जो धातुओं का एक मुख्य गुण है।

प्रश्न 3. आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को किस आधार पर वर्गीकृत किया गया है ?

आधुनिक आवर्त सारणी (मेंडेलीफ की आवर्त सारणी का आधुनिक रूप) में तत्वों का वर्गीकरण उनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number) के बढ़ते क्रम के आधार पर किया गया है। परमाणु क्रमांक किसी तत्व के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या होती है। जब तत्वों को परमाणु क्रमांक के बढ़ते क्रम में रखा जाता है, तो उनके गुणधर्मों में एक निश्चित अंतराल (आवर्त) के बाद समानता दिखाई देती है, जिसे आवर्ती नियम कहते हैं।

प्रश्न 4. आवर्त सारणी के प्रथम समूह के तत्वों के नाम लिखिए।

आवर्त सारणी के प्रथम समूह (Group 1) के तत्वों को क्षार धातुएँ (Alkali Metals) कहा जाता है। इनके नाम हैं:

  1. हाइड्रोजन (H)
  2. लिथियम (Li)
  3. सोडियम (Na)
  4. पोटैशियम (K)
  5. रुबिडियम (Rb)
  6. सीज़ियम (Cs)
  7. फ्रेंशियम (Fr)

नोट: हाइड्रोजन एक अपवाद है क्योंकि यह एक अधातु है, लेकिन इसे इस समूह में रखा गया है क्योंकि इसके बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन है।

प्रश्न 5. आवर्त सारणी के तीसरे आवर्त के तत्वों के नाम लिखिए।

आवर्त सारणी के तीसरे आवर्त (Period 3) में आठ तत्व हैं। इनके नाम (परमाणु क्रमांक के क्रम में) हैं:

  1. सोडियम (Na) - 11
  2. मैग्नीशियम (Mg) - 12
  3. एल्युमिनियम (Al) - 13
  4. सिलिकॉन (Si) - 14
  5. फॉस्फोरस (P) - 15
  6. सल्फर (S) - 16
  7. क्लोरीन (Cl) - 17
  8. आर्गन (Ar) - 18

प्रश्न 6. आवर्त सारणी के समूह 17 के तत्वों के नाम लिखिए।

आवर्त सारणी के समूह 17 (Group 17) के तत्वों को हैलोजन (Halogen) कहा जाता है। 'हैलोजन' शब्द का अर्थ है 'लवण निर्माता'। इनके नाम हैं:

  1. फ्लोरीन (F)
  2. क्लोरीन (Cl)
  3. ब्रोमीन (Br)
  4. आयोडीन (I)
  5. एस्टेटीन (At)

प्रश्न 7. आवर्त सारणी के दो लाभ लिखिए।

आवर्त सारणी के दो प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  1. तत्वों के गुणों का अध्ययन सरल बनाना: आवर्त सारणी समान गुणधर्म वाले तत्वों को एक ही समूह में रखती है। इससे किसी भी तत्व के मूल गुणों (जैसे संयोजकता, अभिक्रियाशीलता, धात्विक प्रकृति) का अनुमान उसके स्थान से लगाया जा सकता है।
  2. नए तत्वों की खोज में मार्गदर्शन: आवर्त सारणी ने रिक्त स्थानों के आधार पर उस समय अज्ञात तत्वों के अस्तित्व और उनके गुणों की भविष्यवाणी करने में मदद की, जैसे गैलियम, स्कैंडियम और जर्मेनियम की खोज।

प्रश्न 8. मेंडेलीफ की आवर्त सारणी के दो दोष लिखिए।

मेंडेलीफ की मूल आवर्त सारणी के दो प्रमुख दोष निम्नलिखित थे:

  1. हाइड्रोजन का स्थान निश्चित न होना: हाइड्रोजन के गुण क्षार धातुओं (Group 1) और हैलोजन (Group 17) दोनों से मिलते-जुलते हैं। मेंडेलीफ की सारणी में हाइड्रोजन के लिए कोई निश्चित और उपयुक्त स्थान नहीं था।
  2. समस्थानिकों की स्थिति स्पष्ट न होना: समस्थानिक वे परमाणु होते हैं जिनका परमाणु क्रमांक समान लेकिन परमाणु भार भिन्न होता है। चूंकि मेंडेलीफ ने तत्वों को परमाणु भार के आधार पर वर्गीकृत किया था, इसलिए समस्थानिकों को सारणी में अलग-अलग स्थान मिलना चाहिए था, जो तर्कसंगत नहीं था क्योंकि उनके रासायनिक गुण समान होते हैं।

प्रश्न 9. आवर्त सारणी में धातु, अधातु एवं उपधातु किस प्रकार वर्गीकृत हैं ?

आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को उनके भौतिक एवं रासायनिक गुणों के आधार पर धातु, अधातु और उपधातु में वर्गीकृत किया गया है:

  • धातु (Metals): ये सारणी के बायीं ओर और मध्य भाग में पाए जाते हैं। इनमें क्षार धातुएँ, क्षारीय मृदा धातुएँ, संक्रमण धातुएँ आदि शामिल हैं। ये विद्युत और ऊष्मा की सुचालक, आघातवर्ध्य और तन्य होती हैं।
  • अधातु (Non-metals): ये सारणी के दायीं ओर (मुख्यतः समूह 14 से 17 तक के शीर्ष भाग में) पाए जाते हैं। जैसे कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हैलोजन, उत्कृष्ट गैसें। ये विद्युत और ऊष्मा की कुचालक (कुछ अपवादों को छोड़कर) होती हैं और भंगुर होते हैं।
  • उपधातु (Metalloids): ये धातु और अधातु के बीच के गुण प्रदर्शित करते हैं और आवर्त सारणी में एक ज़िग-ज़ैग रेखा के साथ स्थित होते हैं। यह रेखा बोरॉन (B) से शुरू होकर एस्टेटीन (At) तक जाती है। इनमें बोरॉन, सिलिकॉन, जर्मेनियम, आर्सेनिक, एंटीमनी, टेल्यूरियम आदि शामिल हैं। ये अर्धचालक के रूप में कार्य कर सकते हैं।

प्रश्न 10. आवर्त सारणी में आवर्त एवं समूह से क्या तात्पर्य है ?

आवर्त सारणी में आवर्त और समूह दो मूलभूत संरचनात्मक इकाइयाँ हैं:

  • आवर्त (Period): आवर्त सारणी में क्षैतिज पंक्तियों को आवर्त कहते हैं। कुल 7 आवर्त हैं। एक ही आवर्त में बायें से दायें जाने पर तत्वों का परमाणु क्रमांक क्रमशः बढ़ता है और उनके गुणधर्म भी क्रमिक रूप से बदलते हैं। प्रत्येक नया आवर्त एक नए इलेक्ट्रॉनिक कोश (ऊर्जा स्तर) के भरने की शुरुआत को दर्शाता है।
  • समूह (Group): आवर्त सारणी में ऊर्ध्वाधर कॉलम (खड़े स्तंभ) को समूह कहते हैं। कुल 18 समूह हैं। एक ही समूह के सभी तत्वों के बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, जो उनकी संयोजकता निर्धारित करती है। इसीलिए एक समूह के तत्वों के रासायनिक गुण समान होते हैं।

प्रश्न 11. आवर्त सारणी में निम्नलिखित तत्वों की स्थिति बताइए-
(क) वह तत्व जिसमें दो कोश हैं तथा बाहरी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन हैं।
(ख) वह तत्व जिसमें तीन कोश हैं तथा बाहरी कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं।
(ग) वह तत्व जिसमें कुल तीन कोश हैं तथा संयोजकता कोश में 3 इलेक्ट्रॉन हैं।

(क) दो कोश होने का अर्थ है कि तत्व दूसरे आवर्त (n=2) में है। बाहरी कोश (दूसरा कोश) में 6 इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए इसकी संयोजकता 6 है। यह समूह 16 (पुरानी संख्या के अनुसार समूह VIA) का तत्व है। अतः यह तत्व दूसरे आवर्त, समूह 16 में स्थित है। यह तत्व ऑक्सीजन (O, परमाणु क्रमांक 8) है।

(ख) तीन कोश होने का अर्थ है कि तत्व तीसरे आवर्त (n=3) में है। बाहरी कोश (तीसरा कोश) में 2 इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए इसकी संयोजकता 2 है। यह समूह 2 (पुरानी संख्या के अनुसार समूह IIA) का तत्व है। अतः यह तत्व तीसरे आवर्त, समूह 2 में स्थित है। यह तत्व मैग्नीशियम (Mg, परमाणु क्रमांक 12) है।

(ग) कुल तीन कोश होने का अर्थ है कि तत्व तीसरे आवर्त (n=3) में है। संयोजकता कोश (बाहरी कोश) में 3 इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए इसकी संयोजकता 3 है। यह समूह 13 (पुरानी संख्या के अनुसार समूह IIIA) का तत्व है। अतः यह तत्व तीसरे आवर्त, समूह 13 में स्थित है। यह तत्व एल्युमिनियम (Al, परमाणु क्रमांक 13) है।

प्रश्न 12. निम्नलिखित के उत्तर दीजिए-
(क) आवर्त सारणी में किस तत्व की स्थिति सबसे बायीं ओर है ?
(ख) आवर्त सारणी में किस तत्व की स्थिति सबसे दायीं ओर है ?
(ग) आवर्त सारणी में कौन-सा तत्व सबसे अधिक विद्युत धनात्मक है ?
(घ) आवर्त सारणी में कौन-सा तत्व सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक है ?

(क) आवर्त सारणी में सबसे बायीं ओर (प्रथम आवर्त के प्रथम समूह में) हाइड्रोजन (H) स्थित है। (नोट: फ्रेंशियम भी बायीं ओर है लेकिन यह प्रकृति में दुर्लभ और रेडियोएक्टिव है, इसलिए सामान्यतः हाइड्रोजन को ही सबसे बायीं ओर माना जाता है)।

(ख) आवर्त सारणी में सबसे दायीं ओर (प्रथम आवर्त के अंतिम समूह 18 में) हीलियम (He) स्थित है। हीलियम एक उत्कृष्ट गैस है।

(ग) आवर्त सारणी में सबसे अधिक विद्युत धनात्मक (इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति सबसे अधिक) तत्व वह होता है जो सबसे बायीं ओर और सबसे नीचे स्थित हो। यह फ्रेंशियम (Fr) है, जो समूह 1 का सबसे नीचे वाला तत्व है।

(घ) आवर्त सारणी में सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक (इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति सबसे अधिक) तत्व वह होता है जो सबसे दायीं ओर और सबसे ऊपर स्थित हो (हीलियम को छोड़कर क्योंकि वह अक्रिय है)। यह फ्लोरीन (F) है, जो समूह 17 का सबसे ऊपर वाला तत्व है।

प्रश्न 13. निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा समान गुण वाले तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है ?
(क) Na (सोडियम) तथा Mg (मैग्नीशियम)
(ख) Li (लिथियम) तथा Na (सोडियम)
(ग) Ca (कैल्शियम) तथा Si (सिलिकॉन)
(घ) B (बोरॉन) तथा C (कार्बन)

सही उत्तर है: (ख) Li (लिथियम) तथा Na (सोडियम)

व्याख्या: लिथियम (Li) और सोडियम (Na) दोनों आवर्त सारणी के समूह 1 (क्षार धातु) के सदस्य हैं। एक ही समूह के तत्वों के बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है (इस मामले में 1), जिसके कारण उनके रासायनिक गुण समान होते हैं। दोनों अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ हैं, पानी के साथ अभिक्रिया कर क्षार और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं, और दोनों की संयोजकता 1 है। अन्य विकल्प अलग-अलग समूहों के तत्व हैं, इसलिए उनके गुण भिन्न हैं।

प्रश्न 14. निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा असमान गुण वाले तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है ?
(क) Na (सोडियम) तथा K (पोटैशियम)
(ख) Mg (मैग्नीशियम) तथा Ca (कैल्शियम)
(ग) C (कार्बन) तथा Si (सिलिकॉन)
(घ) F (फ्लोरीन) तथा Cl (क्लोरीन)

सही उत्तर है: (ग) C (कार्बन) तथा Si (सिलिकॉन)

व्याख्या: कार्बन (C) और सिलिकॉन (Si) दोनों समूह 14 के सदस्य हैं और कुछ समानताएँ रखते हैं (जैसे चतु:संयोजकता)। हालाँकि, प्रश्न पूछ रहा है कि कौन-सा जोड़ा असमान गुण वाले तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है। अन्य तीनों विकल्पों में दिए गए जोड़े एक ही समूह के हैं (Na-K समूह 1, Mg-Ca समूह 2, F-Cl समूह 17) और उनके गुण अत्यधिक समान हैं। लेकिन कार्बन और सिलिकॉन के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि कार्बन एक विशिष्ट अधातु है जबकि सिलिकॉन एक उपधातु है। कार्बन जैविक यौगिकों का आधार है और यह श्रृंखलन (Catenation) का अद्वितीय गुण दिखाता है, जो सिलिकॉन में उतना प्रबल नहीं है। इस प्रकार, अन्य जोड़ों की तुलना में, यह जोड़ा सबसे अधिक असमान गुण प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 15. निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व आवर्त सारणी में दिये गये स्थान के अनुसार उचित रूप से रखा गया है ?
(क) Na - समूह 1, आवर्त 2
(ख) C - समूह 14, आवर्त 2
(ग) Si - समूह 14, आवर्त 3
(घ) Cl - समूह 17, आवर्त 3

सही उत्तर है: (क) Na - समूह 1, आवर्त 2 गलत है, जबकि अन्य सभी सही हैं।

विस्तृत व्याख्या:
(क) Na (सोडियम, परमाणु क्रमांक 11): इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,1 है। इसमें 3 कोश हैं, इसलिए यह आवर्त 3 में होना चाहिए। बाहरी कोश में 1 इलेक्ट्रॉन है, इसलिए यह समूह 1 में सही है। अतः दिया गया स्थान (समूह 1, आवर्त 2) गलत है।
(ख) C (कार्बन, परमाणु क्रमांक 6): इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,4 है। 2 कोश होने के कारण यह आवर्त 2 में है। बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह समूह 14 में है। अतः यह स्थान सही है।
(ग) Si (सिलिकॉन, परमाणु क्रमांक 14): इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,4 है। 3 कोश होने के कारण यह आवर्त 3 में है। बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह समूह 14 में है। अतः यह स्थान सही है।
(घ) Cl (क्लोरीन, परमाणु क्रमांक 17): इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,7 है। 3 कोश होने के कारण यह आवर्त 3 में है। बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह समूह 17 में है। अतः यह स्थान सही है।
प्रश्न पूछता है "कौन-सा तत्व... उचित रूप से रखा गया है?" चूंकि विकल्प (क) गलत है और बाकी सही हैं, इसलिए प्रश्न के संदर्भ में, विकल्प (ख), (ग) और (घ) सही उत्तर हैं। लेकिन चूंकि यह एक वस्तुनिष्ठ प्रश्न है और आमतौर पर एक ही सही उत्तर होता है, तो प्रश्न में त्रुटि हो सकती है। दिए गए विकल्पों में केवल (क) ही गलत स्थिति दर्शा रहा है, इसलिए यदि हमें गलत विकल्प चुनना है तो (क) है। यदि सही विकल्प चुनना है तो (ख), (ग), (घ) हैं।

प्रश्न 1. आवर्त सारणी में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों के परमाणु आकार में क्या परिवर्तन होता है?

आवर्त सारणी में किसी आवर्त (पीरियड) में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों का परमाणु आकार (Atomic Size) घटता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक ही आवर्त में बायें से दायें जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है, जिससे नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या और उसका आवेश बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए नाभिकीय आकर्षण के कारण इलेक्ट्रॉनों का आवरण नाभिक के अधिक निकट खिंच जाता है, जिससे परमाणु का आकार छोटा हो जाता है।

प्रश्न 2. आवर्त सारणी में उपर से नीचे जाने पर तत्वों के परमाणु आकार में क्या परिवर्तन होता है?

आवर्त सारणी में किसी वर्ग (ग्रुप) में उपर से नीचे जाने पर तत्वों का परमाणु आकार (Atomic Size) बढ़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जैसे-जैसे हम एक वर्ग में नीचे जाते हैं, तत्वों में इलेक्ट्रॉनों के नए कोश (ऊर्जा स्तर) जुड़ते जाते हैं। इन अतिरिक्त कोशों के कारण इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते जाते हैं और नाभिक का आकर्षण बल भी आवरणों की संख्या बढ़ने से कमजोर पड़ जाता है। इससे परमाणु का आकार बढ़ जाता है।

प्रश्न 3. आधुनिक आवर्त सारणी में कितने आवर्त और कितने वर्ग हैं?

आधुनिक आवर्त सारणी (मेंडेलीफ की संशोधित सारणी) में कुल 7 आवर्त (Periods) और 18 वर्ग (Groups) हैं।

  • आवर्त (Periods): ये क्षैतिज पंक्तियाँ हैं। इनकी संख्या 1 से 7 तक है।
  • वर्ग (Groups): ये ऊर्ध्वाधर कॉलम हैं। इनकी संख्या 1 से 18 तक है। इन्हें I से VIII तक और फिर शून्य समूह में भी वर्गीकृत किया जा सकता है, लेकिन आधुनिक IUPAC पद्धति में 1-18 वर्ग संख्या का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 4. आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को किस आधार पर वर्गीकृत किया गया है?

आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों का वर्गीकरण मुख्य रूप से दो आधारों पर किया गया है:

  1. परमाणु क्रमांक (Atomic Number): यह आवर्त सारणी का मूल आधार है। तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के क्रम में व्यवस्थित किया गया है।
  2. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration): तत्वों के रासायनिक गुण उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करते हैं। जिन तत्वों के बाह्यतम कोश (वैलेंस शेल) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है, उन्हें एक ही वर्ग (ग्रुप) में रखा गया है।

प्रश्न 5. आवर्त सारणी के किसी वर्ग में उपर से नीचे जाने पर तत्वों की धात्विक प्रवृत्ति पर क्या प्रभाव पड़ता है?

आवर्त सारणी के किसी वर्ग में उपर से नीचे जाने पर तत्वों की धात्विक प्रवृत्ति (Metallic Character) बढ़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ जाता है और बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते जाते हैं। इससे नाभिक का उन इलेक्ट्रॉनों पर आकर्षण बल कमजोर पड़ जाता है और इलेक्ट्रॉनों को त्यागना (जो धातुओ का गुण है) आसान हो जाता है। इसीलिए, उदाहरण के लिए, क्षार धातुओं के वर्ग (ग्रुप 1) में लिथियम (सबसे ऊपर) सबसे कम धात्विक है, जबकि फ्रैंशियम (सबसे नीचे) सबसे अधिक धात्विक है।

प्रश्न 6. आवर्त सारणी के किसी आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों की धात्विक प्रवृत्ति पर क्या प्रभाव पड़ता है?

आवर्त सारणी के किसी आवर्त (पीरियड) में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों की धात्विक प्रवृत्ति (Metallic Character) घटती है और अधात्विक प्रवृत्ति (Non-Metallic Character) बढ़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बायीं ओर के तत्व (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम) इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति रखते हैं (धातु गुण), जबकि दायीं ओर जाने पर परमाणु का आकार घटता है और नाभिकीय आकर्षण बढ़ता है, जिससे तत्व इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने (अधातु गुण) की प्रवृत्ति दिखाने लगते हैं। एक आवर्त के अंत में नोबल गैसें आती हैं, जो पूर्णतः अक्रिय हैं।

प्रश्न 7. आवर्त सारणी के किसी वर्ग में उपर से नीचे जाने पर तत्वों की संयोजकता पर क्या प्रभाव पड़ता है?

आवर्त सारणी के किसी वर्ग (ग्रुप) में उपर से नीचे जाने पर तत्वों की संयोजकता (Valency) सामान्यतः समान रहती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक ही वर्ग के सभी तत्वों के बाह्यतम कोश (वैलेंस शेल) में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। चूंकि संयोजकता मुख्य रूप से वैलेंस इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती है, इसलिए यह वर्ग में नीचे जाने पर नहीं बदलती। उदाहरण के लिए, क्षार धातुओं (ग्रुप 1) के सभी तत्वों की संयोजकता 1 है क्योंकि सभी के बाहरी कोश में 1 इलेक्ट्रॉन है।

प्रश्न 8. आवर्त सारणी के किसी आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों की संयोजकता पर क्या प्रभाव पड़ता है?

आवर्त सारणी के किसी आवर्त (पीरियड) में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों की संयोजकता (Valency) पहले बढ़ती है और फिर घटती है। शुरुआती तत्व (ग्रुप 1, 2) धनात्मक संयोजकता दिखाते हैं जो बढ़ती है। मध्य के तत्व (ग्रुप 13 से 17) ऋणात्मक संयोजकता भी दिखा सकते हैं। आवर्त के अंत में नोबल गैसें (ग्रुप 18) आती हैं जिनकी संयोजकता शून्य होती है क्योंकि उनका बाहरी कोश पूर्ण भरा होता है। उदाहरण के लिए, दूसरे आवर्त (Li से Ne तक) में संयोजकता क्रमशः 1, 2, 3, 4, 3, 2, 1, 0 होती है।

प्रश्न 9. आवर्त सारणी के किसी वर्ग में उपर से नीचे जाने पर तत्वों की विद्युत ऋणात्मकता पर क्या प्रभाव पड़ता है?

आवर्त सारणी के किसी वर्ग (ग्रुप) में उपर से नीचे जाने पर तत्वों की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) घटती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ जाता है और बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं। इससे नाभिक का साझा इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर खींचने का बल (जो विद्युत ऋणात्मकता का माप है) कमजोर पड़ जाता है। उदाहरण के लिए, हैलोजन वर्ग (ग्रुप 17) में फ्लोरीन (सबसे ऊपर) सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक है, जबकि एस्टेटीन (सबसे नीचे) सबसे कम।

प्रश्न 10. आवर्त सारणी के किसी आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों की विद्युत ऋणात्मकता पर क्या प्रभाव पड़ता है?

आवर्त सारणी के किसी आवर्त (पीरियड) में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) बढ़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बायीं से दायीं ओर जाने पर परमाणु आकार घटता है और नाभिकीय आवेश (प्रोटॉनों की संख्या) बढ़ता है। इस बढ़े हुए नाभिकीय आकर्षण के कारण परमाणु साझा इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर अधिक प्रबलता से खींच पाता है। इसीलिए एक आवर्त में बायीं ओर के तत्व (जैसे सोडियम) कम विद्युत ऋणात्मक होते हैं, जबकि दायीं ओर के तत्व (जैसे क्लोरीन) अधिक विद्युत ऋणात्मक होते हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न 1. आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण का आधार है-

A. परमाणु द्रव्यमान
B. परमाणु क्रमांक
C. परमाणु आकार
D. संयोजकता

उत्तर: B. परमाणु क्रमांक
आधुनिक आवर्त सारणी (मोज़ले द्वारा प्रस्तावित) में तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक (Atomic Number) के क्रम में व्यवस्थित किया गया है, न कि परमाणु द्रव्यमान के क्रम में। यही इसका मूल आधार है।

प्रश्न 2. आवर्त सारणी में आवर्त संख्या 6 में तत्वों की संख्या है-

A. 18
B. 8
C. 32
D. इनमें से कोई नहीं

उत्तर: C. 32
आवर्त सारणी के छठे आवर्त (Period 6) में कुल 32 तत्व हैं। इस आवर्त में लैन्थेनाइड श्रृंखला (57 से 71 तक के तत्व) भी शामिल हैं, जिसके कारण इसमें तत्वों की संख्या अधिक (32) हो जाती है।

प्रश्न 3. आवर्त सारणी में बायीं से दायीं ओर जाने पर परमाणु आकार-

A. घटता है
B. बढ़ता है
C. अपरिवर्तित रहता है
D. पहले घटता है फिर बढ़ता है

उत्तर: A. घटता है
किसी आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर परमाणु आकार घटता है। ऐसा नाभिकीय आवेश में वृद्धि और इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक के बढ़ते आकर्षण के कारण होता है, जिससे इलेक्ट्रॉन आवरण सिकुड़ जाता है।

प्रश्न 4. आवर्त सारणी में उपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार-

A. घटता है
B. बढ़ता है
C. अपरिवर्तित रहता है
D. पहले बढ़ता है फिर घटता है

उत्तर: B. बढ़ता है
किसी वर्ग (ग्रुप) में उपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नए इलेक्ट्रॉन कोश जुड़ते जाते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं और परमाणु का आकार बढ़ जाता है।

प्रश्न 5. आवर्त सारणी में उपर से नीचे जाने पर धात्विक प्रवृत्ति-

A. घटती है
B. बढ़ती है
C. अपरिवर्तित रहती है
D. पहले बढ़ती है फिर घटती है

उत्तर: B. बढ़ती है
किसी वर्ग में उपर से नीचे जाने पर तत्वों की धात्विक प्रवृत्ति बढ़ती है। नीचे के तत्वों में इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति अधिक होती है क्योंकि उनके बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर और कमजोर आकर्षण बल में बंधे होते हैं।

प्रश्न 6. आवर्त सारणी में बायीं से दायीं ओर जाने पर धात्विक प्रवृत्ति-

A. घटती है
B. बढ़ती है
C. अपरिवर्तित रहती है
D. पहले बढ़ती है फिर घटती है

उत्तर: A. घटती है
किसी आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर धात्विक प्रवृत्ति घटती है और अधात्विक प्रवृत्ति बढ़ती है। बायीं ओर के तत्व इलेक्ट्रॉन दान करते हैं (धातु गुण) जबकि दायीं ओर के तत्व इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं (अधातु गुण)।

प्रश्न 7. आवर्त सारणी में उपर से नीचे जाने पर विद्युत ऋणात्मकता-

A. घटती है
B. बढ़ती है
C. अपरिवर्तित रहती है
D. पहले बढ़ती है फिर घटती है

उत्तर: A. घटती है
किसी वर्ग में उपर से नीचे जाने पर तत्वों की विद्युत ऋणात्मकता घटती है। नीचे के तत्वों का परमाणु आकार बड़ा होने के कारण वे साझा इलेक्ट्रॉन युग्म को कमजोरता से अपनी ओर खींच पाते हैं।

प्रश्न 8. आवर्त सारणी में बायीं से दायीं ओर जाने पर विद्युत ऋणात्मकता-

A. घटती है
B. बढ़ती है
C. अपरिवर्तित रहती है
D. पहले बढ़ती है फिर घटती है

उत्तर: B. बढ़ती है
किसी आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर विद्युत ऋणात्मकता बढ़ती है। दायीं ओर के तत्वों का परमाणु आकार छोटा और नाभिकीय आवेश अधिक होता है, जिससे वे इलेक्ट्रॉन युग्म को प्रबलता से आकर्षित करते हैं।

प्रश्न 9. आवर्त सारणी में उपर से नीचे जाने पर संयोजकता-

A. घटती है
B. बढ़ती है
C. अपरिवर्तित रहती है
D. पहले बढ़ती है फिर घटती है

उत्तर: C. अपरिवर्तित रहती है
किसी वर्ग (ग्रुप) में उपर से नीचे जाने पर तत्वों की संयोजकता सामान्यतः समान रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक ही वर्ग के सभी तत्वों के बाहरी कोश (वैलेंस शेल) में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, जो संयोजकता निर्धारित करती है।

प्रश्न 10. आवर्त सारणी में बायीं से दायीं ओर जाने पर संयोजकता-

A. घटती है
B. बढ़ती है
C. अपरिवर्तित रहती है
D. पहले बढ़ती है फिर घटती है

उत्तर: D. पहले बढ़ती है फिर घटती है
किसी आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर संयोजकता पहले बढ़ती है और फिर घटती है। यह बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या में परिवर्तन के अनुरूप होता है और आवर्त के अंत में नोबल गैसों पर जाकर शून्य हो जाती है।

प्रश्न 1. आवर्त सारणी में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों के परमाणु आकार में क्या परिवर्तन होता है?

आवर्त सारणी में किसी आवर्त (पीरियड) में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों का परमाणु आकार (Atomic Size) घटता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक ही आवर्त में बायीं से दायीं ओर जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है, जिससे नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या और नाभिकीय आवेश बढ़ता है। इस बढ़े हुए आकर्षण बल के कारण इलेक्ट्रॉनों का आवरण नाभिक की ओर अधिक खिंचता है, जिससे परमाणु का आकार छोटा हो जाता है।

प्रश्न 2. आवर्त सारणी में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों की धात्विक प्रकृति में क्या परिवर्तन होता है?

आवर्त सारणी में किसी वर्ग (ग्रुप) में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों की धात्विक प्रकृति बढ़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है और बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं। इससे नाभिक का आकर्षण बल बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर कमजोर पड़ता है और इलेक्ट्रॉनों को त्यागना (जिससे धनायन बनते हैं) आसान हो जाता है, जो धातुओं की एक प्रमुख विशेषता है।

प्रश्न 3. आधुनिक आवर्त सारणी में कितने आवर्त और कितने वर्ग हैं?

आधुनिक आवर्त सारणी (मेंडलीफ की आवर्त सारणी का आधुनिक रूप) में कुल 7 आवर्त (हॉरिजॉन्टल पंक्तियाँ) और 18 वर्ग (वर्टिकल कॉलम) हैं। इन 18 वर्गों को IUPAC (इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री) द्वारा 1 से 18 तक की संख्याओं से दर्शाया जाता है।

प्रश्न 4. आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को किस आधार पर वर्गीकृत किया गया है?

आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों का वर्गीकरण परमाणु संख्या (Atomic Number) के बढ़ते क्रम के आधार पर किया गया है। इसमें तत्वों को उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration) के अनुसार व्यवस्थित किया गया है, जिससे समान गुण वाले तत्व एक ही वर्ग (Group) में आ जाते हैं।

प्रश्न 5. मेंडलीफ की आवर्त सारणी में तत्वों को किस आधार पर वर्गीकृत किया गया था?

मेंडलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में तत्वों को परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass) के बढ़ते क्रम के आधार पर वर्गीकृत किया था। उन्होंने देखा कि जब तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के क्रम में रखा जाता है, तो समान रासायनिक एवं भौतिक गुण वाले तत्व निश्चित अंतराल के बाद दोहराते हैं। इस नियमितता को आवर्त नियम (Periodic Law) कहा गया।

प्रश्न 6. आवर्त सारणी में किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार में क्या परिवर्तन होता है?

आवर्त सारणी में किसी वर्ग (Group) में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों का परमाणु आकार बढ़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नीचे जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनों के नए कोश (Shells) जुड़ते जाते हैं। इन अतिरिक्त कोशों के कारण बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं और परमाणु का आकार बढ़ जाता है, भले ही नाभिकीय आवेश भी बढ़ता है।

प्रश्न 7. आवर्त सारणी में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों की धात्विक प्रकृति में क्या परिवर्तन होता है?

आवर्त सारणी में किसी आवर्त (Period) में बायीं से दायीं ओर जाने पर तत्वों की धात्विक प्रकृति घटती है और अधात्विक प्रकृति बढ़ती है। बायीं ओर के तत्व (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम) स्पष्ट धातुएँ होती हैं, जो इलेक्ट्रॉन दान करके धनायन बनाती हैं। दायीं ओर बढ़ने पर (जैसे फॉस्फोरस, सल्फर, क्लोरीन) तत्व इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाने की प्रवृत्ति दिखाते हैं, यानी अधातुएँ होती हैं। आवर्त के अंत में उत्कृष्ट गैसें (Noble Gases) आती हैं, जो स्थिर होती हैं।

प्रश्न 8. आवर्त सारणी में धातु, अधातु एवं उपधातु कहाँ स्थित होते हैं?

श्रेणी आवर्त सारणी में स्थिति
धातु (Metals) आवर्त सारणी के बायीं ओर और मध्य भाग में स्थित होती हैं। इसमें क्षार धातुएँ (Group 1), क्षारीय मृदा धातुएँ (Group 2), संक्रमण धातुएँ (बीच के ब्लॉक) और आंतरिक संक्रमण धातुएँ (लैन्थनाइड और ऐक्टिनाइड) शामिल हैं।
अधातु (Non-Metals) आवर्त सारणी के दायीं ओर (Group 14 के कार्बन से लेकर Group 17 के हैलोजन तक) स्थित होती हैं। Group 18 की उत्कृष्ट गैसें भी अधातु हैं।
उपधातु (Metalloids) ये धातु और अधातु के बीच की रेखा (Zig-Zag Line) के साथ स्थित होते हैं। इनमें बोरॉन (B), सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge), आर्सेनिक (As), एंटीमनी (Sb), टेल्यूरियम (Te) और पोलोनियम (Po) जैसे तत्व शामिल हैं, जो धातु और अधातु दोनों के गुण प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 9. आवर्त सारणी में हैलोजन तत्व किस वर्ग में रखे गए हैं?

हैलोजन तत्व आधुनिक आवर्त सारणी के वर्ग 17 (Group 17) में रखे गए हैं। इन्हें IUPAC नामकरण के अनुसार Group 17 कहा जाता है। इस वर्ग के तत्व हैं: फ्लोरीन (F), क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I), एस्टेटीन (At), और टेनेसीन (Ts)। इन सभी के बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए ये एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके -1 आवेश वाले आयन (एनायन) बनाने की प्रबल प्रवृत्ति रखते हैं।

प्रश्न 10. आवर्त सारणी में उत्कृष्ट गैसें किस वर्ग में रखी गई हैं?

उत्कृष्ट गैसें (Noble Gases) आधुनिक आवर्त सारणी के वर्ग 18 (Group 18) में रखी गई हैं। इस वर्ग के तत्व हैं: हीलियम (He), नियॉन (Ne), आर्गन (Ar), क्रिप्टॉन (Kr), ज़ीनॉन (Xe), रेडॉन (Rn), और ओगनेसॉन (Og)। इनके बाहरी कोश पूर्णतः भरे हुए (स्टेबल) होते हैं, इसलिए ये सामान्य परिस्थितियों में अक्रिय (Inert) होती हैं और अन्य तत्वों के साथ आसानी से अभिक्रिया नहीं करतीं।

प्रश्न 11. आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण का क्या लाभ है?

आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण के निम्नलिखित महत्वपूर्ण लाभ हैं:

  1. तत्वों के गुणों का अध्ययन सरल हो जाता है: समान गुण वाले तत्व एक ही वर्ग में होने से उनके गुणों की तुलना और भविष्यवाणी आसान हो जाती है।
  2. नए तत्वों की खोज में सहायक: सारणी में रिक्त स्थानों को देखकर वैज्ञानिकों ने गैलियम, स्कैंडियम और जर्मेनियम जैसे तत्वों के अस्तित्व और गुणों का सफलतापूर्वक अनुमान लगाया।
  3. रासायनिक व्यवहार की समझ: किसी तत्व का वर्ग और आवर्त जानकर उसकी संयोजकता, अभिक्रियाशीलता और यौगिक बनाने की प्रवृत्ति का पता लगाया जा सकता है।
  4. विज्ञान की विभिन्न शाखाओं में उपयोगी: रसायन विज्ञान, भौतिकी, भूविज्ञान और जीव विज्ञान में तत्वों और उनके यौगिकों के अध्ययन के लिए आवर्त सारणी एक मूलभूत संदर्भ (Reference) का काम करती है।

प्रश्न 12. मेंडलीफ की आवर्त सारणी के दोष लिखिए।

मेंडलीफ की आवर्त सारणी एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, लेकिन इसमें कुछ दोष या सीमाएँ थीं:

  1. हाइड्रोजन की स्थिति अनिश्चित: हाइड्रोजन के गुण क्षार धातुओं (Group 1) और हैलोजन (Group 17) दोनों से मिलते-जुलते हैं। मेंडलीफ की सारणी में इसे एक निश्चित स्थान नहीं दिया जा सका।
  2. समस्थानिकों (Isotopes) की व्याख्या नहीं: एक ही तत्व के विभिन्न समस्थानिकों का परमाणु द्रव्यमान अलग-अलग होता है, लेकिन रासायनिक गुण समान होते हैं। परमाणु द्रव्यमान के आधार पर बनी इस सारणी में उन्हें अलग-अलग स्थान मिलना चाहिए था, जो तर्कसंगत नहीं है।
  3. कुछ तत्वों का क्रम उलटा: परमाणु द्रव्यमान के बढ़ते क्रम के नियम के अनुसार, आयोडीन (परमाणु द्रव्यमान 127) को टेल्यूरियम (परमाणु द्रव्यमान 128) के बाद आना चाहिए था, लेकिन गुणों की समानता के कारण मेंडलीफ ने टेल्यूरियम को पहले रखा।
  4. लैन्थनाइड और ऐक्टिनाइड तत्वों के लिए अलग स्थान नहीं: इन तत्वों को मुख्य सारणी में रखने से यह बहुत लंबी हो जाती और असुविधाजनक बन जाती। आधुनिक सारणी में इन्हें अलग नीचे दिखाया जाता है।

प्रश्न 13. आवर्त सारणी के आधुनिक संस्करण में लैन्थनाइड एवं ऐक्टिनाइड तत्वों को अलग क्यों रखा गया है?

आधुनिक आवर्त सारणी में लैन्थनाइड और ऐक्टिनाइड तत्वों को मुख्य सारणी से अलग नीचे दो अलग-अलग पंक्तियों में रखा गया है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

  1. सारणी को सुव्यवस्थित और संक्षिप्त बनाने के लिए: यदि इन 14-14 तत्वों को मुख्य सारणी के 6वें और 7वें आवर्त में रखा जाता, तो सारणी बहुत लंबी और चौड़ी हो जाती, जिससे इसका उपयोग और समझना मुश्किल होता।
  2. गुणों में अत्यधिक समानता: लैन्थनाइड श्रृंखला (परमाणु क्रमांक 58 से 71) के सभी तत्वों के गुण लैन्थनम से बहुत मिलते-जुलते हैं। इसी प्रकार, ऐक्टिनाइड श्रृंखला (परमाणु क्रमांक 90 से 103) के तत्वों के गुण ऐक्टिनियम से मिलते हैं। अलग रखने से यह समानता स्पष्ट दिखती है।
  3. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की विशेषता: इन तत्वों में इलेक्ट्रॉन सबसे बाहरी कोश (n) में न जाकर अंतिम से दूसरे कोश (n-2) के f-उपकोश में भरते हैं। इसलिए इन्हें f-ब्लॉक के तत्व कहा जाता है और उनकी इस विशेषता को उजागर करने के लिए अलग रखा जाता है।

प्रश्न 14. आवर्त सारणी के किसी वर्ग के सभी सदस्यों के गुण समान क्यों होते हैं?

किसी वर्ग (Group) के सभी तत्वों के गुण समान होते हैं क्योंकि उन सभी का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration) समान प्रकार का होता है, विशेष रूप से उनके संयोजकता कोश (Valence Shell) में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। उदाहरण के लिए, क्षार धातुओं (Group 1) के सभी तत्वों के बाहरी कोश में केवल 1 इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए वे सभी अत्यधिक अभिक्रियाशील होते हैं, +1 आवेश का आयन बनाते हैं, पानी के साथ अभिक्रिया कर क्षार बनाते हैं आदि। यह समान संयोजकता इलेक्ट्रॉन ही तत्व के रासायनिक व्यवहार को निर्धारित करते हैं, इसलिए एक ही वर्ग के तत्व समान गुण प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 15. आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण के लिए किसी एक मापदंड का उपयोग क्यों पर्याप्त नहीं है?

किसी एक मापदंड (जैसे केवल परमाणु द्रव्यमान या केवल भौतिक गुण) के आधार पर तत्वों का पूर्ण और त्रुटिहीन वर्गीकरण करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि:

  1. अपवादों की समस्या: यदि केवल परमाणु द्रव्यमान को आधार माना जाए (जैसा मेंडलीफ ने किया), तो कुछ स्थानों पर गुणों की समानता बनाए रखने के लिए क्रम को उलटना पड़ता है (जैसे टेल्यूरियम और आयोडीन के मामले में)।
  2. समग्र चित्र का अभाव: एक ही मापदंड तत्व के सभी पहलुओं (रासायनिक अभिक्रियाशीलता, संयोजकता, आयनन एन्थैल्पी, विद्युत ऋणात्मकता आदि) को समझाने में सक्षम नहीं होता।
  3. मूल कारण तक नहीं पहुँचता: परमाणु द्रव्यमान या अन्य भौतिक गुण तत्व के व्यवहार का मूल कारण नहीं हैं। मूल कारण है परमाणु संख्या और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास। आधुनिक आवर्त नियम इसी मूल कारण पर आधारित है, जो अधिक वैज्ञानिक और व्यापक है।
इसलिए, एक सफल वर्गीकरण के लिए ऐसा मापदंड चुनना आवश्यक है जो तत्वों के गुणों में आवर्तिता (Periodicity) का मूलभूत और सार्वभौमिक कारण हो।

प्रश्न 1. आवर्त सारणी में बायें से दायें जाने पर तत्वों के परमाणु आकार किस प्रकार परिवर्तित होते हैं?

जब हम आवर्त सारणी में एक आवर्त (पीरियड) में बायें से दायें जाने पर, तत्वों का परमाणु आकार (Atomic Size) घटता जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक ही आवर्त में बायें से दायें जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है, जिससे नाभिक पर धनावेश बढ़ जाता है। साथ ही, इलेक्ट्रॉन नए कोश में न जाकर उसी कोश में जुड़ते हैं। इससे नाभिक का इलेक्ट्रॉनों पर आकर्षण बल बढ़ जाता है और इलेक्ट्रॉन नाभिक के अधिक निकट खिंच जाते हैं, जिससे परमाणु का आकार घट जाता है।

प्रश्न 2. आवर्त सारणी में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों के परमाणु आकार किस प्रकार परिवर्तित होते हैं?

आवर्त सारणी में एक वर्ग (ग्रुप) में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों का परमाणु आकार बढ़ता जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नीचे जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ इलेक्ट्रॉनों के नए कोश (ऊर्जा स्तर) जुड़ते जाते हैं। नए कोश जुड़ने से इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं और नाभिक का आकर्षण बल भी आवरण (शील्डिंग) के कारण कम प्रभावी हो जाता है। इस कारण परमाणु का आकार बढ़ जाता है।

प्रश्न 3. आधुनिक आवर्त सारणी में कितने आवर्त और कितने वर्ग हैं?

आधुनिक आवर्त सारणी (मेंडलीफ की आवर्त सारणी का आधुनिक रूप) में कुल 7 आवर्त (Periods) और 18 वर्ग (Groups) हैं।

प्रश्न 4. आवर्त सारणी के किस वर्ग में सबसे अधिक धात्विक तत्व हैं?

आवर्त सारणी के वर्ग 1 में सबसे अधिक धात्विक तत्व पाए जाते हैं। इस वर्ग को क्षार धातु (Alkali Metals) कहा जाता है। इनमें लिथियम (Li), सोडियम (Na), पोटैशियम (K), रुबिडियम (Rb), सीज़ियम (Cs) और फ्रैन्सियम (Fr) शामिल हैं। ये सभी अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ हैं।

प्रश्न 5. आवर्त सारणी के किस वर्ग में अधातुएँ स्थित हैं?

आवर्त सारणी में अधातुएँ मुख्य रूप से दायीं ओर स्थित हैं। विशेष रूप से, वर्ग 17 (हैलोजन) और वर्ग 18 (उत्कृष्ट गैसें) में अधातुएँ पाई जाती हैं। इसके अलावा, कार्बन (C), नाइट्रोजन (N), ऑक्सीजन (O), फॉस्फोरस (P), सल्फर (S), सेलेनियम (Se) जैसी अधातुएँ भी अन्य वर्गों में मौजूद हैं, लेकिन वर्ग 17 और 18 पूर्णतः अधातुओं के वर्ग हैं।

प्रश्न 6. आवर्त सारणी के प्रथम आवर्त में कितने तत्व हैं?

आवर्त सारणी के प्रथम आवर्त में केवल 2 तत्व हैं - हाइड्रोजन (H) और हीलियम (He)। यह सबसे छोटा आवर्त है क्योंकि इस आवर्त में केवल 1s कक्षक (Orbital) भरता है, जिसमें अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।

प्रश्न 7. आवर्त सारणी के द्वितीय आवर्त में कितने तत्व हैं?

आवर्त सारणी के द्वितीय आवर्त में कुल 8 तत्व हैं। ये तत्व हैं: लिथियम (Li), बेरिलियम (Be), बोरॉन (B), कार्बन (C), नाइट्रोजन (N), ऑक्सीजन (O), फ्लोरीन (F) और नियॉन (Ne)। इस आवर्त में दूसरा कोश (n=2) भरता है, जिसमें 2s और 2p कक्षक होते हैं, जिनमें कुल 8 इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।

प्रश्न 8. आवर्त सारणी के तृतीय आवर्त में कितने तत्व हैं?

आवर्त सारणी के तृतीय आवर्त में भी 8 तत्व हैं। ये तत्व हैं: सोडियम (Na), मैग्नीशियम (Mg), एल्युमिनियम (Al), सिलिकॉन (Si), फॉस्फोरस (P), सल्फर (S), क्लोरीन (Cl) और आर्गन (Ar)। इस आवर्त में तीसरा कोश (n=3) भरता है, लेकिन केवल 3s और 3p कक्षक ही भरते हैं, इसलिए इसमें भी 8 तत्व ही आते हैं।

प्रश्न 9. आवर्त सारणी के वर्ग 1 के तत्वों को क्या कहते हैं?

आवर्त सारणी के वर्ग 1 के तत्वों को 'क्षार धातु' (Alkali Metals) कहा जाता है। इनके नाम हैं: लिथियम (Li), सोडियम (Na), पोटैशियम (K), रुबिडियम (Rb), सीज़ियम (Cs) और फ्रैन्सियम (Fr)। ये सभी नरम, चमकदार, अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ हैं जो पानी के साथ तीव्र अभिक्रिया कर क्षार (Alkali) बनाती हैं, इसीलिए इन्हें यह नाम दिया गया है।

प्रश्न 10. आवर्त सारणी के वर्ग 2 के तत्वों को क्या कहते हैं?

आवर्त सारणी के वर्ग 2 के तत्वों को 'क्षारीय मृदा धातु' (Alkaline Earth Metals) कहा जाता है। इनके नाम हैं: बेरिलियम (Be), मैग्नीशियम (Mg), कैल्शियम (Ca), स्ट्रोंशियम (Sr), बेरियम (Ba) और रेडियम (Ra)। ये धातुएँ भी क्रियाशील होती हैं लेकिन क्षार धातुओं से कम। इनके ऑक्साइड जल में घुलकर क्षारीय विलयन बनाते हैं और पृथ्वी की पपड़ी (Crust) में पाए जाते हैं, इसीलिए इन्हें यह नाम मिला।

प्रश्न 11. आवर्त सारणी के वर्ग 17 के तत्वों को क्या कहते हैं?

आवर्त सारणी के वर्ग 17 के तत्वों को 'हैलोजन' (Halogens) कहा जाता है। हैलोजन का अर्थ है 'लवण निर्माता'। इनके नाम हैं: फ्लोरीन (F), क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br), आयोडीन (I) और एस्टेटीन (At)। ये सभी अधातुएँ हैं और अत्यधिक क्रियाशील होती हैं। ये धातुओं के साथ अभिक्रिया करके लवण (हैलाइड) बनाती हैं, इसीलिए इन्हें यह नाम दिया गया है।

प्रश्न 12. आवर्त सारणी के वर्ग 18 के तत्वों को क्या कहते हैं?

आवर्त सारणी के वर्ग 18 के तत्वों को 'उत्कृष्ट गैसें' (Noble Gases) या 'अक्रिय गैसें' (Inert Gases) कहा जाता है। इनके नाम हैं: हीलियम (He), नियॉन (Ne), आर्गन (Ar), क्रिप्टॉन (Kr), ज़ीनॉन (Xe) और रेडॉन (Rn)। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनके बाहरी कोश पूर्णतः भरे हुए होते हैं, जिस कारण ये बहुत ही कम क्रियाशील होती हैं और सामान्य परिस्थितियों में किसी भी तत्व के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं।

प्रश्न 13. आवर्त सारणी में धातुएँ किस ओर स्थित हैं?

आवर्त सारणी में धातुएँ बायीं ओर और बीच में स्थित हैं। अधिकांश तत्व धातुएँ ही हैं। विशेष रूप से, वर्ग 1, 2 और सभी संक्रमण तत्व (ब्लॉक d और f के तत्व) धातुएँ हैं। आवर्त सारणी में एक तिरछी रेखा (Zig-zag Line) बोरॉन (B) से एस्टेटीन (At) तक खींची जाती है, इस रेखा के बायीं ओर के तत्व (हाइड्रोजन को छोड़कर) मुख्य रूप से धातुएँ होते हैं।

प्रश्न 14. आवर्त सारणी में अधातुएँ किस ओर स्थित हैं?

आवर्त सारणी में अधातुएँ दायीं ओर स्थित हैं। वर्ग 14 के कार्बन (C), वर्ग 15 के नाइट्रोजन (N) और फॉस्फोरस (P), वर्ग 16 के ऑक्सीजन (O), सल्फर (S), सेलेनियम (Se), और पूरे वर्ग 17 (हैलोजन) तथा वर्ग 18 (उत्कृष्ट गैसें) अधातुएँ हैं। वह तिरछी रेखा जो धातुओं और अधातुओं को अलग करती है, उसके दायीं ओर (और रेखा पर स्थित कुछ तत्व) अधातुएँ माने जाते हैं।

प्रश्न 15. आवर्त सारणी में उपधातुएँ कहाँ स्थित हैं?

आवर्त सारणी में उपधातुएँ (Metalloids) धातुओं और अधातुओं के बीच की तिरछी रेखा पर स्थित हैं। ये ऐसे तत्व हैं जिनमें धातु और अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं। मुख्य उपधातुएँ हैं: बोरॉन (B), सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge), आर्सेनिक (As), एंटीमनी (Sb), टेल्यूरियम (Te) और पोलोनियम (Po)। ये तत्व आवर्त सारणी में वर्ग 13 से 16 के बीच पाए जाते हैं।

प्रश्न 16. आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण का आधुनिक आधार क्या है?

आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण का आधार 'परमाणु क्रमांक' (Atomic Number) है। आधुनिक आवर्त नियम (मोसले द्वारा प्रतिपादित) के अनुसार, "तत्वों के गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्त फलन होते हैं।" इसका अर्थ है कि जैसे-जैसे परमाणु क्रमांक बढ़ता है, तत्वों के गुण भी एक निश्चित पैटर्न में दोहराते (आवर्ती) हैं। परमाणु क्रमांक ही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निर्धारित करता है, जो किसी तत्व के रासायनिक गुणों के लिए जिम्मेदार होता है।

प्रश्न 17. मेंडलीफ की आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण का आधार क्या था?

मेंडलीफ की आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण का आधार 'परमाणु द्रव्यमान' (Atomic Mass) था। मेंडलीफ के आवर्त नियम के अनुसार, "तत्वों के गुण उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्त फलन होते हैं।" मेंडलीफ ने तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्थित किया और देखा कि समान गुण वाले तत्व निश्चित अंतराल के बाद आते हैं। हालाँकि, इस आधार पर कुछ विसंगतियाँ थीं, जिन्हें बाद में परमाणु क्रमांक के आधार पर सही किया गया।

प्रश्न 18. आवर्त सारणी में आवर्त से क्या तात्पर्य है?

आवर्त सारणी में 'आवर्त' (Period) क्षैतिज पंक्तियों को कहते हैं। आवर्त सारणी में कुल 7 आवर्त हैं। एक ही आवर्त में बायें से दायें जाने पर तत्वों के गुणों में क्रमिक परिवर्तन होता है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में एक ही प्रमुख ऊर्जा स्तर (कोश) भरता रहता है। उदाहरण के लिए, दूसरे आवर्त के सभी तत्वों में दो कोश होते हैं। आवर्त संख्या उस तत्व के इलेक्ट्रॉनों के सबसे बाहरी कोश (मुख्य क्वांटम संख्या n) को दर्शाती है।

प्रश्न 19. आवर्त सारणी में वर्ग से क्या तात्पर्य है?

आवर्त सारणी में 'वर्ग' (Group) ऊर्ध्वाधर स्तंभों को कहते हैं। आधुनिक आवर्त सारणी में 1 से 18 तक कुल 18 वर्ग हैं। एक ही वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों के भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है, लेकिन उनके रासायनिक गुण समान होते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक ही वर्ग के सभी तत्वों के बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। उदाहरण के लिए, वर्ग 1 के सभी तत्वों के बाहरी कोश में 1 इलेक्ट्रॉन होता है।

प्रश्न 20. आवर्त सारणी में बायें से दायें जाने पर तत्वों की धात्विक प्रवृत्ति किस प्रकार परिवर्तित होती है?

आवर्त सारणी में एक आवर्त में बायें से दायें जाने पर तत्वों की धात्विक प्रवृत्ति घटती जाती है। बायीं ओर के तत्व (जैसे सोडियम, मैग्नीशियम) स्पष्ट धातुएँ होती हैं, जो इलेक्ट्रॉन दान करने की प्रवृत्ति रखती हैं। दायीं ओर जाने पर (जैसे फॉस्फोरस, सल्फर, क्लोरीन) तत्वों में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति (अधात्विक गुण) बढ़ जाती है। आवर्त के अंत में उत्कृष्ट गैसें आती हैं, जो न तो इलेक्ट्रॉन दान करती हैं और न ही ग्रहण करती हैं।

प्रश्न 4.

दीर्घाकार आवर्त-सारणी की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए। (2011, 12, 13, 14, 16, 18) या दीर्घाकार आवर्त-सारणी के चार गुण लिखिए। (2018)

उत्तर:

दीर्घाकार आवर्त-सारणी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं -

  1. यह सारणी तत्वों के सबसे मौलिक गुण परमाणु क्रमांक पर आधारित है, जबकि मेन्डेलीफ की सारणी परमाणु भार पर आधारित थी।
  2. इसमें प्रत्येक तत्व की स्थिति उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से सीधे संबंधित है, जिससे यह एक अधिक तार्किक और वैज्ञानिक व्यवस्था बन गई है।
  3. इस सारणी से तत्वों के रासायनिक गुणों में समानता, भिन्नता और आवर्ती परिवर्तन स्वतः ही स्पष्ट हो जाते हैं।
  4. इसे याद रखना अपेक्षाकृत सरल है क्योंकि इसमें तत्वों का क्रम तार्किक और व्यवस्थित है।
  5. इसमें मुख्य समूह और संक्रमण तत्व अलग-अलग खंडों में रखे गए हैं, जिससे समान गुणों वाले तत्व एक साथ दिखाई देते हैं।
  6. इस सारणी में तत्वों को उनके गुणों के आधार पर और भी स्पष्ट रूप से वर्गीकृत किया गया है; जैसे—सक्रिय धातुएँ, संक्रमण धातुएँ, उपधातुएँ, अक्रिय गैसें, लैन्थेनाइड और ऐक्टिनाइड श्रृंखला के तत्व।
  7. मेन्डेलीफ की सारणी की तरह इसमें किसी तत्व के गुणों के बारे में गलत अनुमान लगाने की संभावना नहीं रहती, क्योंकि यह परमाणु संरचना पर आधारित है।
  8. संक्रमण तत्वों की परिभाषा और स्थिति इस सारणी में बहुत स्पष्ट है, क्योंकि ये d-ब्लॉक में स्थित हैं।
  9. लैन्थेनाइड (परमाणु क्रमांक 58 से 71) और ऐक्टिनाइड (परमाणु क्रमांक 90 से 103) श्रृंखलाओं को सारणी के नीचे अलग से रखा गया है, जिससे मुख्य सारणी का आकार सुव्यवस्थित रहता है और इन तत्वों के समान रासायनिक गुण प्रदर्शित होते हैं।

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